प्रशासनिक कार्रवाई से लोगों को कोई आपत्ति नहीं

Updated at : 02 Feb 2016 4:25 AM (IST)
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प्रशासनिक कार्रवाई से लोगों को कोई आपत्ति नहीं

हाजीपुर : सड़क को अतिक्रमित कर बनाये गये वासुदेव मंदिर के कारण मंदिर के सटे उत्तर स्थित गली में आवागमन बाधित हो गया था और मुहल्ले के कैलाश ठाकुर ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल कर सड़क को अतिक्रमणमुक्त कराये जाने की मांग की थी. उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को अतिक्रमणमुक्त करने […]

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हाजीपुर : सड़क को अतिक्रमित कर बनाये गये वासुदेव मंदिर के कारण मंदिर के सटे उत्तर स्थित गली में आवागमन बाधित हो गया था और मुहल्ले के कैलाश ठाकुर ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल कर सड़क को अतिक्रमणमुक्त कराये जाने की मांग की थी. उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को अतिक्रमणमुक्त करने का आदेश दिया था.

न्यायालय की फटकार के बाद जिला प्रशासन ने कई अन्य जिलों के पुलिस बल के सहयोग से गणतंत्र दिवस के दिन मंदिर को हटा कर सड़क को अतिक्रमणमुक्त कराने का प्रयास किया था और उपद्रवी लोगों ने पुलिस-प्रशासन के साथ मारपीट कर वहां से भागने को विवश कर दिया था. इस दौरान एएसपी की तवेरा गाड़ी और नगर पर्षद के ट्रैक्टरों को फूंक दिया गया था. एक दारोगा का सर्विस रिवॉल्वर छीन लिया गया था तथा तीन दर्जन से अधिक पुलिस जवानों को मारपीट कर घायल कर दिया गया था.

कैसे सुलझा विवाद : विवाद के हल के लिए जिला प्रशासन ने श्री ठाकुर के साथ ही स्थानीय लोगों को बैठा कर विवाद का हल निकालने का प्रयास किया. प्रशासन के इस प्रयास का फल सामने आया और लोगों ने याचिका दायर करने वाले श्री ठाकुर को आठ फुट चौड़ी सड़क दिये जाने पर सहमति जतायी. इस कार्य के लिए एक 15 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था.
इसके बाद शनिवार को जिला प्रशासन ने कहा था कि 48 घंटे के अंदर समस्या का समाधान हो जायेगा. इसी निर्णय के अंतर्गत सोमवार को इस मंदिर के उत्तर-पूरब कोने को हटा कर आठ फुट चौड़ी सड़क निकालने की कार्रवाई प्रारंभ हुई. राज मिस्त्री और मजदूर यहां ढांचे को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया है.
स्थल पर कायम है शांति : मंदिर को हटा कर रास्ता बनाने का कार्य पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में हो रहा है, लेकिन यहां लगभग एक दर्जन पुलिस बल तैनात है. स्थानीय नागरिकों ने कहा कि उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है. मुहल्लावासियों का कहना है कि गणतंत्र दिवस के दिन हुए बवाल में भी स्थानीय लोग न के बराबर थे. केवल बाहरी उपद्रवी तत्वों ने हिंसा मचायी और इससे यहां के लोग बदनाम हुए.
गली में नहीं बन सकता कोई भवन : जिला प्रशासन भले ही समस्या का समाधान ढूंढ़ लिये जाने की बात कह कर अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन जानकारों का कहना है कि समस्या अभी ज्यों-की-त्यों की बनी हुई है. जानकारों का कहना है कि राज्य सरकार के नये भवन कानून के अंतर्गत वैसे स्थान में मकान बनाने की स्वीकृति नगर पर्षद नहीं दे सकता, जहां पुराने क्षेत्र में 12 फुट और नये क्षेत्र में 20 फुट से कम चौड़ी सड़क हो.
ऐसी स्थिति में सवाल यह है कि गली में जाने के लिये बनायी जा रही 8 फुट चौड़ी सड़क से क्या होगा और उस गली में बनने वाले मकानों का नक्शा कैसे और कौन स्वीकृत करेगा. यदि मकानों के नक्शा स्वीकृत नहीं होगा, तो फिर मकान कैसे बनेंगे.
न्यायालयीय आदेश के पालन पर सवाल : जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने जिला प्रशासन को रास्ते से अतिक्रमण हटा कर सूचित करने का आदेश दिया था.
कई कानूनविदों का कहना है कि जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों की सहमति से केवल आठ फुट चौड़ी सड़क निकालने की कवायद तेज की है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह न्यायालय के आदेश के अनुसार की कार्रवाई होगी.
काश यह कार्रवाई पहले होती : प्रगतिशील अधिवक्ता मंच के प्रदेश सचिव वरीय अधिवक्ता कुमार विकास ने कहा कि काश जिला प्रशासन ने पहले इसकी पहल कर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करता, तो गणतंत्र दिवस के दिन हुई प्रशासन की किरकिरी नहीं हुई होती.
ऐसे में जब याचिकाकर्ता ने काफी लंबा संघर्ष किया और अंतत: उच्च न्यायालय की शरण में गये तब अपनी किरकिरी होने के बाद समझौते के रास्ते पर आगे बढ़ना एक स्वागतयोग्य कदम है, जो देर से उठाया गया है.
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