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सदर अस्पताल के रक्त केंद्र में खून की भारी कमी, मरीजों की बढ़ी चिंता

Updated at : 02 Feb 2026 6:58 PM (IST)
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सदर अस्पताल के रक्त केंद्र में खून की भारी कमी, मरीजों की बढ़ी चिंता

सदर अस्पताल के प्रथम तल पर 14 जून 2023 को अत्याधुनिक रक्त केंद्र (ब्लड बैंक) की स्थापना जिले के लोगों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में हुई थी.

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स्थापना के दो साल बाद भी रक्तदान के प्रति जागरूकता की कमी

सुपौल. सदर अस्पताल के प्रथम तल पर 14 जून 2023 को अत्याधुनिक रक्त केंद्र (ब्लड बैंक) की स्थापना जिले के लोगों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में हुई थी. इसके बाद सड़क दुर्घटना, प्रसव, ऑपरेशन, थैलेसीमिया एवं गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध होने लगा, लेकिन सोमवार को रक्त केंद्र की स्थिति चिंताजनक नजर आई, जब पूरे ब्लड बैंक में मात्र एक यूनिट रक्त ही उपलब्ध पाया गया. रक्त की इस भारी कमी ने न सिर्फ अस्पताल प्रशासन, बल्कि इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है. जानकार बताते हैं कि नियमित रक्तदान शिविरों के अभाव और लोगों में रक्तदान को लेकर जागरूकता की कमी इसका प्रमुख कारण है. कई बार आपात स्थिति में मरीजों के परिजनों को बाहर निजी ब्लड बैंकों या अन्य जिलों की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की परेशानी बढ़ जाती है.

ब्लड बैंक में सिर्फ एक यूनिट खून है उपलब्ध

सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन तीन से छह यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है. इसमें सबसे अधिक मांग ओ-पॉजिटिव और बी-पॉजिटिव रक्त समूह की रहती है. बावजूद इसके पिछले कुछ दिनों से रक्तदान करने वालों की संख्या बेहद कम हो गयी है. सोमवार को स्थिति यह रही कि पूरे स्टॉक में सिर्फ एक यूनिट रक्त बचा था, जो किसी भी आपात स्थिति के लिए नाकाफी माना जा रहा है.

डीएस डॉ नूतन वर्मा ने कहा कि रक्त केंद्र पूरी तरह से सुसज्जित है. प्रशिक्षित स्टाफ भी मौजूद है, लेकिन रक्तदाता नहीं मिलने से सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने सामाजिक संगठनों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवी संस्थाओं से आगे आकर नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करने की अपील की है. कहा कि जल्द ही रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. साथ ही कॉलेज, एनजीओ और समाजसेवियों के सहयोग से ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि रक्तदान को महादान समझकर आगे आएं. गौरतलब है कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है. इसकी कमी सीधे तौर पर मरीजों की जान पर खतरा बन सकती है. ऐसे में समय रहते ठोस पहल नहीं की गयी तो सदर अस्पताल का यह महत्वपूर्ण रक्त केंद्र सिर्फ नाम मात्र का बनकर रह जाएगा.

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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