दिन भर दहशत में रही बागमली मुहल्लावासी
Updated at : 29 Jan 2016 4:31 AM (IST)
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हाजीपुर : गणतंत्र दिवस के दिन रास्ते पर बनाये गये मंदिर को उच्च न्यायालय के आदेश से हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ उपद्रवियों द्वारा की गयी मारपीट और आगजनी की घटना के तीसरे दिन भी वहां की स्थिति तनावपूर्ण बनी रही और लोगों में संभावित पुलिसिया कार्रवाई से दहशत छायी रही. पुलिस […]
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हाजीपुर : गणतंत्र दिवस के दिन रास्ते पर बनाये गये मंदिर को उच्च न्यायालय के आदेश से हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ उपद्रवियों द्वारा की गयी मारपीट और आगजनी की घटना के तीसरे दिन भी वहां की स्थिति तनावपूर्ण बनी रही और लोगों में संभावित पुलिसिया कार्रवाई से दहशत छायी रही. पुलिस द्वारा अज्ञात उपद्रवियों के विरुद्ध दर्ज करायी गयी प्राथमिकी के बाद स्थानीय लोगों में यह आशंका घर की हुई है कि कहीं किसी निर्दोष को न पुलिस पकड़ ले.
घटना के अधिकतर दोषी हो गये अंडरग्राउंड : लोगों का मानना है कि घटना को जिन लोगों ने अंजाम दिया या जो इस साजिश में शामिल थे, वे अंडरग्राउंड हो गये हैं. कुछ लोगों को तो बाहर से भी बुलाया गया था, जो घटना के बाद अपने घर जा चुके हैं. ऐसे में पुलिस प्रशासन के सामने समस्या है कि इस मामले में किस पर कार्रवाई करे.
पांच हजार अज्ञात सहित छह नामजद में एक चढ़ा पुलिस के हत्थे : घटना के बाद पुलिस प्रशासन इस कदर हताश हो गया कि घटना के 48 घंटे बाद भी उसे केवल नामजद अभियुक्त हाथ लगा है और वह बाकी लोगों को चिह्नित करने और गिरफ्तार करने में विफल रहा है. पुलिस ने अब तक इस मामले में केवल नगर पार्षद सुभाष कुमार निराला को गिरफ्तार किया है.
सुनसान पड़ा रहा मंदिर : गणतंत्र दिवस को जब पुलिस व प्रशासन मंदिर को हटाने गये, तब वहां बड़ी संख्या में महिलाएं भजन-कीर्तन कर रही थीं. वह मंदिर गुरुवार को पूरी तरह सुनसान रहा. ऐसे में सवाल यह है कि इन उपद्रवियों को पुलिसिया कार्रवाई की पूर्व सूचना कौन देता है, जिससे वे वहां महिलाओं को जमा कर देते थे. वहीं घटना के दो दिन बाद भी वहां वे गाड़ियां वैसे ही पड़ी हैं, जैसी स्थिति में जलायी गयी थीं. प्रशासन ने उन्हें वहां से नहीं हटाया है.
पुलिस के साथ बेहतर संबंध है नगर पार्षद का : उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने से प्रशासन को रोकने में जिस नगर पार्षद ने मुख्य भूमिका निभायी उसके संबंध पुलिस के साथ बेहतर रहे हैं. यह आरोप सर्वजन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र शर्मा ने लगाया है. उन्होंने कहा है कि दोनों बार जब पुलिस मंदिर हटाने पहुंची तब उसी पार्षद के नेतृत्व में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था. पार्षद के सौजन्य से एसपी राकेश कुमार ने गरीबों के बीच कंबल वितरण किया था और इस कार्यक्रम में नगर थानाध्यक्ष की अहम भूमिका थी.
नगर थानाध्यक्ष का निलंबन उचित कार्रवाई : गुरुवार को घटनास्थल का दौरा कर वापस लौटे माकपा नेताओं ने कहा कि उनकी जांच से यह तथ्य सामने आया है कि नगर थानाध्यक्ष की इस मामले में भूमिका संदेहास्पद रही है. पूर्व की कार्रवाई के दौरान भी उन्हीं के कारण पुलिस को विफलता हाथ लगी और गणतंत्र दिवस के दिन भी मंदिर पर झंडा लगाने का आइडिया उन्हीं के दिमाग की उपज थी.
कुछ लोगों ने बताया कि यह अकारण ही नहीं है कि तस्करी के बछड़ों को बरामद कर थानाध्यक्ष ने इसी सप्ताह नगर पार्षद के हवाले कर दिया था और वह भी तब जब इसके लिए शहर में गौशाला बनी हुई है. वहीं भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उमेश प्रसाद शाही ने जिला प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया और कहा कि पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह आपसी सहमति के आधार पर लोगों के साथ विचार- विमर्श कर समस्या का समाधान कराये.
वीडियो खंगाल रही पुलिस : घटना के दोषियों को दबोचने के लिए नगर पुलिस घटना के वीडियो को खंगाल रही है ताकि उनकी पहचान हो सके. विदित हो कि उच्च न्यायालय के आदेश पर अतिक्रमण हटाने गयी पुलिस ने कार्रवाई की वीडियोग्राफी करायी थी.
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