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अक्षय तृतीया पर डेढ़ करोड़ का कारोबार, मांगलिक कार्यक्रमों की रही धूम

Updated at : 08 May 2019 12:42 AM (IST)
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अक्षय तृतीया पर डेढ़ करोड़ का कारोबार, मांगलिक कार्यक्रमों की रही धूम

हाजीपुर : चुनावी मौसम में इस बार मंगलवार को अक्षय तृतीया पर जिले में सर्राफा बाजार में डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार हुआ. इस बार सोना की कीमत प्रति दस ग्राम 32900 तथा चांदी 350 रुपये प्रति दस ग्राम रही. स्वर्ण व्यवसायियों की मानें तो पिछली बार की तुलना में इस बार सोना-चांदी के आभूषणों […]

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हाजीपुर : चुनावी मौसम में इस बार मंगलवार को अक्षय तृतीया पर जिले में सर्राफा बाजार में डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार हुआ. इस बार सोना की कीमत प्रति दस ग्राम 32900 तथा चांदी 350 रुपये प्रति दस ग्राम रही.

स्वर्ण व्यवसायियों की मानें तो पिछली बार की तुलना में इस बार सोना-चांदी के आभूषणों का कारोबार 30 प्रतिशत कम हुआ. व्यवसाय में आयी कमी का कारण व्यवसायी चुनाव को मान रहे हैं. अक्षय तृतीया का पर्व मंगलवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. श्रद्धालुओं ने गंगा-गंडक के संगम में स्नान कर पूजा-अर्चना की.
स्नान-ध्यान के लिए नगर के कोनहारा घाट, सीढ़ी घाट समेत अन्य घाटों पर लोग जुटे थे. धार्मिक मान्यता के अनुसार लोगों ने अन्न, वस्त्र आदि का दान भी किया. इस अवसर पर बहुत सारे लोगों ने सोने-चांदी की खरीदारी की.
लिहाजा, शहर की आभूषण दुकानों में रौनक बनी रही. नये वाहनों की भी खरीद-बिक्री हुई. मंगलवार को स्वर्ण आभूषण दुकानों की बंदी का दिन होता है, लेकिन अक्षय तृतीया होने के कारण ज्वेलरी की सभी दुकानें खुली रहीं. स्वर्ण व्यवसायियों ने अपनी दुकानों की आकर्षक सजावट कर रखी थी.
दुकानों में ग्राहकों की भीड़ लगी रही. अक्षय तृतीया का दिन काफी शुभ और फलदायी माना जाता है. इस दिन वैवाहिक कार्यक्रम भी शुरू हो जाते हैं. मांगलिक एवं नये कार्य के शुभारंभ के लिए यह दिन श्रेष्ठ और उपयुक्त माना जाता है.
क्या है मान्यता : शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि स्वयं सिद्ध होने के कारण इस दिन जो भी कार्य किया जाता है, उसका अक्षय फल मिलता है. इस दिन अधिक से अधिक विवाह संपन्न होते हैं, क्योंकि शुभ लग्न के लिहाज से यह दिन पुण्य फलदायी माना जाता है.
अक्षय तृतीया को वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ का दिन माना जाता है. कहा जाता है कि सतयुग और त्रेता युग का आरंभ इसी दिन हुआ था. नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव का अवतार भी इसी दिन हुआ. ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का अाविर्भाव भी इसी तिथि को हुआ.
अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य नंदकिशोर तिवारी ने बताया कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, दान और भागवत पूजन से कष्ट-विकार दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होते हैं. अक्षय तृतीया को सौभाग्य दिवस के रूप में मनाने की भी मान्यता है. इस दिन पंचांग देखे बिना कोई भी मांगलिक कार्य किया जा सकता है.
– लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व :
अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन विशेष लाभदायी माना जाता है. पंडितों का मानना है कि इस दिन किया गया आचरण और सत्कर्म अक्षय रहता है. इस दिन लोग धन संचय करते हैं. अक्षय तृतीया को सोने-चांदी खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. पंडित जयशंकर मिश्र बताते हैं कि इस दिन नये कार्य का शुभारंभ और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए.
इस दिन किये जाने वाले शुभ कार्य की विशेष महत्ता होती है. सामान्यतः लक्ष्मी को आठ प्रकार में माना गया है, जो यश, मुद्रा, आयु, वाहन, गृह, संतान, भवन एवं द्रव्य के रूप में मानी जाती हैं. अक्षय तृतीया को इनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है.
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