रोहिणी नक्षत्र शुरू, नहरें सूखी : धान की बिचड़ा तैयारी को लेकर बढ़ी किसानों की चिंता

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रोहिणी नक्षत्र शुरू, नहरें सूखी : धान की बिचड़ा तैयारी को लेकर बढ़ी किसानों की चिंता

Water Crisis Supaul: सुपौल के त्रिवेणीगंज में रोहिणी नक्षत्र शुरू होने के बावजूद नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से किसान धान की बिचड़ा तैयारी को लेकर चिंतित हैं. महंगे डीजल और पंपसेट के सहारे सिंचाई करने से खेती की लागत भी बढ़ रही है.

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त्रिवेणीगंज (सुपौल) से दीपक कुमार की रिपोर्ट

Water Crisis Supaul: धान की खेती के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. नगर परिषद क्षेत्र सहित पूरे प्रखंड के किसान धान की नर्सरी (बिचड़ा) तैयार करने के लिए बारिश और सिंचाई विभाग दोनों पर निर्भर हैं. यदि जल्द नहरों में पानी नहीं पहुंचा और पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो समय पर धान की बिचड़ा तैयार करना मुश्किल हो सकता है.

पंपसेट के सहारे हो रही सिंचाई, बढ़ रही खेती की लागत

नहरों में पानी नहीं मिलने के कारण कई किसान डीजल पंपसेट और बिजली चालित मोटरों से खेतों की सिंचाई कर धान की बिचड़ा तैयार करने में जुटे हैं. इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.

महंगे डीजल ने बढ़ाई परेशानी

लतौना दक्षिण पंचायत के मटकुरिया वार्ड संख्या-6 के किसान रविंद्र साह, धनिकलाल यादव, विवेक यादव, बलराम यादव, राजीव यादव, सुभाष यादव एवं अशोक साह सहित अन्य किसानों ने बताया कि डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण पंपसेट से सिंचाई करना काफी महंगा हो गया है. उनका कहना है कि यदि समय पर बारिश होती या नहरों में पानी उपलब्ध कराया जाता तो धान की नर्सरी तैयार करना आसान हो जाता.

भूजल स्तर गिरने से मोटर भी नहीं दे रही पूरा साथ

नगर परिषद क्षेत्र के डपरखा वार्ड संख्या-25 निवासी किसान दीप नारायण यादव ने बताया कि उन्होंने पंपसेट से खेत की सिंचाई कर खरपतवारनाशक दवा का छिड़काव किया है. खेत सूखने के बाद जुताई कर पुनः पानी भरकर धान की बिचड़ा डाली जाएगी. उन्होंने कहा कि नहरों में पानी नहीं रहने से अधिकांश किसान निजी सिंचाई साधनों पर निर्भर हैं.

वहीं किसान सुनील यादव ने बताया कि भूजल स्तर नीचे चले जाने के कारण पंपसेट से भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. किसान प्रभाकर यादव ने प्रशासन से शीघ्र नहरों में पानी छोड़ने की मांग करते हुए कहा कि इससे किसानों को महंगी सिंचाई से राहत मिलेगी.

सिंचाई विभाग से नहरों में पानी छोड़ने की मांग

किसानों का कहना है कि रोहिणी नक्षत्र धान की खेती की शुरुआत के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, लेकिन सिंचाई व्यवस्था की कमी और नहरों में पानी नहीं होने से इस महत्वपूर्ण अवधि का लाभ नहीं मिल पा रहा है. किसानों ने सिंचाई विभाग से जल्द नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है, ताकि धान की खेती समय पर शुरू हो सके.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

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श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। अपने समाचार पोर्टल पर कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में अनुभव हासिल किया। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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