डीवीसी चैयरमेन चयन प्रक्रिया की होगी जांच, पीएम के निर्देश के आलोक में मंत्री ने दिया जांच का आदेश
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बेरमो/ बोकारो थर्मल : डीवीसी के स्थायी अध्यक्ष के लिए चल रही नियुक्ति प्रक्रिया खटाई में पड़ गयी. पहले तो दिल्ली में नौ अगस्त को होने वाला पीइएसबी द्वारा साक्षात्कार अगले आदेश तक के लिए स्थगित किया गया. यह आदेश प्रधानमंत्री के निर्देश पर केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार आरके सिंह ने निर्गत किया […]
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बेरमो/ बोकारो थर्मल : डीवीसी के स्थायी अध्यक्ष के लिए चल रही नियुक्ति प्रक्रिया खटाई में पड़ गयी. पहले तो दिल्ली में नौ अगस्त को होने वाला पीइएसबी द्वारा साक्षात्कार अगले आदेश तक के लिए स्थगित किया गया. यह आदेश प्रधानमंत्री के निर्देश पर केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार आरके सिंह ने निर्गत किया था.
अब नौ अगस्त को श्री सिंह ने मामले में जांच का आदेश दे दिया है. राज्य मंत्री ने उक्त आदेश प्राप्त शिकायतों के आलोक में दिया है. ऑल इंडिया पावर फेडरेशन (एआइपीएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मजीत सिंह ने आठ अगस्त को एक पत्र दिया था. सांसद सह सदस्य ऊर्जा परामर्श समिति सदस्य सुशील सिंह ने चयन के मापदंडों में अनियमितता का आरोप लगाया था.
पात्रता की अनदेखी का आरोप : एआइपीएफ अध्यक्ष ने अपने पत्र में दर्शाया है कि डीवीसी अध्यक्ष पद के लिए साक्षात्कार के पूर्व निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी मामलों की जांच जरूरी है़ पत्र के अनुसार डीवीसी में अध्यक्ष पद के लिए आरपी त्रिपाठी का नाम भेजा गया है, जबकि डीवीसी के वर्तमान सदस्य तकनीकी श्री त्रिपाठी एनटीपीसी से प्रतिनियुक्ति पर लगभग चार वर्ष पूर्व आये हैं. एनपीटीसी में एजीएम से जीएम में पदोन्नति के लिए उन्हें उपयुक्त नहीं पाया गया था़ इसलिए उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की.
डीवीसी चैयरमेन
लोकसभा सांसद और सदस्य पावर परामर्श समिति सुशील कुमार सिंह ने आरपी त्रिपाठी के खिलाफ गत दो अप्रैल 2018 को आठ आरोपों की एक सूची प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री को दी थी.
उन्होंने आरपी त्रिपाठी को उनके मूल विभाग एनटीपीसी में भेजने की मांग की थी. वहां वह एजीएम थे. एआइपीएफ अध्यक्ष ने संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी के लॉबिंग मामले की भी जांच की मांग की है़
तीन माह से अध्यक्ष नहीं : डीवीसी तीन महीने से बिना अध्यक्ष के ही चल रहा है़ फरवरी में तीन माह के लिए डीवीसी के सदस्य सचिव पीके मुखोपाध्याय को अध्यक्ष का प्रभार दिया गया था़ अप्रैल में दुबारा प्रभार के लिए होने वाले विस्तार के क्रम में मंत्रालय से विजिलेंस क्लीयरेंस मिलने में विलंब के कारण मामला लंबित है और डीवीसी बिना अध्यक्ष के ही है़
मापदंडों की अनदेखी
पत्र में एआइपीएफ अध्यक्ष ने लिखा कि डीवीसी अध्यक्ष के साक्षात्कार के लिए न्यूनतम योग्यता इडी स्तर के अधिकारी की थी़ एनटीपीसी में जीएम, इडी और निदेशक स्तर के अधिकारी पर विचार नहीं कर एजीएम रैंक के अधिकारी को बुलाया जाना संदेह पैदा करता है. विदित हो कि हजारीबाग के पूर्व सांसद तथा भाकपा के राज्य सचिव भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने भी ऊर्जा राज्य मंत्री से उक्त मामले में जांच की मांग की है.
सेवानिवृत्त हो रहे हैं चयन समिति के अध्यक्ष
डीवीसी अध्यक्ष के लिए चयन समिति के अध्यक्ष अंशुमन दास 17 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. सेवानिवृत्ति से पहले अंतिम दिनों में ऐसे विवाद से बचना चाहिए था़ आरपी त्रिपाठी को अध्यक्ष के साक्षात्कार हेतु बुलावा पत्र में अंकित किया गया है कि साक्षात्कार के एक घंटा पहले उन्हें पीइएसबी अध्यक्ष के कार्यालय में रिपोर्ट करना है और वहां के क्लीयरेंस के बाद ही साक्षात्कार की अनुमति दी जायेगी. एआइपीएफ अध्यक्ष ने लिखा है कि सीवीसी, सीबीआइ और भारत सरकार के अधिकारियों को भी मामले से अवगत करवाया गया है. जरूरत पड़ने पर उन्होंने अदालत में भी जाने की बात कही.
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