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गुजरात के गिर जंगल में बढ़े एशियाई शेर, 29 फीसदी वृद्धि हुई के साथ 674 हुई संख्या

Updated at : 11 Jun 2020 2:40 PM (IST)
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गुजरात के गिर जंगल में बढ़े एशियाई शेर, 29 फीसदी वृद्धि हुई के साथ 674 हुई संख्या

गुजरात (Gujrat gir forest) के गिर जंगलों में एशियाई शेरों (Asiatic Lion number increased) की संख्या में 29 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. वन विभाग ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि गिर वन क्षेत्र में एशियाई शेरों की संख्या 29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब 674 हो गई है. शेरों की तादाद में वृद्धि को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे ”संरक्षण की सफलता ” बताया है. विभाग ने पांच और छह जून को शेरों की संभावित संख्या की गणना शुरू की थी. हर पांच साल बाद होने वाली यह गणना मई में होनी थी, लेकिन इसे लॉकडाउन (Lockdown) के चलते टाल दिया गया था. मई 2015 की गणना के अनुसार गिर में एशियाई शेरों की संख्या 523 थी. 2010 से 2015 के बीच इनकी संख्या में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

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नयी दिल्ली : गुजरात के गिर जंगलों में एशियाई शेरों की संख्या में 29 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. वन विभाग ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि गिर वन क्षेत्र में एशियाई शेरों की संख्या 29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब 674 हो गई है. शेरों की तादाद में वृद्धि को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे ”संरक्षण की सफलता ” बताया है. विभाग ने पांच और छह जून को शेरों की संभावित संख्या की गणना शुरू की थी. हर पांच साल बाद होने वाली यह गणना मई में होनी थी, लेकिन इसे लॉकडाउन के चलते टाल दिया गया था. मई 2015 की गणना के अनुसार गिर में एशियाई शेरों की संख्या 523 थी. 2010 से 2015 के बीच इनकी संख्या में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

विभाग की आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि ‘पूनम अवलोकन’ (पूर्णिमा पर शेरों की गिनती की कवायद) में पता चला है कि शेरों की संख्या 28.87 प्रतिशत बढ़कर 674 हो गई है. विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह अब तक की सबसे अधिक वृद्धि दर है. कुल 674 शेरों में 161 नर, 260 मादा, 116 व्यस्क शावक और 137 शावक हैं. इस कवायद में यह भी पता चला है कि शेरों के इलाके में भी 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 2015 के 22,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2020 में 30,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है. शेरों की गणना की इस कवायद में 1,400 कर्मी शामिल थे. हालांकि इस बीच कई शेरों की मौत भी हुई है. अधिकारियों के अनुसार टिक (किलनी) जनित बीमारी ‘बेबसियोसिस’ के चलते बीते तीन महीने में क्षेत्र में करीब दो दर्जन शेरों की मौत हुई है.

इससे पहले अक्टूबर-नवंबर 2018 में कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस (सीडीवी) के चलते 40 शेरों की मौत हो गई थी. इस बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर ने ट्वीट किया, ”एशियाई शेरों की दहाड़ और तेज हुई। यह बताते हुए खुशी हो रही है कि शेरों की आबादी लगभग 29 फीसदी और उनका विस्तार क्षेत्र 36 प्रतिशत तक बढ़ा है. ” उन्होंने कहा कि भारतीय शेरों को संरक्षित करने में मिली सफलता में कई रणनीतियों, समुदाय की भागेदारी और अन्य योगदान शामिल हैं. इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्विटर के जरिये गुजरात में एशियाई शेरों की आबादी में वृद्धि की खबर साझा की और इसका श्रेय सामुदायिक हिस्सेदारी को दिया.

Posted By: Pawan Singh

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