डायन हत्या मामले में तीन को उम्रकैद

गुमला के भरनो में जगरनाथ भगत को मार डाला था गुमला : प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने डायन-बिसाही के संदेह में हुई हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनायी है. धारा 302/34, 3/4 व 27 आर्म्स एक्ट के तहत जिन लोगों को सजा सुनायी गयी है, […]
गुमला के भरनो में जगरनाथ भगत को मार डाला था
गुमला : प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने डायन-बिसाही के संदेह में हुई हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनायी है. धारा 302/34, 3/4 व 27 आर्म्स एक्ट के तहत जिन लोगों को सजा सुनायी गयी है, उनके नाम हैं- नंदू उरांव, पाझरा उरांव व संजय कच्छप उर्फ सावना उरांव. तीनों भरनो क्षेत्र के अताकोरा गांव के निवासी हैं. इन लोगों पर ओझा-गुणी बता कर गांव के 50 वर्षीय जगरनाथ भगत की हत्या का आरोप है.
जगरनाथ की पत्नी शनि उराइन ने 18 फरवरी 2011 को थाने में अज्ञात अपराधियों पर अपने पति की हत्या की प्राथमिकी दर्ज करायी थी. पुलिस जांच में उपरोक्त तीनों का नाम आया था. इसके बाद पुलिस ने 21 फरवरी 2011 को तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.
भूत-पिशाच से बचने के लिए की थी हत्या : जानकारी के अनुसार, जगरनाथ भगत गांव में ओझा-गुणी का काम करते थे. इससे गांव के कुछ लोग परेशान थे. गांव में आये दिन कुछ न कुछ घटना हो रही थी. इसे लोगों ने भूत-पिशाच मान लिया. इसके बाद गांव में बैठक हुई.
हंदू उरांव, रोपना उरांव व बंधना उरांव की जम कर पिटाई की गयी. बैठक में ही जगरनाथ भगत को मारने की योजना बनी थी. रात में जगरनाथ भगत शौच के लिए घर से निकले थे, तो नंदू, संजय व पाझरा ने गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी. शव को चीकू बगीचा के पास फेंक दिया था.
332 गांव में 176 डायन पीड़ित मिले
सामाजिक कुरीति के खिलाफ समय-समय पर गैर सरकारी संस्थाओं ने अपने स्तर जागरूकता अभियान और पीड़ितों के पहचान के लिए सर्वे किया है. फ्री लीगल एड कमेटी ने झारखंड के चार जिला (जमशेदपरु,रांची, बोकारो और देवघर) के 26 प्रखंड के 332 गांव में सर्वे किया. डायन प्रथा के खिलाफ मुहिम चलानेवाले और फ्री लीगल एड कमेटी के प्रेमंचद ने बताया कि तब महज चार जिलों में 176 डायन पीड़ित महिलाओं का मामला सामने आया था. यह झारखंड के लिए भयावह सामाजिक त्रसदी है. महिलाएं डायन के नाम पर तरह-तरह से प्रताड़ित की जाती हैं.
हृदय विदारक घटनाएं
– 2 जून को चाईबासा के टोंटो में एक परिवार के पांच लोगों को डायन के आरोप में मार दिया गया.
– 1995 में कुचाई में पूरे परिवार को डायन के आरोप में मार दिया गया.
– सुमित्र नाम की महिला को डायन के आरोप में पूरे गांव में नंगा घुमाया गया.
– कोपी देवी को एक मृतक के साथ कमरे में इसलिए बंद कर दिया गया, क्योंकि वह उसे जिंदा करे.
– एक बच्चे को कब्र से निकाल कर फातू देवी नाम की महिला को जिंदा करने के लिए कहा गया. फातू देवी को कमरे में बंद कर प्रताड़ित किया गया.
कुरीति के खिलाफ मिशन के रूप में काम करना होगा
‘‘समाज से कुरीति को खत्म करने के लिए मिशन के रूप में काम करना होगा. इस अभियान में पांच-छह स्तर पर काम होना चाहिए. सामाजिक अभिशाप को खत्म करने के लिए जागरूकता लाने के जरूरत है. लोगों को यह समस्या लगे, प्रताड़ित महिलाओं की वेदना के साथ पूरा समाज खड़ा. डायन प्रथा की कुरीति को सिलेबस में शामिल कर लोगों में चेतना डाली जा सकती है. ग्रामीण परिवेश में सरकार को विशेष रूप से काम करना होगा. कानून एक हथियार है, इससे कारगर तरीके से लागू करने की जरूरत है.
प्रेमचंद, फ्री लीगल एड कमेटी
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