उफान पर सुरसर : नदी के कटाव की जद में आये दर्जनों परिवार

Updated at : 22 Sep 2020 4:25 AM (IST)
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उफान पर सुरसर : नदी के कटाव की जद में आये दर्जनों परिवार

छातापुर : प्रखंड के झखाड़गढ़ पंचायत वार्ड संख्या आठ स्थित भट्टावारी गांव में सुरसर नदी का कटाव तेज हो गया है. कटाव के जद में आये परिवारों के आंगन तक नदी का बहाव पहुंच जाने से घर के लोग दहशत में जी रहे हैं.

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छातापुर : प्रखंड के झखाड़गढ़ पंचायत वार्ड संख्या आठ स्थित भट्टावारी गांव में सुरसर नदी का कटाव तेज हो गया है. कटाव के जद में आये परिवारों के आंगन तक नदी का बहाव पहुंच जाने से घर के लोग दहशत में जी रहे हैं. हालात इस कदर है कि कटाव को रोकने हेतु जल्द से जल्द निरोधक व बचाव कार्य नहीं कराया गया तो दर्जन परिवारों के घर नदी में समा जायेंगे.

वहीं कीमती निजी जमीन और घर नदी में विलीन हो जाने के बाद वैसे परिवारों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ सकता है. प्रभावित परिवार सिकंदर सिंह, देवनारायण सिंह, कपिलदेव सिंह, देवीलाल सिंह, जयप्रकाश सिंह, जतेंद्र सिंह, रामनारायण सिंह, पुनम सिंह आदि ने बताया कि दशकों पूर्व तटबंध को तोड़कर सुरसर नदी पश्चिम दिशा में खेती की निजी अधिकांश जमीनों को लील चुका है.

अब बीते पांच वर्षों से नदी का बहाव बस्ती से सटकर होने लगा है और तेज कटाव से आंगन तक पानी पहुंच गया है. जिसके कारण बस्ती के लोग दहशत के बीच समय गुजार रहे हैं. बताया जा रहा है कि 1975 में नदी पर तटबंध का निर्माण हुआ था. तब के समय नदी का बहाव मध्य भाग में था. रख रखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हुआ तटबंध वर्ष 2008 में आये कुशहा त्रासदी के प्रलयंकारी बाढ़ में पूरी तरह से बह गया.

तटबंध विहीन नदी का बहाव पश्चिमी दिशा में खुले में प्रवाहित होकर निजी जमीनों को अपने आगोश में ले चुका है और अब उनलोगों के घर नदी में विलीन होने के कगार पर है. 10 दिन पूर्व नदी में पानी अचानक बढ़ गया था. जिसके बाद बीते पांच दिनों के अंदर छह फीट तक की जमीन को लील चुका है. विभागीय स्तर पर उत्तर लालपुर गांव एवं दक्षिण चुन्नी पंचायत तक कटाव निरोधक कार्य कराया गया. परंतु बीच के हिस्से में विभाग के द्वारा निरोधक कार्य नहीं किया गया.

थक हारकर बस्ती वासियों ने निजी स्तर पर सामग्री की व्यवस्था कर कटाव वाले स्थल पर पायलिंग का कार्य किया था. लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहा है. पीड़ित लोगों ने बताया कि उनलोगों की पुश्तैनी 75 प्रतिशत जमीन अब तक नदी में समा चुका है. बड़े छोटे सभी जनप्रतिनिधियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया. लेकिन आश्वासन के सिवा आजतक कुछ भी नहीं मिला है.

posted by ashish jha

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