बिहार के युवा अलग सोच से जगा रहें उद्यमशीलता की आस, राज्य में शुरू किए कई इनोवेटिव स्टार्टअप

Updated at : 19 Jan 2023 5:31 AM (IST)
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बिहार के युवा अलग सोच से जगा रहें उद्यमशीलता की आस, राज्य में शुरू किए कई इनोवेटिव स्टार्टअप

बिहार स्टार्टअप पॉलिसी बनाने वाला सबसे पहला राज्य है. अब तक उसने करीब 80 से अधिक स्टार्टअप स्वीकृत किये हैं. हाल ही स्टार्टअप को करोड़ों का सीड फंड भी बांटा है. एक -से- एक इनोवेटिव आइडिया पर आधारित स्टार्टअप में कुछ विशेष स्टार्टअप की कहानी इस प्रकार है.

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राजदेव पांडेय, पटना: बिहार के कुछ जोशीले युवाओं ने अपनी आर्थिक तरक्की की राह अनूठी सोच से चुनी है. दरअसल इन युवाओं ने अनूठे आइडिया की दम पर उद्यमशीलता की राह पकड़ी है. औद्योगिक उत्पादन, व्यापार के तरीके और सेवा देने के विशेष अंदाजों को अपना कर बिहारी युवा तरक्की का आसमान चूमना चाहते हैं. स्टार्टअप शुरू करने में महिलाओं की संख्या उत्साहजनक है. स्टार्टअप शुरू करने वालों में कुछ ‘गुदड़ी के लाल’ भी हैं.

दरअसल उद्योग विभाग की तरफ से आसान शर्त पर दी जा रही वित्तीय और तकनीकी मदद उनके स्टार्टअप के लिए प्राणवायु साबित हो रही है. बिहार स्टार्टअप पॉलिसी बनाने वाला सबसे पहला राज्य है. अब तक उसने करीब 80 से अधिक स्टार्टअप स्वीकृत किये हैं. हाल ही स्टार्टअप को करोड़ों का सीड फंड भी बांटा है. एक -से- एक इनोवेटिव आइडिया पर आधारित स्टार्टअप में कुछ विशेष स्टार्टअप की कहानी इस प्रकार है.

बायोडिग्रेडिबल सेनेटरी पैड का निर्माण

ऋचा वात्सायन ने केले के रेशे से बायोडिग्रेडिबल सेनेटरी पैड बनाने का काम चालू किया है. इस पैड की खासियत है कि वह छह माह के अंदर डिकम्पोज हो जाती है. यह क्लोरीन फ्री और इको फ्रेंडली है. वात्सायन के इस उत्पाद को आइआइटी खड़गपुर से मान्यता मिली है. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में भी इनके प्रोजेक्ट को चुना गया है.

मेड इन बिहार ड्रोन

अजय कुमार और ज्योति अग्रवाल ने औरंगाबाद में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और सर्विलांस सॉफ्टवेयर का निर्माण किया है. इन्होंने ड्रोन के दो प्रोटोटाइप तैयार किये हैं, जिसके परीक्षण और सर्टिफिकेट के लिए सिविल एविएशन निदेशालय भेजा गया है.

जूट में डाल रहे जान

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी से प्रोडक्ट डिजाइन में ग्रेजुएशन करने वाले कुंदन कृष्णन ने अपने आर्ट एंड क्रॉफ्ट के शौक को बिजनेस में बदला है. उन्होंने जूट के रेशे से विंटर कलेक्शन एवं अन्य उत्पाद तैयार किये हैं. वह अपने उत्पादों की मार्केटिंग के लिए अमेजॉन और फ्लिपकार्ट की मदद ले रहे हैं.

हस्त संस्कृति को बढ़ावा

ममता भारती की दिव्यांगता उनके उद्यमी बनने की राह में बाधा नहीं बन सकी. अपने स्टार्टअप हस्त संस्कृति के जरिये 35 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार दे रही ममता भारती ने अपना प्रशिक्षण संस्थान दुल्हिन बाजार में खोला है. वह भागलपुर में एक सेंटर खोल रही हैं.

स्लम एरिया में बने उत्पादों को मिल रहा बड़ा बाजार

ऋद्धिमा श्रीवास्तव अपने स्टार्ट अप इंटरमिंगल इंडिया प्रालि स्लम एरिया में महिलाओं को तमाम उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं. स्लम एरिया की महिलाओं के बने उत्पादों को वह विभिन्न माध्यम से वैश्विक बाजार में पहुंचा रही हैं. अब वह प्लास्टिक फ्री फैब्रिक बनाने का मकसद है.

अलग-अलग फ्लेवर में सत्तू के उत्पाद

सचिन कुमार ने बिहार के गंवई सत्तू को अपने स्टार्टअप के जरिये ग्लोबल पहचान देने का प्रयास किया है. अपने स्टार्टअप के जरिये सत्तू को विशेष तरीके से बनाया और उपभोक्ताओं के बीच परोसा है. अब इस स्टार्टअप में आइआइएम कोलकाता और इंडियन एंजल नेटवर्क ने भी इसमें पूंजी निवेश किया है. अलग-अलग फ्लेवर में सत्तू के तमाम उत्पाद वैश्विक बाजार में उतारे हैं. इसके अलावा तमाम स्टार्टअप उल्लेखनीय हैं.

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