इनसानियत का धर्म सर्वोपरि

Updated at : 10 Jul 2016 11:53 PM (IST)
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इनसानियत का धर्म सर्वोपरि

गोष्ठी. आतंकवाद को प्रश्रय देनेवाले नहीं हो सकते धर्म के रक्षक ‘शांति व प्रेम का पर्व ईद और आतंकवाद’ विषयक गोष्ठी में वक्ताओं ने दिये विचार ढाका आतंकी हमले में मारे गये लोगों के श्रद्धांजलि में वैशाली कला मंच की गोष्ठी ईद मिलन में गले मिल आतंकवाद के खिलाफ शांति और प्रेम का िदया पैगाम […]

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गोष्ठी. आतंकवाद को प्रश्रय देनेवाले नहीं हो सकते धर्म के रक्षक

‘शांति व प्रेम का पर्व ईद और आतंकवाद’ विषयक गोष्ठी में वक्ताओं ने दिये विचार
ढाका आतंकी हमले में मारे गये लोगों के श्रद्धांजलि में वैशाली कला मंच की गोष्ठी
ईद मिलन में गले मिल आतंकवाद के खिलाफ शांति और प्रेम का िदया पैगाम
हाजीपुर : आनेवाली पीढ़ी और नौजवानों को भारतीय संस्कृति के मूल अर्थ से परिचय कराना होगा, जहां आतंकवाद जैसे किसी शब्द की गुंजाइश ही नहीं है. इनसानियत का धर्म सर्वोपरि है. दूसरे की पीड़ा को समझना ही सबसे बड़ा धर्म है. आतंकवाद को प्रश्रय देनेवाले कभी धर्म के रक्षक नहीं हो सकते.
यह बातें रविवार को वैशाली कला मंच द्वारा आयोजित ‘शांति व प्रेम का पर्व ईद और आतंकवाद’ विषयक गोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किये. सांस्कृतिक और रंगकर्म की संस्था वैशाली कला मंच ने इसका आयोजन हाल ही में हुए ढाका आतंकी हमले में मारे गये लोगों के श्रद्धांजलि स्वरूप किया था. मंच के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो चंद्रभूषण सिंह शशि की अध्यक्षता एवं साहित्यकार रवींद्र कुमार रतन के संचालन में आयोजित गोष्ठी में विचार रखते हुए चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनिलचंद कुशवाहा ने कहा कि सारे धर्मों का सम्मान करना ही हमारा धर्म होना चाहिए, क्योंकि सभी धर्म मानवता का ही संदेश देते हैं.
युवा नेता किशलय किशोर ने कहा कि नौजवानों को भटकाव के रास्ते से मोड़ कर भारतीय संस्कृति और संस्कार से परिचित कराना होगा. युवा साहित्यकार संजय शांडिल्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धर्म और अधर्म की परिभाषा का निर्मल वर्णन है. इससे युवाओं को अवगत कराना होगा. प्राध्यापक प्रो रंजन पाठक ने कहा कि गांव की पुरानी संस्कृति से आनेवाली पीढ़ी को परिचित कराना होगा, जिसमें सभी जाति-धर्म के लोग एक साथ मिल-बैठ कर समाज को संचालित करते थे. धन्यवाद ज्ञापन सचिव क्षितिज प्रकाश ने किया. इस मौके पर मंच द्वारा आयोजित ईद मिलन समारोह में लोगों ने एक-दूसरे से गले मिल कर आतंकवाद के खिलाफ शांति और प्रेम का पैगाम दिया.
लोगों ने एक साथ सेवइयां खायी और शरबत पीकर अमन-चैन की दुआ की. बाद में बांग्लादेश के आतंकी हमले में मारे गये लोगों के सम्मान में दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. इस मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी एवं मंच के पदेन अध्यक्ष रवींद्र कुमार, राम प्रकाश चौधरी, मुकेश कुमार वर्मा, मो नसीम अहमद, मो जमील अहमद, बबलू सुल्तान, शिलानाथ सिंह, अमरेश श्रीवास्तव, अपूर्व, डबलू पंछी आदि उपस्थित थे.
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