दिव्यांग स्टूडेंट को इंजीनियरिंग पढ़ाने का दावा झूठ
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
Updated:
विज्ञापन
आशालता. एक का फीस जमा नहीं होने की वजह से कॉलेज ने निकाला, दूसरे का नहीं हुआ एडमिशन चास : बोकारो सेक्टर पांच/डी स्थित आशालता विकलांग केंद्र दिव्यांग बच्चों को शिक्षा, विकास एवं पुनर्वास देने का दावा करती है, लेकिन उसका दावा सिर्फ कागजों व पोस्टरों में ही दिखता है. आशालता केंद्र ने दो दिव्यांग […]
विज्ञापन
आशालता. एक का फीस जमा नहीं होने की वजह से कॉलेज ने निकाला, दूसरे का नहीं हुआ एडमिशन
चास : बोकारो सेक्टर पांच/डी स्थित आशालता विकलांग केंद्र दिव्यांग बच्चों को शिक्षा, विकास एवं पुनर्वास देने का दावा करती है, लेकिन उसका दावा सिर्फ कागजों व पोस्टरों में ही दिखता है. आशालता केंद्र ने दो दिव्यांग विद्यार्थियों को अन्य राज्यों में इंजीनियरिंग पढ़ाने का दावा किया है. जबकि हकीकत कुछ और ही है. दोनों विद्यार्थी आज खुद अपने दम पर दूसरी जगह पढ़ाई कर रहे हैं और कंपीटीशन की तैयारी में जुटे हैं.
फीस के लिए कॉलेज से निकाला गया शशांक
आशालता संस्था की ओर से दावा किया गया है कि वर्ष 2015 में बिहार के बभनगावां मधेपुरा निवासी दोनों पैरों से दिव्यांग शशांक राज को ओड़िशा के भुवनेश्वर स्थित किट्स इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करायी जा रही है. उसका सेशन 2019 में पूरा होगा. लेकिन हकीकत इसके उलट है. शशांक ने बताया : संस्था की ओर से उसका एडमिशन तो कराया गया, लेकिन फर्स्ट सेमेस्टर पूरा होने के बाद उसपर द्वितीय सेमेस्टर का फीस जमा करने का दबाव इंस्टीट्यूट की ओर से बनाया जाने लगा.
फीस जमा नहीं होने पर उसे कॉलेज से निकाल दिया गया. वापस बोकारो आकर इस संबंध में आशालता के निदेशक भवानी शंकर जायसवाल को बताया. निदेशक ने समस्या हल करने का आश्वासन दिया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उसका समय बर्बाद हो गया. एक वर्ष बीतने के बाद पुन: निदेशक से कई बार फोन कर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हुई. अंतत: थकहार कर शशांक ने बीएस सिटी कॉलेज में बीए में एडमिशन कराया है.
मुकेश का कॉलेज में एडमिशन ही नहीं हुआ
दूसरा विद्यार्थी चास प्रखंड के नारायणपुर गांव निवासी मुकेश कुमार बाउरी को संस्था ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित ताडीपत्री इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्ष 2015 से मैकनिकल की पढ़ाई करवाने का दावा करती है. जबकि मुकेश आज के समय में कंपीटीशन की तैयारी में जुटा है. मुकेश ने बताया कि संस्था की ओर से उसे आंध्र प्रदेश स्थित ताडीपत्री इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करने के लिये भेजा गया. वह कॉलेज में पहुंचा, लेकिन वहां एडमिशन का फीस मांगा गया. उसके पास फीस नहीं होने पर वह उसी समय बोकारो लौट गया. इसके बाद उसने संस्थान के किसी अधिकारी से इस संबंध में पूछताछ करने नहीं गया. मुकेश ने बताया कि उसे अपने-आप पर भरोसा था, इसलिए वह खुद से कंपीटीशन की तैयारी में जुट गया. बीते 2017 में मुकेश ने रेलवे की परीक्षा पास की है. 22 फरवरी को इस संबंध में मेडिकल की परीक्षा होने वाली है.
इंस्टीट्यूट से निकाले जाने की जानकारी नहीं
आशालता के निदेशक भवानी शंकर जायसवाल से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने सबसे पहले तो पढ़ाई करवाने का दावा किया. हकीकत की जानकारी देने पर श्री जायसवाल ने कहा कि शशांक को इंस्टीट्यूट ने निकाल दिया है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. शशांक ने भी कभी शिकायत नहीं की है. अगर फीस की समस्या थी, तो उसकी व्यवस्था कहीं से की जाती. उन्होंने कहा कि दोनों विद्यार्थियों को बुलाकर उनकी समस्याओं का हल किया जायेगा. वे अगर आगे पढ़ना चाहेंगे, तो उन्हें पढ़ाया जायेगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










