उत्तर बिहार का प्रवेश द्वार अंधेरे में डूबा
Updated at : 09 Jul 2016 7:34 AM (IST)
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लाखों की लागत से लगायी गयी हाइमास्ट लाइट बंद चौक पर सुरक्षा का भी नहीं है ठोस प्रबंध रोजाना हजारों यात्री यहां से करते हैं कई जगहों की यात्रा रोज होती है छिनतई व लूटपाट की घटनाएं उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार का संधि स्थल है रामअशीष चौक. यहां का लुक विकसित और बड़ा शहर […]
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लाखों की लागत से लगायी गयी हाइमास्ट लाइट बंद
चौक पर सुरक्षा का भी नहीं है ठोस प्रबंध
रोजाना हजारों यात्री यहां से करते हैं कई जगहों की यात्रा
रोज होती है छिनतई व लूटपाट की घटनाएं
उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार का संधि स्थल है रामअशीष चौक. यहां का लुक विकसित और बड़ा शहर होने का आभास मिलता है. पर, अफसोस है कि यहां कुछ भी व्यवस्थित नहीं है. यहां के वाहन पड़ावों में रंगदारों की तूती बोलती है और इसके इर्द-गिर्द अपराधियों का राज चलता है. रोशनी और सुरक्षा के अभाव में यहांसुरक्षित यात्रा का भरोसा तार-तार हो रहा है. लाखों की लागत से लगायी गयी हाइमास्ट लाइट शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है.
हाजीपुर : उत्तर बिहार के प्रवेश द्वार और नगर के सबसे बड़े वाहन पड़ाव पर न रोशनी की व्यवस्था है, न सुरक्षा का प्रबंध. शहर के रामअशीष चौक पर लाखों की लागत से लगायी गयी हाइमास्ट लाइट शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. शहर का रामअशीष चौक, जहां से हर दिन हजारों यात्री अपने गंतव्य को प्रस्थान करते हैं. उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार का संधि स्थल है यह. यहां के वाहन पड़ावों में रंगदारों की तूती बोलती है और इसके इर्द-गिर्द अपराधियों का राज चलता है.
प्रशासन की अनदेखी से बेकार पड़ी है लाइट : रामअशीष चौक इलाके को रोशनी से जगमग करने का ख्याल कुछ साल पहले जिला प्रशासन को आया था. तब जिला ग्रामीण विकास अभिकरण की ओर से रामअशीष चौक के निकट दो स्थानों पर हाइमास्ट लाइटें लगायी गयी थीं.
हाइमास्ट लाइट का एक पोस्ट बीएसएनएल कार्यालय के निकट हाजीपुर-पटना मार्ग पर स्थित गोलंबर में और दूसरा रामअशीष चौक पर वाहन पड़ाव के निकट खड़ा किया गया था. लाखों रुपये की लागत से ये लाइट लग तो गयी, लेकिन बिजली के कनेक्शन बिना कई वर्षों से बेकार पड़ी हैं. इसका नतीजा है कि शाम होने के बाद यहां चारों तरफ अंधेरा फैल जाता है.
पास में सदर थाना, लेकिन यात्री असुरक्षित : शहर के रेलवे स्टेशन और पूर्व मध्य रेल मुख्यालय के बीच स्थित रामअशीष चौक अपराधियों और लुटेरा गिरोह की गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि स्टेशन परिसर से लेकर चौक और इसके इर्द-गिर्द अपराधी गिरोह के लोग शाम होते ही मंडराने लगते हैं और रेल व बस यात्रियों को अपना निशाना बनाते हैं. पिछले एक साल के दौरान हत्या और लूट की कई वारदातों को अपराधियों ने अंजाम दिया है.
इसी स्थान से एएसआइ को उठा कर की थी हत्या : जनवरी में वैशाली थाने के एएसआइ अशोक कुमार यादव की हत्या हुई थी. इस हत्याकांड के आरोपितों ने ही पकड़े जाने पर खुलासा किया कि लूट के इरादे से रामअशीष चौक से ही अपराधियों ने दारोगा को अपनी कार में बैठाया था.
जानकारों का कहना है कि शायद ही कोई दिन ऐसा हो, जब यात्रियों और राहगीरों से लूटपाट और छिनतई की घटना नहीं होती हो. रामअशीष चौक के निकट ही सदर थाना है, लेकिन शामके बाद यहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं दिखती. एक-दो बार सड़क से पुलिस की पैट्रोलिंग गाड़ी सीधी गुजर जाती है.
सड़क पर खड़े वाहन जोखिम में डालते हैं यात्रियों की जान : रामअशीष चौक की हर दिशा में सड़क पर खड़े यात्री वाहन लोगों की जान सांसत में डाले रहते हैं. यह जिला मुख्यालय का एकमात्र बस पड़ाव है. यहां से प्रतिदिन सैकड़ों बसें पटना, उत्तर बिहार एवं दक्षिण बिहार के विभिन्न शहरों के लिए खुलती हैं. झारखंड की रांची एवं अन्य शहरों के लिए शाम के बाद यहां से बसें खुलती हैं. जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाने के लिए बड़ी संख्या में छोटी वाहन भी यहां से खुलते हैं. विभिन्न स्थानों के लिए वाहन पड़ाव बने हुए हैं.
यात्रियों के साथ होती रहती है मनमानी
स्टैंड रहने के बावजूद वाहन चालकों की मनमानी के कारण स्टैंड के बजाय सड़क पर वाहन खड़ा करके पैसेंजर बैठाये जाते हैं. वाहनों के स्टाफ और एजेंटों द्वारा यात्रियों की खींचातानी देखते बनती है. रंगदारी के जोर पर बेतरतीब ढंग से लगायी जाने वाली गाड़ियों के चलते हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है. अक्सर वाहनों के धक्के से यात्री और राहगीर चोटिल होते रहते हैं. चौक पर यातायात पुलिस का पोस्ट भी है. लेकिन जानकारों की मानें, तो पुलिस यातायात व्यवस्था और वाहन पार्किंग की व्यवस्था दुरुस्त करने के प्रति लापरवाह है.
क्या कहते हैं अधिकारी
रामअशीष चौक के निकट लगी हाइमास्ट लाइट में विद्युत कनेक्शन नहीं है. विद्युत विभाग को इस संबंध में कुछ कहा भी नहीं गया है. ऐसे में विद्युत कनेक्शन कैसे दिया जा सकता है. ऐसे में विद्युत कनेक्शन कैसे दिया जा सकता है. इसके बिल का भुगतान कौन करेगा.
राजू कुमार, सहायक विद्युत अभियंता
रामाअशीष चौक और इसके आसपास अापराधिक गतिविधियों पर पुलिस की कड़ी नजर है. पुलिस की चौकसी का परिणाम है कि कई अपराधियों को पकड़ा जा सका है. पुलिस द्वारा संदिग्धों पर निगरानी रखी जा रही है. शाम के बाद देर रात तक सघन गश्ती की जाती है.
एसके मिश्रा, सदर थानाध्यक्ष
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