शाम को पहुंचे अस्पताल, तो इलाज मुश्किल

Updated at : 29 Jun 2017 4:20 AM (IST)
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शाम को पहुंचे अस्पताल, तो इलाज मुश्किल

कुव्यवस्था. भगवान भरोसे रहते हैं हाजीपुर : सदर अस्पताल में भरती मरीज जांच और दवाओं के लिए मरीज बाजार पर निर्भर चिकित्सकों द्वारा मरीजों को लिखी जाने वाली दवाएं और पैथोलॉजिकल जांच में कई प्रकार की जांच व दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं. इससे मरीजों को भारी परेशानी हो रही है. अस्पताल सूत्रों ने […]

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कुव्यवस्था. भगवान भरोसे रहते हैं

हाजीपुर : सदर अस्पताल में भरती मरीज जांच और दवाओं के लिए मरीज बाजार पर निर्भर चिकित्सकों द्वारा मरीजों को लिखी जाने वाली दवाएं और पैथोलॉजिकल जांच में कई प्रकार की जांच व दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं. इससे मरीजों को भारी परेशानी हो रही है. अस्पताल सूत्रों ने बताया कि अभी आउटडोर में 27 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं,

जबकि इनडोर में 84 दवाएं दी जा रही हैं. अस्पताल में अनुबंध पर निजी एजेंसी द्वारा जांच की सुविधा उपलब्ध करायी गयी थी. वह जांच घर भी लगभग डेढ़ साल पहले बंद हो जाने के कारण अस्पताल में रियायती दर पर जांच की सुविधा मिलनी बंद हो गयी. कई प्रकार की आवश्यक जांच के लिए मरीजों को बाजार के निजी जांच घरों की शरण लेनी पड़ती है, जहां उनसे मनमाने पैसे वसूले जाते हैं. चिकित्सक जो दवाएं मरीजों को लिखते हैं, उनमें कुछ ही दवाएं अस्पताल में मिलती हैं. बाकी दवाएं बाहर की दुकान से खरीदनी पड़ती हैं.

अस्पताल में सक्रिय हैं बिचौलिये
सदर अस्पताल में इन दिनों फिर बिचौलिये सक्रिय हैं. अस्पताल के ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक हर जगह बिचौलिये मंडराते रहते हैं, जो ग्रामीण इलाकों से आनेवाले भोले-भाले मरीजों को बरगला कर उनका आर्थिक दोहन कराते हैं. निजी क्लिनिक, नर्सिंग होम, जांच घर आदि में ऐसे मरीजों को नाजायज पैसे चुकाने पड़ते हैं, जिसका एक हिस्सा कमीशन के रूप में दलालों की जेब में जाता है. बार-बार की शिकायत के बावजूद सदर अस्पताल एमआर, बिचौलियों और ठगों की गतिविधियों से मुक्त नहीं हो पाया. अस्पताल सूत्रों का कहना है कि परिसर में मंडराने वाले दलालों के अलावा निजी एंबुलेंस वाले भी प्राइवेट हॉस्पिटल और नर्सिंग होम के एजेंट की भूमिका निभाते हैं. इनका काम भोले-भाले मरीजों और उनके परिजनों को झांसा देकर नर्सिंग होम या निजी क्लिनिक तक पहुंचाना है. सूत्र बताते हैं कि इसके एवज में एंबुलेंस चालक को पांच से 10 हजार रुपये तक का भुगतान किया जाता है.
न वार्ड अटेंडेंट, न वार्ड ब्वाय, मरीजों की सुधि कौन ले
अस्पताल के वार्डों में न कोई वार्ड अटेंडेंट और न वार्ड ब्वॉय, ऐसे में मरीजों की देखभाल हो तो कैसे? नर्सों की ड्यूटी भी सुबह आठ से रात आठ बजे तक ही है. इसमें भी लापरवाही देखी जाती है. मरीज बताते हैं कि सुबह 9-10 बजे के पहले नर्स यहां नहीं आती और शाम में छह से सात बजे तक ही ड्यूटी रूम का ताला बंद कर चली जाती हैं. इस बीच वार्ड में जो मरीज भरती होते हैं, उनके सामने सबसे बड़ी समस्या होती है कि देखरेख कौन करे.
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल परिसर से बिचौलियों को बाहर करने के लिए सुरक्षा एजेंसी को सख्त हिदायत दी गयी है. शिकायत मिलने
पर कार्रवाई भी
हुई है. इस पर निगरानी के लिए अस्पताल प्रबंधक को निर्देंश दिया गया है.
डॉ यूपी वर्मा, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल
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