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बिहार: डेढ़ गुना बढ़ा तम्बाकू व सिगरेट का कारोबार, दस वर्ष की उम्र से गिरफ्त में आ रहे बच्चे, जाने कैसे रहें दूर

Updated at : 27 May 2023 9:19 AM (IST)
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बिहार: डेढ़ गुना बढ़ा तम्बाकू व सिगरेट का कारोबार, दस वर्ष की उम्र से गिरफ्त में आ रहे बच्चे, जाने कैसे रहें दूर

शहर के मार्केट में मुहल्लों की अपेक्षा इसकी बिक्री अधिक है. बिक्री का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि, छह-सात महीने पूर्व मुजफ्फरपुर में राज्य कर विभाग ने करीब डेढ़ करोड़ का अवैध गुटखा और पान मसाला जब्त किया था, जिसके खरीद-बिक्री का हिसाब नहीं था.

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मुजफ्फरपुर: गुटखा-तंबाकू के बिक्री में पिछले दो वर्षों में डेढ़ गुनी वृद्धि हुई है. हर रोज लोग लाखों रुपये के पान मसाला, गुटखा, खैनी और सिगरेट का सेवन कर रहे हैं. तंबाकू, गुटखा, सिगरेट के विरुद्ध सही तरीके से जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाये जाने के कारण लोगों में इसके सेवन की प्रवृत्ति बढ़ रही है. शहर के मार्केट में मुहल्लों की अपेक्षा इसकी बिक्री अधिक है. बिक्री का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि, छह-सात महीने पूर्व मुजफ्फरपुर में राज्य कर विभाग ने करीब डेढ़ करोड़ का अवैध गुटखा और पान मसाला जब्त किया था, जिसके खरीद-बिक्री का हिसाब नहीं था. गुटखा व सिगरेट के प्रति युवाओं का झुकाव के कारण इसकी बिक्री बढ़ रही है तो युवा नशे की चपेट में जा रहे हैं.

दस वर्ष की उम्र से ही शुरू हो रही सिगरेट और पान-मसाला की लत

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किये गये वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण के अनुसार, दस वर्ष की उम्र से ही बच्चों में सिगरेट और पान-मसाला की लत लगनी शुरू हो जाती है, जो घातक है. मुहल्लों में होने वाले पान मसाला, गुटखा और खैनी की बिक्री के अनुसार 90 प्रतिशत घरों में कम से कम एक या दो लोगों को किसी न किसी तरह की नशे की लत है. नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर में 70 हजार घर हैं. यदि इनमें 90 प्रतिशत परिवारों में से एक व्यक्ति को लिया जाये, तो 63 हजार और रोज शहर में काम करने के लिए गांवों से आने वाले 20 हजार में 10 हजार लोग इसका सेवन करते हैं, तो करीब 73 हजार लोगों को नशे की लत है. प्रति व्यक्ति औसत खर्च दस रुपये ही लिया जाये, तो रोज सात लाख से अधिक रुपये का खर्च नशे के लिए किया जाता है.

तंबाकू से होने वाली बीमारियां

तंबाकू और सिगरेट से सबसे अधिक खतरा कैंसर का रहता है. इसके अलावा क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, क्रोनिक ऑब्स्ट्रेक्टिव लंग डिजीज, कोरोनरी हार्ट डिजीज, पैरों की नसों में रुकावट, दिमाग का दौरा, फेफड़े का कैंसर, दंत रोग, उच्च रक्तचाप, नींद नहीं आना, घबराहट सहित अन्य तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है.

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क्या कहता है कोटपा कानून

तंबाकू नियंत्रण कानून (कोटपा) 2003 के तहत सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने, खुलेआम तंबाकू से संबंधित सामग्री बेचने पर कार्रवाई की जाती है. धारा-6 के तहत शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज की परिधि और 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना दंडनीय अपराध है. इसके तहत 200 रुपये से 10 हजार रुपये तक जुर्माना और पांच साल की कैद तक का प्रावधान है. लेकिन, इस कानून का सही से पालन नहीं होता है.

तंबाकू को ना कहें, जिन्दगी को हां

तंबाकू का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इसे इसका सेवन करने वाले भी जानते हैं, यदि हम यह संकल्प कर लें कि तंबाकू का सेवन नहीं करेंगे, तो इसे छोड़ना बहुत मुश्किल काम नहीं है. 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस है. हम सभी के लिये पांच दिनों का समय है. इस अंतराल में तंबाकू का सेवन करने वाले लोग यह प्रण कर लें कि तंबाकू का सेवन नहीं करेंगे, तो उनकी जिंदगी में बदलाव का सबसे बड़ा क्षण होगा. प्रभात खबर तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों से अपील करता है कि वे पांच दिनों तंबाकू का सेवन बिल्कुल कम करें और 31 मई को पूरे आत्मविश्वास के साथ यह संकल्प लें कि इसका सेवन कभी नहीं करेंगे.

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यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

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