रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ बनायी अपनी विशेष पहचान
Updated at : 08 Mar 2019 7:18 AM (IST)
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हाजीपुर : हाजीपुर स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक के पद पर पदस्थापित रेवती कुमारी के संघर्ष की कहानी लगभग आज से तीन दशक पूर्व शुरू होती है. तीन दशक पूर्व तक हाजीपुर जैसे छोटे से शहर में लड़कियों की शिक्षा मैट्रिक या चिट्ठी लिखने तक ही सीमित हुआ करती थी. ऐसे में रेवती व उनकी बहन […]
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हाजीपुर : हाजीपुर स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक के पद पर पदस्थापित रेवती कुमारी के संघर्ष की कहानी लगभग आज से तीन दशक पूर्व शुरू होती है. तीन दशक पूर्व तक हाजीपुर जैसे छोटे से शहर में लड़कियों की शिक्षा मैट्रिक या चिट्ठी लिखने तक ही सीमित हुआ करती थी.
ऐसे में रेवती व उनकी बहन को अपने तीन भाइयों के साथ अपना मुकाम हासिल करने के लिए काफी लंबा संघर्ष करना पड़ा. उनके पिता हाजीपुर चौहट्टा निवासी बैद्यनाथ प्रसाद सहनी ने दोनों बहनों का हौसला बढ़ाया.
मां ने भी भरपूर सहयोग किया. पिता दोनों बहनों को डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन आर्थिक अड़चन व घर से दूर पढ़ने के लिए बेटियों को नहीं भेजने की मानसिकता की वजह से दोनों बहनें डॉक्टर तो नहीं बन सकीं, लेकिन रेवती आज स्टेशन अधीक्षक तो उनकी बहन सीडीपीओ के पद पर कार्य कर रही हैं.
मुश्किल था रूढ़िवादी मानसिकता तोड़ना : रेवती बताती हैं कि माता-पिता के सहयोग के बावजूद पुरुष प्रधान समाज में तीन दशक पूर्व लड़कियों की शिक्षा के लिए जो रूढ़ीवादी मानसिकता थी, उसे तोड़ना काफी मुश्किल था.
दोनों बहनों की पढ़ाई को लेकर दादा-दादी अक्सर उनकी मम्मी और पापा को खरी खोटी सुनाया करते थे. इसके बावजूद न तो उनके माता-पिता ने हार मानी और न ही दोनों बहनों ने.
चुनौतीपूर्ण थी रेलवे की नौकरी : वर्ष 1999 में रेवती कुमारी ने एएसएम के रूप में रेलवे ज्वाइन किया. रेवती बताती हैं कि रेलवे में एएसएम की नौकरी काफी संघर्षपूर्ण थी. शुरुआत में काफी परेशानी हुई.
शादी के बाद 2004 में मां बनने के बाद नौकरी और भी संघर्षपूर्ण हो गयी, लेकिन धीरे-धीरे सबकुछ सामान्य हो गया. वर्ष 2002 में उन्होंने यूनियन को ज्वाइन किया. इस दौरान उनके पति ने उनका भरपूर सहयोग किया.
कहानी हाजीपुर स्टेशन पर पदस्थापित स्टेशन अधीक्षक
चुनौतीपूर्ण हालात में माता-पिता ने बढ़ाया हौसला
नौकरी के साथ बखूबी निभा रही सामाजिक दायित्व
वर्ष 2008 में रेलमंत्री ने पटना में किया था सम्मानित
संभाल चुकी हैं रेलवे की कमान
वर्ष 2008 पर महिला दिवस के मौके पर हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर सिर्फ महिला रेलकर्मियों ने ही सारा कार्यभार संभाला था. परिचालन से लेकर अन्य सभी कार्य में सिर्फ महिला रेलकर्मियों ने इस कार्य में अपनी अहम भूमिका निभायी थी.
इस कार्य के लिए वर्ष 2008 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने उन्हें पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित एक समारोह में शील्ड देकर सम्मानित किया था. इसके अलावा उन्हें जीएम से भी अवार्ड मिल चुका है.
क्या कहती हैं रेवती
अगर महिलाएं चाह लें तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी मेहनत व लगन की बदौलत सफलता की गाथा लिख सकती हैं. विषम परिस्थितियों के बावजूद महिलाओं ने पुरुष प्रधान समाज में अपनी विशेष पहचान बनायी है. अब देश व समाज की सेवा करना ही मेरा उद्देश्य है.
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