ऐसी बस्ती, जहां लग्न नहीं, फसल देखकर होती हैं शादियां!
Updated at : 17 May 2018 9:10 AM (IST)
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विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कोताही का आरोप विनय कुमार पटेढ़ी बेलसर : प्रखंड के कई बस्तियां आज भी संपर्कपथ विहीन है. इन बस्तियों के परिवारों की शादियां लग्न देख कर नहीं, बल्कि फसल देख कर होती है. पगडंडियों के सहारे जीवन जीने के आदी हो चुके लोग शादी ब्याह का मुहूर्त उस वक्त का […]
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विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कोताही का आरोप
विनय कुमार
पटेढ़ी बेलसर : प्रखंड के कई बस्तियां आज भी संपर्कपथ विहीन है. इन बस्तियों के परिवारों की शादियां लग्न देख कर नहीं, बल्कि फसल देख कर होती है. पगडंडियों के सहारे जीवन जीने के आदी हो चुके लोग शादी ब्याह का मुहूर्त उस वक्त का तय करते हैं, जब खेतों में फसल नहीं लगी है. अगर खेतों में फसल लगी हो तो इन्हें फसल कटने का इंतजार करना पड़ता है. इन्हें खेत मालिकों का कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है.
आजादी के वर्षों बाद भी प्रखंड के दर्जनों टोला के लोग संपर्क पथ के अभाव में बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. इन बस्तियों के लोग आज भी पगडंडियों के सहारे आते-जाते हैं. सड़क के अभाव में इनकी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती. संपर्क पथ विहीन बस्तियों में सबसे ज्यादा महादलितों के घर हैं. प्रखंड के सभी पंचायतों में इस तरह के टोले मौजूद है. सरकार की सड़क से जोड़ने की घोषणा भी यहां हवा हवाई साबित हो रही है. पगडंडियों से गुजरना इन लोगों की नियति बन गयी है. एक अदद सड़क की आस में इन टोला के कई पीढ़ी गुजर चुकी है.
विकास की रोशनी भी इन बस्ती में पहुंचती नहीं दिखायी दे रही है. गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाले इन परिवारों में अधिकतर आज भी फूस के घरों में रहते हैं. खुले में शौच मुक्त नारा यहां मजाक लग रहा है. शौचालय निर्माण करने की गति यह थम चुकी है. प्रखंड के साइन पंचायत के वार्ड संख्या एक में करीब 50 महादलित परिवार आज भी मुख्य सड़क तक जाने के लिए पगडंडी ही एक मात्र सहारा है. 500 की आबादी वाले इस बस्ती में विकास के नाम पर सिर्फ अपूर्ण शौचालय है. आज भी इस बस्ती के लोग शौचालय के अभाव में खुले में शौच को मजबूर है.
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