चास जेल के तत्कालीन अधीक्षक पर प्राथमिकी का आदेश
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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एक सप्ताह में दर्ज करानी है प्राथमिकी मामला चास जेल में बंद कैदी की मौत का बोकारो : बोकारो डीसी मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने न्यायिक हिरासत में चास जेल बंद कैदी बसंत कुमार गुप्ता की मौत के मामले में न्यायिक जांच के बाद चास जेल के सुपरिटेंडेंट को तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट प्रवीण कुमार (वर्तमान में […]
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एक सप्ताह में दर्ज करानी है प्राथमिकी
मामला चास जेल में बंद कैदी की मौत का
बोकारो : बोकारो डीसी मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने न्यायिक हिरासत में चास जेल बंद कैदी बसंत कुमार गुप्ता की मौत के मामले में न्यायिक जांच के बाद चास जेल के सुपरिटेंडेंट को तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट प्रवीण कुमार (वर्तमान में पलामू में पदस्थापित), जेलर व अन्य पर एक सप्ताह में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है. जिला प्रधान न्यायाधीश संजय प्रसाद ने एसीजेएम देवाशीष महापात्रा को मामले की न्यायिक जांच कराने के लिए नियुक्त किया था. न्यायिक जांच में जेल के अंदर हुई मौत की तहकीकात की आवश्यकता बतायी गयी है. इसके बाद डीसी ने यह निर्देश दिया है.
रिलीज ऑर्डर पर नहीं है हस्ताक्षर : बेल पर जेल से बाहर निकलने वाले कैदी के रिलीज ऑर्डर में उसका हस्ताक्षर होता है. हाथ में भी जेल प्रशासन मुहर लगाता है.
न्यायिक जांच में यह बात सामने आयी कि रिलीज ऑर्डर में वसंत का हस्ताक्षर नहीं है और न ही उसके हाथ में जेल का मुहर था . रिलीज आर्डर पर अंगूठे के निशान लगा पाया गया है. जबकि बसंत हमेशा हस्ताक्षर करता था.
न्यायिक जांच के बाद डीसी ने चास मंडल कारा के अधीक्षक को दिया निर्देश
क्या है मामला
चास जेल के कैदी वसंत कुमार गुप्ता (45 वर्ष) की मौत 25 सितंबर 2014 को जेल में हो गयी थी. मृतक बेरमो थाना क्षेत्र के नया मोड़, श्याम भंडार गली का रहने वाला था. उसका फुसरो-चंद्रपुरा रोड में वसंत फ्रूट नामक दुकान थी. उस पर बेरमो थाना में कांड संख्या 131/14 के तहत एनडीपीएस एक्ट (गांजा बेचने के आरोप ) का मामला दर्ज था. उसने 27 अगस्त 2014 को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था. उसके बाद से न्यायिक हिरासत में चास जेल बंद था. मामले में उसे तत्कालीन प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश अमिताभ कुमार की अदालत से बेल मिल गयी थी, लेकिन जेल से निकलने के पहले ही उसकी मौत हो गयी थी.
भाई ने लगाया था आरोप
भाई त्रिभुवन ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया था कि वसंत को अक्सर प्रताड़ित कर पैसा मांगा जाता था. दो बार जेल में पैसा दिया गया था. तीसरी बार भी पैसे की मांग हो रही थी. इसी बीच उसे बेल मिल गयी थी. बेल मिलने से आक्रोशित होकर जेल के कर्मचारियों ने मारपीट की. इस कारण उसकी मौत हो गयी. भाई ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में यह मामला 1555/01/2014 के तहत चल रहा है.
जेल से ले जाने आया था भाई व भतीजा
25 सितंबर 2014 को वसंत को जेल से ले जाने के लिए उसका भतीजा शंकर व भाई त्रिभुवन आया था. दोनों ने जेल प्रशासन पर मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि शाम के समय जेल के बाहर खड़े होकर वसंत के निकलने के इंतजार कर रहे थे. उनके साथ अधिवक्ता एसपी सिंह भी थे. शाम साढ़े छह बजे एक सिपाही त्रिभुवन गुप्ता को बुला कर जेल के अंदर ले गया. वहां वसंत मृत पड़ा था. सिर पर चोट के निशान थे.
जेल के पदाधिकारियों का तर्क
जेल के पदाधिकारियों का कहना था कि बसंत को अचानक चक्कर आने से वह जमीन पर गिर कर बेहोश हो गया था. तत्काल जेल प्रशासन वसंत को लेकर चास रेफरल अस्पताल गया. जहां चिकित्सकों ने उसे बीजीएच ले जाने की सलाह दी. सरकारी एंबुलेस से जेल के दो सिपाही वसंत को लेकर बीजीएच गये. यहां चिकित्सकों ने वसंत को मृत घोषित कर दिया था.
बसंत कुमार गुप्ता की मौत के मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर चास मंडल कारा के अधीक्षक को तत्कालीन अधीक्षक, जेलर व अन्य के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निदेश दिया गया है.
मृत्युंजय कुमार बरनवाल, डीसी, बोकारो
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