उठ रहे सवाल, रेस्क्यू के बाद कहां रखे जायेंगे बाल मजदूर

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चास: बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने जिले के घुमंतू, भीख मांगने व कचरा चुनने वाले बच्चों का रेस्क्यू करने के लिये जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सहित अन्य विभागों को पत्र लिखा है. सीडब्ल्यूसी ने उक्त पत्र बीते 25 अक्तूबर को जारी किया है. लेकिन समस्या यह है कि बच्चों का रेस्क्यू करने के बाद रखा […]

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चास: बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने जिले के घुमंतू, भीख मांगने व कचरा चुनने वाले बच्चों का रेस्क्यू करने के लिये जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सहित अन्य विभागों को पत्र लिखा है. सीडब्ल्यूसी ने उक्त पत्र बीते 25 अक्तूबर को जारी किया है. लेकिन समस्या यह है कि बच्चों का रेस्क्यू करने के बाद रखा कहां जायेगा.

क्योंकि जिले में ना तो बाल गृह है और ना ही ओपेन सेल्टर होम की व्यवस्था है. पत्र में बच्चों को पुनर्वास करने के साथ-साथ उनके खाना-पीना, पहनावा सहित पढ़ाई-लिखाई की भी व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है. जिले में ऐसे बच्चों की अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. वहीं जिला समाज कल्याण विभाग इस मामले में कुछ भी कहने से कतरा रहा हैं. पुलिस प्रशासन व अन्य अधिकारियों द्वारा रेस्क्यू किये गये बच्चों को सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया जाता है. जिसे सेक्टर पांच स्थित मानव सेवा आश्रम में रखवा दिया जाता है, जबकि मानव सेवा आश्रम दिव्यांग बच्चों को रखने की व्यवस्था करता है.

आश्रम से फरार हुआ 11 वर्षीय बच्चा : चंद्रपुरा पुलिस ने 20 अक्तूबर को सीडब्ल्यूसी को बंगाल के एक 11 वर्षीय ऋषभ नामक बच्चे को सौंपा था. तत्काल में सीडब्ल्यूसी ने बच्चे को सेक्टर पांच स्थित मानव सेवा आश्रम में रखवा दिया. बच्चा अपने घर जाने के लिये जिद किये हुये था. लेकिन अधिकारियों के टाल-मटोल के कारण वह पिछले 10 दिनों से आश्रम में रह रहा था. बीते एक नवंबर की शाम में बच्चा आश्रम की बाउंड्री फांद कर फरार हो गया. इस संबंध में आश्रम के इंचार्ज ने सीडब्ल्यूसी को पत्र के माध्यम से सूचना दी. फिलहाल बच्चे की खोजबीन की जा रही है.
यहां मिलते हैं ऐसे बच्चे
एक सर्वे के अनुसार बोकारो शहर के सेक्टर 12 मोड़, राम मंदिर के आसपास, चास के धर्मशाला मोड़, महावीर चौक, सोलागीडीह के आसपास ऐसे बच्चे भीख मांगते हुये अक्सर देखे जाते हैं. इसके अलावा ऐसे सभी जगहों पर जहां-जहां कचरा डंप कराया जाता है, वहां बच्चे कचरा चुनते हुये मिलते हैं. सरकार ऐसे बच्चों के लिये कई योजनाएं चला रही है, लेकिन धरातल पर उनका लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है.
सभी करें सहयोग : सीडब्ल्यूसी
सीडब्ल्यूसी के सदस्य डॉ. प्रभाकर ने बताया कि ऐसे बच्चों को चिह्नित कर स्पांसरशिप योजना के तहत पुनर्वास करने की योजना है. योजना के तहत जिले में सभी प्रखंडों को मिलाकर 100 बच्चों को चिह्नित करते हुये भरण पोषण के लिए बच्चों को दो हजार रुपये प्रति माह दिया जायेगा. ऐसे में घुमंतू व भीख मांगने वाले बच्चों को पुनर्वास करने में सभी के सहायता की आवश्यकता है.
सुविधाओं की कमी : सरिता
जिला बाल संरक्षण इकाई की निदेशक सरिता कुमारी से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि बच्चों का रेस्क्यू तो किया जायेगा, लेकिन उन्हें रखने सहित अन्य व्यवस्था करने की समस्या है. फिलहाल विभाग में बेसिक सुविधाओं की कमी है. सबसे पहले तत्काल आवास की व्यवस्था करनी होगी.
मामले में शीघ्र उठाया जायेगा कदम
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुमन गुप्ता ने कहा कि बच्चों को रेस्क्यू करने से संबंधित काफी काम करना है. जिले में शुरू से ऐसे बच्चों को रखने के लिये एक व्यवस्था थी, जो कि बंद हो चुकी है. शीघ्र ही इस मामले में कदम उठाये जायेंगे.
मानव सेवा आश्रम के अधिकारी ने कहा
मानव सेवा आश्रम के इंचार्ज कुमार हीरानंद ने बताया कि जिले में कहीं भी बच्चा पाया जाता है तो यहां लाकर रख दिया जाता है. जबकि यह आश्रम सिर्फ दिव्यांग बच्चों के लिये है. फिर भी अधिकारियों के कहने पर बच्चों को रख लिया जाता है. लेकिन उनके खाना-पीना से लेकर कपड़ों तक की व्यवस्था आश्रम को ही करनी पड़ती है. बताया कि दिव्यांग बच्चों के साथ कोई भी नॉर्मल बच्चा रहना नहीं चाहता है.
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