समरेश उतरेंगे चुनावी मैदान में या सौंपेंगे राजनीतिक विरासत
Author Prabhat khabar digital desk
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बोकारो : समरेश सिंह. बोकारो जिला का एक ऐसा नाम जो राजनीति की समानांतर रेखा खींचे जाने के लिए जाने जाते हैं. चाहे सत्ता में रहे या विपक्ष में, हर राजनीतिक कोण से वह अपने अंदाज के लिए जाने जाते हैं. चाहे विपक्ष की राजनीति करते हुए नरेंद्र मोदी की नीतियों के समर्थन की बात […]
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बोकारो : समरेश सिंह. बोकारो जिला का एक ऐसा नाम जो राजनीति की समानांतर रेखा खींचे जाने के लिए जाने जाते हैं. चाहे सत्ता में रहे या विपक्ष में, हर राजनीतिक कोण से वह अपने अंदाज के लिए जाने जाते हैं.
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चाहे विपक्ष की राजनीति करते हुए नरेंद्र मोदी की नीतियों के समर्थन की बात हो या लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार को नसीहत देने की. हर बार समरेश सिंह का अंदाज अपना होता है. झारखंड में विधानसभा चुनाव दस्तक देने वाली है.
ऐसे में समरेश सिंह एक बार फिर से चर्चा में हैं. न सिर्फ समरेश सिंह बल्कि उनका पूरा परिवार ही राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है. बोकारो में यह चर्चा आम है कि क्या दादा फिर से चुनावी मैदान में उतरेंगे या किसी को अपनी राजनीतिक विरासत सौंपेंगे. दरअसल, समरेश सिंह की दोनों बहू श्वेता सिंह व डॉ परिंदा सिंह व पुत्र संग्राम सिंह राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं.
जहां एक ओर समरेश सिंह का फिर से चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है, वहीं संग्राम सिंह ने संस्था लोक प्रोगेसिव मंच की बैठक कर अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं. बहू श्वेता सिंह प्रदेश युवा कांग्रेस के जरिये राजनीति कर रही हैं, तो डॉ परिंदा सिंह राष्ट्रीय विकास समिति व कांग्रेस के जरिये राजनीतिक चाल चल रही हैं. क्षेत्र समरेश सिंह के परिवार की राजनीतिक चाल का इंतजार कर रहा है.
बड़ा सवाल क्या दादा मानेंगे…
समरेश सिंह को जुझारू नेता माना जाता है. वह कभी हार नहीं मानते. मौजूदा समय में भी क्षेत्र में सक्रिय हैं. ढलती उम्र में भी वह विभिन्न समस्या को लेकर दौरा करते रहते हैं. ऐसे में सवाल क्या दादा अपने इतर अपनी राजनीतिक विरासत किसी को सौंपेंगे. दादा के नजदीकियों के अनुसार कम से कम इस चुनाव में तो दादा किस्मत आजमायेंगे.
राजनीतिक पंडितों की माने तो अगर कांग्रेस की ओर से समरेश सिंह परिवार के किसी सदस्य को टिकट नहीं मिला या महागठबंधन की स्थिति में सीट दूसरे दल को देना पड़ा तो समरेश सिंह निर्दलीय मैदान में ताल ठोकेंगे. ऐसा इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि समरेश सिंह वर्तमान में किसी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं.
डॉ परिंदा सिंह या संग्राम सिंह पर नजर
समरेश सिंह की पुत्रवधु डॉ परिंदा सिंह व छोटे पुत्र संग्राम सिंह को राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा है. कांग्रेस के वरीय राष्ट्रीय नेता के साथ संबंध होने के कारण संग्राम सिंह की दावेदारी मजबूत दिखती है. वहीं संग्राम सिंह की पत्नी श्वेता सिंह का प्रदेश युवा कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय होना भी इसकी वजह मानी जा रही है.
2016 के छात्र चुनाव में भी संग्राम सिंह ने विभिन्न कॉलेज में अपनी टीम को जीत दिलाने का काम किया था. वहीं डॉ परिंदा सिंह चास क्षेत्र में सक्रिय रूप से जन समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रही है. लोकसभा चुनाव के पहले डॉ सिंह ने कांग्रेस ज्वॉइन कर अपनी मंशा भी जाहिर कर चुकी हैं.
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