राघोपुर के लोगों को मिलेगी नाव और पीपापुल के जोखिम से निजात

Updated at : 01 Feb 2016 3:43 AM (IST)
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राघोपुर के लोगों को मिलेगी नाव और पीपापुल के जोखिम से निजात

हाजीपुर/बिदुपुर : राघोपुर दियारे क्षेत्र की दुरूहमार्गी जनता को दशकों पुराना सपना आज सच होता दिखा, जब उनकी उम्मीदों की आधारशिला रखी गयी. बिदुपुर-कच्ची दरगाह छह लेन गंगा महासेतु का निर्माण शुरू होना, यहां के लोगों के मन की मुराद पूरी होने जैसा है. वर्षों से लोग इसकी प्रतीक्षा में थे. लोग कहते हैं कि […]

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हाजीपुर/बिदुपुर : राघोपुर दियारे क्षेत्र की दुरूहमार्गी जनता को दशकों पुराना सपना आज सच होता दिखा, जब उनकी उम्मीदों की आधारशिला रखी गयी. बिदुपुर-कच्ची दरगाह छह लेन गंगा महासेतु का निर्माण शुरू होना, यहां के लोगों के मन की मुराद पूरी होने जैसा है. वर्षों से लोग इसकी प्रतीक्षा में थे. लोग कहते हैं कि यह उम्मीदों और विकास की संभावनाओं का सेतु हमारे ख्याल से तो बहुत पहले बन जाना चाहिए था, लेकिन हम इस सरकार के शुक्रगुजार हैं कि वह इसे धरातल पर बनाने का काम शुरू कर रही है.

लोगों का कहना था कि 31 जनवरी हमारे लिए खास है. क्योंकि यह हमारे सपने को हकीकत में बदलने की शुरुआत का दिन है. चार साल में पुल के बन कर तैयार हो जाने का लक्ष्य रखा गया है. राघोपुर की जनता को करीब 70 साल से इस पुल का इंतजार था, जो अब पूरा होने वाला है.

कई दशक से था समानांतर पुल का प्रयास : गंगा नदी पर गांधी सेतु के समानांतर पुल निर्माण की योजना पर राज्य सरकार ने लगभग सात साल पहले ही विचार-विमर्श शुरू कर दिया था. महात्मा गांधी सेतु की जर्जर स्थिति के चलते इस पुल की जरूरत शिद्दत से महसूस की जाने लगी थी. वर्ष 2009 में सरकार ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिया था. वर्ष 2010-11 में गंगा पर कच्ची दरगाह से बिदुपुर के बीच पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था.
उस वक्त पुल निर्माण पर 26 सौ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था. अब जब इस योजना को पूरा करने में लगभग पांच हजार करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है. इसमें तीन हजार करोड़ रुपये एशियन डेवलपमेंट बैंक का ऋण और दो हजार करोड़ बिहार सरकार लगायेगी.
उत्तर बिहार की समृद्धि के द्वार खोलेगा महासेतु : कच्ची दरगाह से बिदुपुर के बीच नये सेतु के निर्माण से नेपाल से लेकर झारखंड तक आवागमन आसान हो जायेगा. पुल बन जाने के बाद उत्तर बिहार के लोगों को विशेष सहूलियत होगी . जानकारों का कहना है कि यह सेतु वैशाली जिला समेत उत्तर बिहार के विकास की संभावनाओं का द्वार खोलेगा.
आवागमन की सुविधा के चलते वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर आदि जिलों के किसान भी लाभान्वित होंगे . उत्तर बिहार के कृषि उत्पादों को बाजार उपलब्ध होगा, जिससे उनके उत्पाद की अच्छी कीमत भी मिल सकेगी. सेतु निर्माण से बिहार के पटना, नालंदा, मोकामा, बरौनी, बेगुसराय आदि इलाके के लोग लाभान्वित होंगे.
नाव की यात्रा के जोखिम से मिलेगी मुक्ति : कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल के राष्ट्रीय उच्चमार्ग से जोड़े जाने की योजना है. एनएच से जुड़ने के कारण इस पुल का अंतरराष्ट्रीय महत्व भी बढ़ जायेगा. बताया जाता है कि यह पुल दक्षिण में एनएच 30 से तथा उत्तर में एनएच 103 से जुड़ेगा. नौ किलोमीटर से अधिक लंबे इस सिक्स लेन पुल के निर्माण का ठेका कोरिया की कंपनी देवू तथा भारत की कंपनी एलएंडटी को दिया गया है.
पुल मार्ग से आसपास के इलाके को जोड़ने के लिए उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ एप्रोच रोड बनाये जायेंगे. हाजीपुर-महनार रोड से पुल को कनेक्ट करने के लिए रैंप सड़क बनायी जायेगी. पुल का सबसे बड़ा फायदा राघोपुर क्षेत्र के लोगों को होगा, जो लंबे समय से नाव और पीपा पुल के सहारे आवागमन की दुश्वारियां झेलते आ रहे हैं. पुल के निर्माण से जिले के हाजीपुर, बिदुपुर, राघोपुर, महनार, देसरी, चकसिकंदर, सहदेई एवं आसपास के सैकड़ों गांवों के लोगों के रोजी रोजगार में बढ़ोतरी की उम्मीद बतायी जा रही है.
बसेंगे नये शहर और होगा तेजी से विकास : छह लेन महासेतु के बन जाने से वैशाली जिले के अनेक हिस्सों में नये-नये शहरों का विकास होगा. पुल के आसपास बाजार बसेंगे और नये-नये कल-कारखाने लगने की संभावना बनेगी. सुगम रास्ता उपलब्ध होने से बाहरी पूंजी निवेश का द्वार खुलेगा, जिससे यहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. उद्घाटन समारोह में खुद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने घोषणा की है कि राघोपुर को इंडस्ट्रीयल हब में विकसित किया जायेगा. इसके अलावा राघोपुर की सभी पीसीसी सड़कों को पथ निर्माण विभाग अधिग्रहित कर निर्माण करायेगा.
कार्यक्रम में उपस्थित थे नेता : महासेतु कार्यारंभ के समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव, कला संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम,उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, परिवहन मंत्री चंद्रिका राय,
श्रम संसाधन मंत्री विजय प्रकाश, कृषि मंत्री राम विचार राय, खान भूतत्व मंत्री मुनेश्वर चौधरी, पूर्व मंत्री उदय नारायण राय, विधायक भोला यादव, उमेश सिंह कुशवाहा, राज किशोर सिंह, प्रेमा चौधरी, एमएलसी सुबोध राय, पथ निर्माण प्रधान सचिव सुधीर कुमार, आयुक्त अतुल प्रसाद, सचिव चंचल कुमार, राजद नेता पंछीलाल राय, विजय यादव, संजय पटेल, संतोष चौधरी, रंजीत यादव, मृत्युंजय कुमार आदि मौजूद थे.
परियोजना का परिचय
पुल की कुल लागत-5000 करोड़.
परियोजना की कुल लंबाई-23 किमी.
पुल की कुल लंबाई-10 किमी.
दक्षिणी पथ की लंबाई- 2 किमी.
उत्तरी पथ की लंबाई -8 किमी.
एनएच 103 का चौड़ीकरण- 3 किमी.
पुल स्थल- गांधी सेतु से 10 किमी पूरब.
निर्माण कार्य शुभारंभ- सबलपुर.
निर्माण का समापन – सरमस्तपुर.
कार्य एजेंसी- डेबू एवं एलएनटी.
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