बढ़ते कारोबार, घट रहे सिने दर्शक

बोकारो: बोकारो शहर में सिनेमा हॉल गिनती के बचे हैं. एक समय था जब बोकारो सिनेमा देखने के लिए दूर-दराज के लोग सुबह-सुबह ही पहुंच जाते थे. फिल्म देखने के बाद कई दिनों तक लोग मोहल्ले, चौक-चौराहों पर चर्चा करते थे. आज स्थिति बदल गयी है. फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों तक अब लोग कम […]
बोकारो: बोकारो शहर में सिनेमा हॉल गिनती के बचे हैं. एक समय था जब बोकारो सिनेमा देखने के लिए दूर-दराज के लोग सुबह-सुबह ही पहुंच जाते थे. फिल्म देखने के बाद कई दिनों तक लोग मोहल्ले, चौक-चौराहों पर चर्चा करते थे.
आज स्थिति बदल गयी है. फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों तक अब लोग कम पहुंच रहे हैं. बड़ी-बड़ी फिल्में एक या दो सप्ताह में हॉल से बाहर आ जाती हैं. उदाहरण के तौर पर थ्री इडियट्स, चेन्नई एक्सप्रेस, टाइगर, ये जवानी दीवानी, कृष-3, कोचडायन आदि समेत कई फिल्मों ने ओवर ऑल करोड़ों का बिजनेस किया. बोकारो में ये फिल्में लंबे समय तक सिनेमाघरों में नहीं चल पायीं.
फिल्म के व्यवसाय पर इसका कम असर पड़ा
सिनेमाघरों से फिल्में जल्द बाहर हो जा रही हों, पर फिल्म के कुल बाजार पर इसका असर कम पड़ा है. फिल्म व्यवसाय का तरीका बदला है. ज्यादातर निर्माता अब फिल्म बनाने के साथ ही उसके वितरण अधिकार बेच देते हैं. इंटरनेट राइट व टेलीविजन राइट आदि के द्वारा निर्माता अच्छा व्यवसाय कर लेते हैं. फिल्म के प्रदर्शन के साथ इंटरनेट व टीवी पर आ जाने से लोग सिनेमाघर के बजाय उपलब्ध विकल्प से ही काम चला लेते है. सिने प्रेमी के पास विकल्प की बहुलता से सिनेमाघरों को भारी नुकसान हुआ है. बोकारो के कई सिनेमाघर इस नुकसान की वजह से बंद हो चुके हैं. जो चल रहे हैं उनकी हालत खस्ता है.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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