मनीष सिसोदिया के खिलाफ FIR दर्ज, जानिए क्या है वो शराब नीति जिसपर हो रही रेड पर रेड

Published by : Agency Updated At : 19 Aug 2022 6:58 PM

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सीबीआई ने पिछले साल नवंबर में दिल्ली सरकार की बनाई गई आबकारी और उसके क्रियान्वयन में कथित तौर पर अनियमितताओं को लेकर दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनीष सिसोदिया और भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी आरव गोपी कृष्ण के 19 से ज्यादा ठिकानों पर छापा मारा.

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आबकारी नीति मामले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI, सीबीआई) ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आवास समेत 20 अन्य ठिकानों पर शुक्रवार को छापा मारा. छापेमारी की खबर खुद मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया ट्विटर के जरिए दी. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि हम सीबीआई का स्वागत करते हैं. जांच में पूरा सहयोग देंगे ताकि सच जल्द सामने आ सके. अभी तक मुझ पर कई केस किए लेकिन कुछ नहीं निकला. इसमें भी कुछ नहीं निकलेगा. इधर इस छापेमारी से आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच तनाव और बढ़ गया है. AAP ने सीबीआई के कार्रवाई को ऊपर से मिला आदेश मान रही है.

आबकारी नीति में अनियमितता को लेकर छापेमारी

अधिकारियों का कहना है कि सीबीआई ने पिछले साल नवंबर में दिल्ली सरकार की बनाई गई आबकारी और उसके क्रियान्वयन में कथित तौर पर अनियमितताओं को लेकर दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनीष सिसोदिया और भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी आरव गोपी कृष्ण के 19 से ज्यादा ठिकानों पर छापा मारा. वहीं, सीबीआई ने इस मामले में एक एफआईआर भी दर्ज की है. जिसमें मनीष सिसोदिया समेत कई और लोगों के नाम दर्ज किए गये हैं.

अच्छे कामों को रुकने नहीं देंगे: अरविंद केजरीवाल

सीबीआई की छापेमारी को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि हमारी राह में, हमारे अभियान में कई रोड़े अटकाए जाएंगे. सिसोदिया के खिलाफ यह पहली छापेमारी नहीं है, पहले भी छापेमारी की गई है. केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल की पूरी दुनिया चर्चा कर रही है. इसे ये रोकना चाहते हैं. इसीलिए दिल्ली के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रियों पर रेड और गिरफ्तारी की जा रही है.

दिल्ली की आबकारी नीति 2021-22

आबकारी नीति में घोटाले को लेकर दिल्ली में बवाल मचा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि दिल्ली आबकारी नीति क्या है और किस मुद्दों पर आमने सामने आ गये हैं बीजेपी और आम आदमी पार्टी. दरअसल दिल्ली सरकार ने आबकारी नीति में बदलाव कर होटलों, बार, क्लब और रेस्टोरेंट को देर रात तक खुले रहने की छूट दे दी थी. इसके साथ ही इन जगहों में कही पर भई शराब परोसने की इजाजत दे दी गई. यानी नई नीति के तहत खुले में भी शराब परोसा जा सकता था. हालांकि इससे पहले, खुले में शराब परोसने पर रोक थी.

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई आबकारी नीति, 2021-22 को पिछले साल 17 नवंबर से लागू किया गया था और इसके तहत निजी बोलीदाताओं को शहरभर में 32 क्षेत्रों में 849 दुकानों के लिए खुदरा लाइसेंस जारी किए गए थे. यानी दिल्ली सरकार की आबकारी नीति के लागू होने के बाद परिजनों शराब दुकानें खुल गई.

मुख्य सचिव की रिपोर्ट गड़बड़ी का जिक्र

दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने आबकारी नीति 2021-22 के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की थी.उन्होंने इस मामले में 11 आबकारी अधिकारियों को निलंबित भी किया है.सिसोदिया ने खुद भी कथित अनियमितताओं की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी.अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के मुख्य सचिव की जुलाई में दी गई रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन अधिनियम 1991, कार्यकरण नियम (टीओबीआर)-1993, दिल्ली उत्पाद शुल्क अधिनियम-2009 और दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम-2010 का प्रथम दृष्टया उल्लंघन पाए जाने की बात कही गई थी.

मुख्य सचिव की रिपोर्ट में पाया गया था कि निविदा जारी करने के बाद शराब कारोबार संबंधी लाइसेंस हासिल करने वालों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर और घोर प्रक्रियात्मक चूक की गई. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट की एक प्रति मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है. आरोप है कि राजकोष को नुकसान पहुंचा कर निविदाएं जारी की गईं और इसके बाद शराब कारोबार संबंधी लाइसेंस हासिल करने वालों को अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया गया. सूत्रों ने दावा किया कि आबकारी विभाग ने कोविड​​-19 वैश्विक महामारी के नाम पर लाइसेंसधारियों को निविदा लाइसेंस शुल्क पर 144.36 करोड़ रुपये की छूट दी.

उन्होंने बताया कि लाइसेंस के लिए सबसे कम बोली लगाने वाले को 30 करोड़ रुपये की बयाना राशि भी तब वापस कर दी गई, जब वह हवाई अड्डा अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने में विफल रहा था. एक सूत्र ने कहा, ‘‘ यह दिल्ली आबकारी अधिनियम 2010 के नियम 48(11)(बी) का घोर उल्लंघन था, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि बोलीदाता को लाइसेंस प्रदान करने के लिए सभी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा, ऐसा न करने पर सरकार उसकी जमा राशि जब्त कर लेगी.

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