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कुपोषण से बचाने को दें सही आहार

Updated at : 21 Jan 2020 5:20 AM (IST)
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कुपोषण से बचाने को दें सही आहार

हाजीपुर : बाल कुपोषण को कम करने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका है. इससे छह माह तक शिशु का वजन लगभग दो गुना बढ़ जाता है एवं एक वर्ष पूरा होने तक वजन लगभग तीन गुना व लंबाई जन्म से लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाती है. शुरुआत के दो वर्षों में तंत्रिका प्रणाली एवं […]

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हाजीपुर : बाल कुपोषण को कम करने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका है. इससे छह माह तक शिशु का वजन लगभग दो गुना बढ़ जाता है एवं एक वर्ष पूरा होने तक वजन लगभग तीन गुना व लंबाई जन्म से लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाती है.

शुरुआत के दो वर्षों में तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों में संरचनात्मक व कार्यात्मक दृष्टिकोण से बहुत तेजी से विकास होता है. इसके लिए अतिरिक्त पोषक आहार की जरूरत होती है. इसलिए छह माह के बाद शिशुओं के लिए स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार देने की जरूरत है.
केयर इंडिया के डीटीएल सुमीत कुमार ने बताया छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार की जरूरत होती है. इस दौरान शिशु के शरीर व मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है. इसे ध्यान में रखते हुए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर माह में एक बार अन्नाप्रसन दिवस मनाया जाता है. छह माह के शिशुओं को अनुपूरक आहार खिलाया जाता है.
साथ ही उनके माता-पिता को इसके विषय में जानकारी दी जाती है. आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह टीएचआर यानि टेक होम राशन का वितरण किया जाता है, जिसमें छह महीने से तीन वर्ष के शिशुओं के लिए चावल, दाल, सोयाबड़ी अथवा अंडा लाभार्थियों को उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही इस राशन से अनुपूरक आहार बनाने के विषय में जानकारी भी दी जाती है.
आहार में इसे करें शामिल
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् से अनुशंसित राष्ट्रीय पोषण संस्थान (हैदराबाद) द्वारा जारी की गयी आहार दिशा निर्देश के अनुसार शिशु के लिए प्रारंभिक आहार तैयार करने के लिए घर में मौजूद मुख्य खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है. सूजी, गेहूं का आटा, चावल, रागा, बाजरा आदि की सहायता से पानी या दूध में दलिया बनाया जा सकता है.
बच्चे के आहार में चीनी अथवा गुड़ को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि उन्हें अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है. छह से नौ माह तक के बच्चों को गाढा व सुपाच्य दलिया खिलाना चाहिए. वसा की आपूर्ति के लिए आहार में छोटा चम्मच घी या तेल डालना चाहिए. दलिया के अलावा अंडा, मछली, फलों व सब्जियों जैसे संरक्षक आहार शिशुओं के विकास में सहायक होते हैं.
इन बातों का रखें ख्याल
छह माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें.
स्तनपान के अतिरिक्त दिन में पांच से छह बार शिशु को सुपाच्य खाना दें.
शिशु को मल्टिंग आहार(अंकुरित साबुत अनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें.
माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है.
शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं.
क्या कहते हैं आंकड़े
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार जिले में छह माह से आठ माह तक के 19.1 प्रतिशत बच्चों को ही स्तनपान के साथ पर्याप्त आहार प्राप्त होता है. वहीं छह माह से 23 माह के बीच केवल 11.2 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त आहार प्राप्त होता है.
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