विधायक जिग्नेश मेवानी को एक और झटका : मेहसाणा की कोर्ट ने सुनाई तीन साल की सजा, बिना अनुमति के की थी रैली

Updated at : 05 May 2022 3:59 PM (IST)
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विधायक जिग्नेश मेवानी को एक और झटका : मेहसाणा की कोर्ट ने सुनाई तीन साल की सजा, बिना अनुमति के की थी रैली

गुजरात के बडगाव विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक को जिस मामले में सजा सुनाई गई है, वह करीब पांच साल पुराना है. रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2017 में कांग्रेसी विधायक जिग्नेश मेवानी, एनसीपी नेता रेशमा पटेल और सुबोध परमार समेत कई नेताओं ने आजादी कूच रैली का आयोजन किया था.

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अहमदाबाद : अभी हाल ही में असम के कोकराझार के एक मामले में गिरफ्तारी के बाद रिहा हुए गुजरात के बडगाव के कांग्रेसी विधायक जिग्नेश मेवानी की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. पिछले अप्रैल महीने में पीएम नरेंद्र मोदी के ट्वीट पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर असम के कोकराझार में एक केस दर्ज किया था. इसके बाद गुरुवार को गुजरात के मेहसाणा कोर्ट से बिना अनुमति रैली करने को लेकर जिग्नेश मेवानी समेत करीब 12 नेताओं को तीन साल की सजा सुनाई है. इसके साथ ही, अदालत ने मेवानी समेत तमाम नेताओं पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

पांच साल पहले 2017 में की गई थी आजाद कूच रैली

मीडिया की रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि गुजरात के बडगाव विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक को जिस मामले में सजा सुनाई गई है, वह करीब पांच साल पुराना है. रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2017 में कांग्रेसी विधायक जिग्नेश मेवानी, एनसीपी नेता रेशमा पटेल और सुबोध परमार समेत कई नेताओं ने आजादी कूच रैली का आयोजन किया था. इस रैली का आयोजन प्रशासन की अनुमति के बिना ही किया गया था. इसी मामले में मेहसाणा कोर्ट ने विधायक मेवानी समेत 12 नेताओं को सजा सुनाई है.

ऊना में दलितों की पिटाई के बाद किया गया था आंदोलन

रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेसी विधायक जिग्नेश मेवानी, रेशमा पटेल और सुबोध परमार ने सरकारी अधिसूचना का उल्लंघन करते हुए मेहसाणा के बनासकांठा में 12 जुलाई 2017 को आजादी कूच रैली के आयोजन के बाद आंदोलन की शुरुआत की थी. बनासकांठा में यह रैली ऊना में दलितों की पिटाई के बाद आयोजित की गई थीं.

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फिलहाल जमानत पर रिहा हैं मेवानी

बताते चलें कि पीएम नरेंद्र मोदी के ट्वीट पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में गुजरात से कांग्रेसी विधायक जिग्नेश मेवानी पर असम में एक केस दर्ज किया गया था. इस मामले में उन्हें पिछले अप्रैल महीने में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद कोकराझार कोर्ट की ओर से जमानत दी गई है. इस मामले में फिलहाल वे जमानत मिल गई थी, लेकिन इसके तुरंत बाद जिग्नेश ने एक अन्य थाने में महिला पुलिसकर्मी के साथ बदतमीजी करने में मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था. बाद में उन्हें जमानत दे दी गई.

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