जानिये, शहीद लेफ्ट. कर्नल संकल्‍प कुमार शुक्‍ला के बारे में

Updated at : 06 Dec 2014 9:15 AM (IST)
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जानिये, शहीद लेफ्ट. कर्नल संकल्‍प कुमार शुक्‍ला के बारे में

रांची के रहने वाले संकल्‍प का पटना से था गहरा रिश्‍ता नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से सिर्फ दो दिनों पहले आतंकवादियों ने शुक्रवार को चार स्थानों पर हमले किये. सबसे बड़ा हमला बारामूला जिले के उरी में सैन्य शिविर पर हुआ, जिसमें पंजाब रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार सहित 11 […]

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रांची के रहने वाले संकल्‍प का पटना से था गहरा रिश्‍ता

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से सिर्फ दो दिनों पहले आतंकवादियों ने शुक्रवार को चार स्थानों पर हमले किये. सबसे बड़ा हमला बारामूला जिले के उरी में सैन्य शिविर पर हुआ, जिसमें पंजाब रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार सहित 11 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गये. लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार रांची के रहने वाले थे.

संकल्प टिकारी के थे मूल निवासी, पटना में थी ससुराल

शहीद होनेवाले लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार शुक्ला गया जिले के टिकारी के मूल निवासी थे. फिलहाल उनके माता-पिता रांची में रहते हैं. उनकी शादी पटना में हुई थी. इसके ससुर पटना कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रो. पी एन तिवारी हैं. शहीद की पत्नी प्रिया दोनों बेटियों के साथ दानापुर में अलवर्ट एक्का मार्ग स्थित फील्ड एरिया फैमिली क्वार्टर संख्या 152/4 में रहती हैं. पति शहीद की सूचना मिलते ही वह दोनों बेटियों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गयीं.

संकल्प शुक्ला ने 15 साल तक सेना में रह कर देश की सेवा की. 24 पंजाब रेजिमेंट में थे. वह पंजाब और दानापुर में पदस्थापित रह चुके थे. जनवरी में जम्मू-कश्मीर से उनकी पोस्टिंग का टर्म खत्म होनेवाला था. संकल्प शुक्ला के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद रामगढ़ स्थित पंजाब रेजिमेंट से सेना के कई अधिकारी और जवान उनके रांची स्थित घर पर पहुंचे. रांची में बूटी मोड़ के निकट कृष्णा नगर में उनका घर है. संकल्प शुक्ला के पिता एसके शुक्ला और माता सुषमा शुक्ला यहीं रहते हैं. जम्मू-कश्मीर में पोस्टिंग से पहले परिजन साथ रहते थे.

शहीद होने की सूचना मिलते ही घर में मचा कोहराम

हमले में संकल्प के शहीद होने की सूचना मिलते ही दानापुर के फील्ड एरिया फैमिली क्वार्टर संख्या 152/4 में रह रही उनकी पत्नी प्रिया अपने कमरे में चित्कार कर उठी. मां को रोते-बिलखते देख कर सात वर्षीया पुत्री सायरा व तीन वर्षीया पुत्री मन्ना कुमारी भी रोने लगी. पड़ोसियों ने किसी तरह प्रिया को चुप कराया़ पड़ोसियों ने बताया कि सायरा व मन्ना आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ती हैं.

सायरा तीसरी कक्षा और मन्ना यूकेजी में पढ़ती है. सूचना मिलने के बाद सैन्य अधिकारी ने शहीद के पत्नी व उनके दोनों बेटियों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गये. दोस्त उमेश अग्रवाल ने बताया कि संकल्प की स्कूली शिक्षा रांची के दीपाटोली आर्मी स्कूल में हुई थी. आर्मी स्कूल से बोर्ड की परीक्षा पास करने के बाद संकल्प ने जेवियर कॉलेज से बी-कॉम की पढ़ाई पूरी की. फिर सेना में बहाल हुए थे.

2003 में पेट में लगी थी गोली, लगे थे 40 टांके

संकल्प की शहादत की बात सुनते ही मेरे दिमाग में अप्रैल 2003 की बात घूमने लगी. उस वक्त मैं और संकल्प श्रीनगर के एक अस्पताल के आइसीयू में अगल-बगल भरती थे. हम दोनों का ऑपरेशन हुआ था. उसे आतंकियों की गोली लगी थी. मैं ग्रेनेड के विस्फोट से जख्मी हुआ था. उसके पेट में एके-47 की गोली लगी थी. हम दोनों के पेट में 40-40 टांके लगे थे. उसके माता-पिता उससे मिलने अस्पताल आये थे. गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी वह मुस्कुराता रहता था. जख्म के बावजूद उसके चुटकुले सुन कर हंसते-हंसते पेट में दर्द हो जाता था. वास्तव में वह एक सच्च सैनिक था. अफसर उसे बहुत पसंद करते थे.

(नोट : यह मैसेज शहीद संकल्प के साथ काम कर चुके सेना के अफसर ने अपने दोस्तों को भेजा है.)

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