हाथियों को गांवों में प्रवेश से रोकेगा बांस का बखार, वन विभाग ने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए की ये पहल

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Apr 2024 5:56 PM

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हाथियों को अब जंगल में ही मिल जाएगा भोजन, नहीं करेंगे गांव का रुख. प्रभात खबर

हाल के महीनों में क्षेत्र में जंगली हाथियों के आगमन में वृद्धि चिंता का विषय है. अब जंगली हाथियों का झुंड भोजन की तलाश में गांवों की ओर विचरण नहीं करेगा.

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ललपनिया, नागेश्वर : बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड के हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल के चतरोचट्टी वन बिट के उत्तरी झुमरा पहाड़ पर 100 हेक्टेयर भूमि पर बांस का बखार लगाया जा रहा है. साथ ही, 50 हेक्टेयर भूमि पर सिल्वीकल्चर ऑपरेशन का कार्य बड़े पैमाने पर शुरू किया गया है. बांस के बखार में 10 हजार बांस के पौधों को संरक्षण मिलेगा.

वहीं सिल्वीकल्चर ऑपरेशन से दर्जनों कंटूर, छोटे-छोटे चेकडैम व गली प्लगिंग के तहत वन संवर्धन, मृदा संरक्षण, जल संरक्षण को बल मिलेगा. बांस का यह बखार जंगली हाथियों को गांवों में प्रवेश से रोकेगा. इससे जानमाल की हानि नहीं होगी. जानकारी के अनुसार, बांस के बखार के तहत बांस संरक्षण से एक ओर वन विभाग को जंगली बांस मिलेगा, वहीं जंगली हाथियों को वन में आसानी से भोजन उपलब्ध हो सकेगा.

हाल के महीनों में क्षेत्र में जंगली हाथियों के आगमन में वृद्धि चिंता का विषय बना हुआ है. अब जंगली हाथियों का झुंड भोजन की तलाश में गांवों की ओर विचरण नहीं करेगा. बताते चलें कि जंगली हाथियों का प्रिय भोजन बांस होता है और यह वन में आसानी से मिल जाये, तो जंगली हाथी गांवों का रुख नहीं करेगे.

वन विभाग ने ग्रामीणाें से जंगल में आग नहीं लगाने की अपील की :

50 हेक्टेयर में सिल्वीकल्चर ऑपरेशन के तहत छोटी झाड़ी और पौधों को संवारने का कार्य हो रहा है. साथ ही, छोटे डैम, गली प्लगिंग से वन में मिट्टी का बहाव रुकेगा. इससे वनों के विकास को बल मिलेगा.

योजना के क्रियान्वयन पर क्षेत्र के रेंजर सुरेश राम ने कहा कि डीएफओ सौरभ चंद्रा के दिशा-निर्देश में बांस के बखार और सिल्वीकल्चर ऑपरेशन का कार्य काफी तेज गति से किया जा रहा है. कार्य प्रभारी वनपाल रजा अहमद की देखरेख में किया जा रहा है.

रेंजर श्री राम ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे महुआ चुनने के क्रम में पेड़ की चारों तरफ साफ-सफाई करें, ना कि जंगल में आग लगायें. आग लगने से जंगल में पौधे झुलस जाते हैं, जिससे वन विकास में काफी मुश्किल होती है.

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