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हाजीपुर के रविदास टोले में नहीं बना शौचालय, टाट के घरों में जल रहे माटी के चूल्हे

Updated at : 15 Apr 2019 8:24 AM (IST)
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हाजीपुर के रविदास टोले में नहीं बना शौचालय, टाट के घरों में जल रहे माटी के चूल्हे

अनुज शर्मा पटना : यह हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र के तेरसिया दियरा का रविदास टोला है. जाति-पांत मिटाने की सरकारी कोशिश के बाद भी अगड़ी-पिछड़ी जाति के लोग यहां का रास्ता तो बताते हैं, लेकिन टोला के नाम में उस शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जिसके बोलने पर कानून प्रतिबंध लगा चुका […]

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अनुज शर्मा
पटना : यह हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र के तेरसिया दियरा का रविदास टोला है. जाति-पांत मिटाने की सरकारी कोशिश के बाद भी अगड़ी-पिछड़ी जाति के लोग यहां का रास्ता तो बताते हैं, लेकिन टोला के नाम में उस शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जिसके बोलने पर कानून प्रतिबंध लगा चुका है. गांव का हर घर केले के पेड़ों से घिरा है, लेकिन घर भर जगह छोड़कर बाकी का मालिक कोई और है.
टोला के मुहाने पर ही सागर दास का घर है. 75 साल से अधिक उम्र के यह बुजुर्ग एक लंगोटी पहने कड़ी धूप में जौ थूर रहे थे. यह जौ दूसरे के खेत में काम करने के बाद उनके हिस्से में आये हैं. घर पक्का है, पर प्लास्टर नहीं हुआ है. सागर दास को 15 साल पहले घर के लिए 25 हजार रुपये मिले थे. इसके बाद कुछ नहीं मिला. हाजीपुर अरसे से सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र रहा है, यहां मौजूदा सांसद रामविलास पासवान हैं.
महागठबंधन में राजद ने पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम को अपना उम्मीदवार बनाया है. पासवान की जगह उनके छाेटे भाई पशुपति कुमार पारस उम्मीदवार हैं.
कई बार नाम लिखा चुके हैं, अब नाम नहीं लिखायेंगे
सागर दास का वृद्धावस्था पेंशन व अन्य योजनाओं का लाभ न मिलने से मन मुखिया से टूटा हुआ है. तेजस्वी और नरेंद्र मोदी पर भी कुछ नहीं करने का आरोप लगाते हैं. रामविलास पासवान को कभी देखा नहीं है.
छठवीं में पढ़ने वाला प्रमोद हमारा गाइड बनकर बाइक पर बैठ जाता है. हम एक घर में अंदर घुसते हैं, तो टाट के इस घर में मिट्टी का चूल्हा जल रहा था. घर की महिलाएं हमें सरकारी आदमी समझ हड़बड़ा जाती हैं और कहती हैं कि ये लोग कई बार नाम लिखा चुके हैं, अब नाम नहीं लिखायेंगे.
गुजरात में मजदूरी कर गांव में परिवार का पेट पालने वाले विश्वनाथ बताते हैं, सरकार ये दिया-वो दिया का दावा करती है, लेकिन देती नहीं हैं.
वो कहते हैं, कुछ करती तो तीन क्विंटल चावल टूटने वाले दलितों के घर टाट के नहीं होते. बहु लोटा लेकर नहीं जाती. युवा परदेशी न होते. बांस के झुरमुट की छांव में पाठा चढ़ाने की तैयारी में जुटे 37 साल के शंकर को इस बात की तकलीफ है कि उनका अटका हुआ इंदिरा आवास फाइलों से बाहर नहीं आया.
इस गांव लोगों के लिए मुखिया पंकज ही सबसे बड़े नेता हैं. मुखिया से बड़ा नेता रविदासों के टोले में कभी पहुंचा हो यह किसी को याद नहीं है.
यहां पुलवामा, एयर स्ट्राइक-राष्ट्रवाद अंजानी बातें हैं. चौकीदारी करने वाले इस गांव के रविदास ने अअ तक अपनी पहचान में, ‘ मैं भी चौकीदार’ कहना शुरू नहीं किया है. पासवान की विरासत में कोई भी नेता दलितों का चहेता चेहरा बनकर नहीं दिख रहा है. इस क्षेत्र में 26 साल के विनोद दास जैसे कई युवा हैं जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं नहीं है.
हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र
हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में हाजीपुर, महुआ, राजापाकर, जन्दाहा, महनार पातेपुर तथा राघोपुर विधानसभा क्षेत्र आते हैं. 1977 में जनता पार्टी से राम विलास पासवान पहली बार चुनाव जीते थे. 1984 में कांग्रेस -आइ के राम रतन राम ने उनको हराया. 1989 में पासवान ने अपनी सीट वापस ली. वह 1996, 1998 का चुनाव भी जनता दल से लड़े और जीते. 1999 में जदयू के टिकट पर संसद पहुंचे. 2004 और 2014 में लोक जन शक्ति पार्टी से हाजीपुर का प्रतिनिधित्व किया. इसके पहले 2009 में उन्हें जदयू के रामसुंदर दास ने पराजित कर दिया था.
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