शहर के 39 वार्डों की सफाई के लिए मात्र 71 सफाईकर्मी

Updated at : 08 Jan 2016 2:19 AM (IST)
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शहर के 39 वार्डों की सफाई के लिए मात्र 71 सफाईकर्मी

लगभग 50 साल पहले से ही नगर पर्षद में विभिन्न कोटि के कर्मचारियों के 230 पद स्वीकृत हैं. इन 50 वर्षों में नगर क्षेत्र की आबादी में तीन गुनी वृद्धि हुई है. न सिर्फ नगर क्षेत्र का दायरा बढ़ा है, बल्कि वार्डों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. तब हाजीपुर नगरपालिका में कुल 18 […]

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लगभग 50 साल पहले से ही नगर पर्षद में विभिन्न कोटि के कर्मचारियों के 230 पद स्वीकृत हैं. इन 50 वर्षों में नगर क्षेत्र की आबादी में तीन गुनी वृद्धि हुई है. न सिर्फ नगर क्षेत्र का दायरा बढ़ा है, बल्कि वार्डों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. तब हाजीपुर नगरपालिका में कुल 18 वार्ड थे. आज वार्डों की संख्या 39 है.

इस लिहाज से मौजूदा परिस्थिति में नगर पर्षद को कम-से-कम 500 कर्मियों की आवश्यकता है, पर वर्तमान में इसके कर्मियों की संख्या 100 के करीब है. लगभग तीन साल पहले 10 कर्मचारियों के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद से कार्यालय का काम निबटाना मुश्किल हो रहा है. कार्यालय कर्मचारियों में जो बच गये हैं, उनके कार्यालय के कार्यों के अलावा कर संग्रह का काम भी लिया जा रहा है.

हाजीपुर : कर्मियों की भारी कमी और उस पर से जिम्मेवारियों का बोझ. ऐसे में नगर पर्षद नागरिकों की उम्मीदों को पूरा करे तो कैसे. काम के बोझ से लदा नगर पर्षद आंतरिक संसाधनों की भारी कमी झेल रहा है. संसाधनों की कमी के कारण नगर पर्षद नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेवारियां निभाने में नाकाम साबित हो रहा है.
कर्मियों के अभाव में नगर की साफ-सफाई से लेकर विकास के अन्य कार्य बूरी तरह बाधित हो रहे हैं. सड़क, नाला, पेयजल और सफाई जैसी बुनियादी समस्याओं से नागरिकों को निजात नहीं मिल पा रही. नतीजतन, लोगों के अंदर अपने प्रतिनिधि और पर्षद के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है.
कर्मियों की संख्या 230 से घट कर 98 हो गयी : लगभग 50 साल पहले से ही नगर पर्षद में विभिन्न कोटि के कर्मचारियों के 230 पद स्वीकृत हैं. इन 50 वर्षों में नगर क्षेत्र की आबादी में तिगुनी वृद्धि हुई है. न सिर्फ नगर क्षेत्र का दायरा बढ़ा है, बल्कि वार्डों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. तब हाजीपुर नगरपालिका में कुल 18 वार्ड थे. आज वार्डों की संख्या 39 है.
इस लिहाज से मौजूदा परिस्थिति में नगर पर्षद को कम से कम 500 कर्मियों की आवश्यकता है, पर वर्तमान में इसके कर्मियों की संख्या 100 के करीब है. लगभग तीन साल पहले 10 कर्मचारियों के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद से कार्यालय का काम निबटाना मुश्किल हो रहा है. कार्यालय कर्मचारियों में जो बच गये हैं, उनके कार्यालय के कार्यों के अलावा कर संग्रह का काम भी लिया जा रहा है. इस स्थिति में नगर पर्षद अपने कार्यों का निष्पादन कैसे कर रहा है, यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है.
आबादी बढ़ी तिगुनी, सफाईकर्मी घट कर हुए आधे से कम : नगर पर्षद के पास सफाई कर्मचारियों का घोर अभाव है. जब नगर क्षेत्र की आबादी 60 हजार के आसपास थी, तब नगरपालिका में सफाई कर्मियों की तादाद 150 से अधिक थी. आज क्षेत्र की आबादी एक लाख 90 हजार के करीब है, जबकि नगर पर्षद में सफाई कर्मियों की संख्या घट कर 71 रह गयी है.
सफाई कर्मचारियों के अभाव में नगर पर्षद ने सफाई कार्य का जिम्मा एनजीओ को सौंप रखा है. पर्षद चाहे जो दावा करे, लेकिन नगर का एक भी वार्ड ऐसा नहीं जहां सफाई की स्थिति संतोषजनक हो. उधर, सफाई के नाम पर नगर पर्षद लाखों-लाख रुपये खर्च कर रहा है. इधर, नागरिकों को गंदगी और यत्र-तत्र पसरे कूड़े-कचरे के बीच जीवन बसर करना पड़ रहा है.
नाले के अभाव में सड़कों पर होता है जलजमाव : नगर के ज्यादातर मोहल्लों में अभी तक नाले का निर्माण नहीं हो सका है. इसके चलते वहां से पानी निकलना संभव नहीं हो पाता. नाले के अभाव में नगर के दर्जनों मोहल्लों में सड़कों पर ही जलजमाव बना रहता है. शहर के पोखरा मोहल्ला, रामजीवन चौक, शाही कॉलोनी, वीर कुंवर सिंह कॉलोनी, चौहट्टा, बागमली समेत अन्य इलाकों में सड़कों पर जमा पानी लोगों का पैदल चलना मुश्किल कर देता है. इन इलाकों के परेशानहाल लोग कहते हैं कि नगर पर्षद को प्राथमिकता के आधार पर नाला निर्माण का काम करना चाहिए.
अधर में है ब्रांच पाइप लाइन बिछाने की योजना : नगर क्षेत्र में पेयजल की समस्या दूर करने के लिए कई नयी जल मीनारें बनायी गयीं. इसके बावजूद उस एरिया के लोगों को पानी नहीं मिल रहा. इसका कारण है पाइप लाइन का नहीं होना. नगर में ब्रांच पाइप बिछाने के लिए योजना का प्रारूप तैयार कर इस प्रस्ताव को नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजा गया था.
बताया जाता है कि योजना स्वीकृत भी हो गयी और पाइप बिछाने की जिम्मेवारी बुडको को दी गयी. बूडको ने इसका सर्वे भी कराया, लेकिन सर्वे के बाद इस प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं हो सका. ब्रांच पाइप नहीं लगाये जाने का खामियाजा नागरिकों को इस रूप में भुगतान पड़ रहा है कि जलापूर्ति केंद्र बनने के बाद भी वे पीने के पानी को तरस रहे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
नगर पर्षद लंबे समय से कर्मियों का अभाव झेल रहा है. आंतरिक संसाधन की कमी के बावजूद हम नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं. कर्मियों की बहाली के लिए नगर पर्षद ने सरकार को प्रस्ताव दिया है. उम्मीद है सरकार इस पर कदम उठायेगी.
हैदर अली, सभापति नगर पर्षद
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