बिहार में महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग का काम ठप, 700 से अधिक मामले लंबित

Updated at : 21 Aug 2021 9:03 AM (IST)
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बिहार में महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग का काम ठप, 700 से अधिक मामले लंबित

राज्य में महिलाओं, बच्चों व निशक्ततों को न्याय दिलाने के लिए आयोग का गठित है, लेकिन पिछले एक साल से महिला व बाल संरक्षण आयोग पूरी तरह से ठप हो गया है. ऐसे में महिला, बच्चों व निशक्तता को लेकर कामकाज बाधित है.

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पटना. राज्य में महिलाओं, बच्चों व निशक्ततों को न्याय दिलाने के लिए आयोग का गठित है, लेकिन पिछले एक साल से महिला व बाल संरक्षण आयोग पूरी तरह से ठप हो गया है. ऐसे में महिला, बच्चों व निशक्तता को लेकर कामकाज बाधित है. दोनों आयोगों में सात सौ से अधिक मामले लंबित हैं, जिन पर सुनवाई करने वाला को नहीं है.

वहीं, तीनों आयोग के रिक्त पदों के लिए आवेदन आने के बाद भी अभी तक विभागीय अधिकारियों व मंत्री ने इस संबंध में कोई संज्ञान नहीं लिया है, जिसके कारण राज्य में महिला आयोग रहने के बाद भी महिलाओं को इस आयोग का लाभ नहीं मिल रहा है.

महिला आयोग में लंबित पड़े है मामले

महिला आयोग के नियमावली के आलोक में आयोग में एक अध्यक्ष तथा सात सदस्यों का पद स्वीकृत है, जिसके विरुद्ध अध्यक्ष प्रो प्रमिला कुमारी फरवरी 2020 से जुलाई 2020 में कार्यरत थीं. वर्तमान में आयोग में अध्यक्ष सहित कुल सात सदस्यों के पद खाली हैं.

प्रभार में चल रहा है निशक्तता आयोग

इन रिक्त पदों के लिए समाज कल्याण विभाग ने फरवरी में आवेदन लिया, लेकिन विभागीय शिथिलता के कारण अब तक आयोग में रिक्त पदों को नहीं भरा जा सका है. यहां तीन सौ से अधिक मामले लंबित हैं. ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा व उनके मामले पर कोई काम नहीं हो रहा है.

समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी ने कहा कि तीनों आयोग में दोबारा से कामकाज नियमित बहुत जल्द शुरू हो जायेगा. इस संदर्भ में विभाग तेजी से काम कर रहा है. राज्य सरकार महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है, बहुत जल्द सभी आयोग पूर्व की तरह काम करने लगेगा.

यह है हाल बाल संरक्षण आयोग का

बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अध्यक्ष का पद फरवरी 2019 में ही रिक्त हुआ था. शेष छह सदस्यों का कार्यकाल जून 2020 में समाप्त हो गया. इस बीच फरवरी 2020 में अध्यक्ष पद पर प्रमिला कुमारी प्रजापति की नियुक्ति हुई. जुलाई 2020 में सदस्य के रूप में सुनंदा पांडेय की नियुक्ति हुई.

बावजूद इसके अभी पांच सदस्यों का चयन होना बाकी है. ऐसे में जब कोरोना में बच्चों की देखरेख व पहचान नहीं हो पायी. वहीं, बाल तस्करी , बालश्रम, बाल विवाह के मामले बढ़े हैं, जिसको लेकर पूरे राज्य में कोई काम नहीं किया गया. इस आयोग के ठप होने से जिलों में भी कोई काम नहीं हो रहा है.

Posted by Ashish Jha

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