नियुक्ति की प्रतीक्षा: 14 साल में एक बार नियुक्ति, उस पर भी सीबीआइ जांच

Updated at : 01 Jul 2014 8:10 AM (IST)
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नियुक्ति की प्रतीक्षा: 14 साल में एक बार नियुक्ति, उस पर भी सीबीआइ जांच

रांची: झारखंड अलग राज्य बने 14 साल हुए लेकिन सिर्फ एक बार ही लेक्चरर (व्याख्याता) की नियुक्ति हो सकी है. वर्ष 2008 में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा लगभग 800 व्याख्याताओं की नियुक्ति की गयी, लेकिन विवाद होने पर इसकी सीबीआइ जांच चल रही है. राज्य में अभी पांचों विवि (रांची विवि, विनोबा भावे […]

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रांची: झारखंड अलग राज्य बने 14 साल हुए लेकिन सिर्फ एक बार ही लेक्चरर (व्याख्याता) की नियुक्ति हो सकी है. वर्ष 2008 में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा लगभग 800 व्याख्याताओं की नियुक्ति की गयी, लेकिन विवाद होने पर इसकी सीबीआइ जांच चल रही है.

राज्य में अभी पांचों विवि (रांची विवि, विनोबा भावे विवि, सिदो-कान्हू मुरमू विवि, नीलांबर-पीतांबर विवि व कोल्हान विवि) में व्याख्याता के लगभग 797 पद रिक्त हैं. पांचों विवि से हर वर्ष लगभग आठ हजार विद्यार्थी स्नातकोत्तर की परीक्षा पास कर रहे हैं. हर वर्ष लगभग 40-45 विद्यार्थी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण हो रहे हैं. पांचों विवि से हर वर्ष 300 विद्यार्थी पीएचडी की डिग्री हासिल कर रहे हैं. इस वर्ष व्याख्याता नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू भी की गयी, लेकिन नियमों के मकड़जाल में यह फंस कर रह गयी.

जेपीएससी ने सरकार को पत्र लिख कर कहा है कि व्याख्याता की नियुक्ति झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) के माध्यम से ही होगी. इस पर सरकार ने जेपीएससी से कहा कि नेट व पीएचडी उत्तीर्ण विद्यार्थियों की नियुक्ति व्याख्याता के लिए की जा सकती है. इसके लिए सरकार ने एक्ट में बदलाव की बात कही है. वहीं यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि जबतक पिछले झारखंड पात्रता परीक्षा का क्लियरेंस नहीं मिल जाता है, तब तक आगे पात्रता परीक्षा की स्वीकृति नहीं मिलेगी. क्लियरेंस फिलहाल संभव नहीं है क्योंकि उक्त पात्रता परीक्षा की सीबीआइ जांच चल रही है.

विवि में रिटायर होते हैं प्रोफेसर, पद खाली होता है लेक्चरर का: राज्य के विवि की स्थिति यह है कि यहां रिटायर होते हैं प्रोफेसर, जबकि पद खाली होता है लेक्चरर का. विवि में प्रोफेसर व रीडर की भी बहाली नहीं हुई है. विवि में अधिकतर पदों पर व्याख्याता की नियुक्ति की गयी. कई विषयों में व्याख्याता से प्रोन्नति पाकर रीडर व प्रोफेसर बन गये. नयी नियुक्ति नहीं हुई. फलस्वरूप रिटायर के बाद व्याख्याता के ही पद रिक्त दिखाये जा रहे हैं.

यूजीसी के अनुसार 40 विद्यार्थी पर एक शिक्षक
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमानुसार प्रत्येक विषय में 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होने चाहिए. राज्य के विवि में 1976 के बाद से व्याख्याता के एक भी पद स्वीकृत नहीं हुए हैं. जबकि विद्यार्थियों की संख्या प्रत्येक वर्ष बढ़ती गयी.

विश्व विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित
राज्य के पांचों विवि में 65 अंगीभूत कॉलेजों में व्याख्याता की नियुक्ति की जानी है. इनके नहीं रहने से पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है. विद्यार्थियों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही हैं. कई कॉलेज ऐसे हैं, जहां पद स्वीकृत है, लेकिन व्याख्याता नहीं हैं. वहां अनुबंध पर लोगों को रख कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है. वर्ष 2000 में रांची विवि, नीलांबर-पीतांबर विवि व कोल्हान विवि को मिलाकर स्नातक पार्ट वन में 28 हजार विद्यार्थी थे. वर्ष 2013 में सिर्फ रांची विवि में स्नातक पार्ट वन में 45 हजार विद्यार्थी हो गये हैं.

व्याख्याता के लिए कोई उम्र निर्धारण नहीं
कॉलेजों में व्याख्याता नियुक्ति के लिए भले ही कोई उम्र निर्धारण नहीं हो. लेकिन नियुक्ति नहीं होने से उम्मीदवारों की आयु भी बढ़ रही है. अगर समय रहते नियुक्ति नहीं की गयी, तो उम्मीदवार की आयु रिटायरमेंट के करीब पहुंच जायेगी.

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