खतरनाक भवन में चल रहा इलाज

Updated at : 21 Jul 2016 4:20 AM (IST)
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खतरनाक भवन में चल रहा इलाज

लापरवाही. यक्ष्मा केंद्र को एक वर्ष पूर्व ही खतरनाक घोिषत कर चुका है िवभाग जर्जर भवन में चलाये जा रहे जिला यक्ष्मा केंद्र के पोर्टिको से ही अंदाजा लग जायेगा कि यह किस हाल में है. भवन की हालत ऐसी हो चुकी है कि एक दिन बारिश होती है तो अगले दो दिनों तक इसकी […]

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लापरवाही. यक्ष्मा केंद्र को एक वर्ष पूर्व ही खतरनाक घोिषत कर चुका है िवभाग

जर्जर भवन में चलाये जा रहे जिला यक्ष्मा केंद्र के पोर्टिको से ही अंदाजा लग जायेगा कि यह किस हाल में है. भवन की हालत ऐसी हो चुकी है कि एक दिन बारिश होती है तो अगले दो दिनों तक इसकी छत से पानी टपकता रहता है.
हाजीपुर : जिले में टीबी रोगियों का इलाज करने वाला विभाग खुद कभी हादसे का शिकार हो सकता है. सदर अस्पताल स्थित जिला यक्ष्मा केंद्र का भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि यह किसी दिन गिर कर बड़े हादसे का कारण बन सकता है. इस भवन में न चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी सुरक्षित हैं, न इलाज को आने वाले मरीज. हर समय हादसे का डर बना रहता है. भवन की हालत ऐसी हो चुकी है कि एक दिन बारिश होती है तो अगले दो दिनों तक इसकी छत से पानी टपकता रहता है.
कलेजे पर हाथ रखकर आते हैं मरीज : जर्जर भवन में चलाये जा रहे जिला यक्ष्मा केंद्र के समीप जाने पर पोर्टिको देखते ही अंदाजा लग जायेगा कि यह किस हाल में है. केंद्र का एमडीआर दवा वितरण
कक्ष, प्रयोगशाला कक्ष, दवा भंडार गृह और कर्मचारियों का कमरा सबकी स्थिति बुरी है. यहां इलाज कराने आने वाले मरीज जितनी देर इसकी छत के नीचे रहते हैं, उनका काथ कलेजे पर होता है.
यहां हादसे का डर मरीजों को ही नहीं, कर्मचारियों को भी सताता है. सुबह से शाम तक इस खतरनाक भवन के अंदर बैठकर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी यह जानते हुए कि भवन की छत कभी भी उनके ऊपर गिर सकती है, जान जोखिम में डाल कर ड्यूटी निभाते हैं. यह बात अलग है कि अनहोनी की आशंका से ये कर्मी हमेशा सहमे रहते हैं.
बिल्डिंग डिविजन भवन को कर चुका है खतरनाक घोषित : भवन निर्माण विभाग ने दो साल पहले ही जिला यक्ष्मा केंद्र के भवन की जांच के दौरान इसे खतरनाक बताया था. स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसकी मरम्मत के लिए लिखे जाने पर 2015 में भी इसकी जांच की गयी. भवन निर्माण के कार्यपालक अभियंता ने सितंबर 2015 में अपनी जांच रिपोर्ट में यक्ष्मा केंद्र भवन को खतरनाक घोषित किया और इस भवन को खाली कर देने की सलाह भी दी. तब से लगभग एक साल बीतने को है, लेकिन अभी तक यक्ष्मा केंद्र को इसी जर्जर भवन में संचालित किया जा रहा है.
टेक्नीशियनों की कमी से इलाज प्रभावित : कर्मियों के अभाव में जिले में आरएनटीसीपी यानी रिवाइज्ड नेशनल टेबरक्लोसिस कंट्रोल प्रोग्राम को संचालित करने में कठिनाई हो रही है. जिला यक्ष्मा केंद्र में वर्षों से लैब टेक्नीशियम के 6, सीनियर टीबी लैब सुपरवाइजर के 6, सीनियर उपचार पर्यवेक्षक के 12 और सीनियर डॉट प्लस सुपरवाइजर के एक पद खाली पड़े हैं. इन पदों पर बहाली नहीं होने से यक्ष्मा नियंत्रण के कार्य में बाधा पहुंच रही है.
यहां आने वाले मरीजों की अटकी रहती हैं सांसें
धूल फांक रहा नये भवन का प्रस्ताव
भवन निर्माण विभाग द्वारा नये भवन निर्माण का प्रस्ताव दिये जाने के बाद भी इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई. विभाग की मनाही के बावजूद इसी खतरनाक भवन में टीबी रोगियों का इलाज किया जा रहा है. सदर अस्पताल में इन्फ्रास्ट्रक्चर का ऐसे ही अभाव है. अस्पताल प्रशासन यक्ष्मा केंद्र को आखिर शिफ्ट कहां करे. इस मजबूरी में जर्जर भवन में ही केंद्र को जैसे-तैसे चलाया जा रहा है. इधर बरसात के मौसम में भवन गिरने का खतरा और बढ़ गया है. सबसे बड़ी परेशानी कमरों के अंदर जलजमाव से हो रही है. ऐसे में जिले में यक्ष्मा उन्मूलन के कार्यक्रम पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला यक्ष्मा केंद्र के भवन का जीर्णोद्धार करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है. भवन निर्माण विभाग को इसके लिए लिखा गया है. जिलाधिकारी सह अध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति के स्तर से भी सरकार से राशि की मांग की गयी है. आवंटन मिलने पर निर्माण शुरू हो जायेगा.
डॉ इंद्रदेव रंजन, सिविल सर्जन
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