कोसी फिर बनी काल, सुपौल में 30 से अधिक घर नदी में समाए, रातभर जागकर सामान बचा रहे ग्रामीण

सहरसा में कोसी के कटाव के कारण नाव से सुरक्षित स्थान की ओर जाता पीडित परिवार व सुपौल में नदी के किताने समान उतारते पीड़ित
Kosi River Erosion: बिहार में मानसून के बीच कोसी नदी एक बार फिर तबाही मचा रही है. सुपौल के किशनपुर प्रखंड में 30 से अधिक घर नदी में समा चुके हैं, जबकि कई अन्य मकान कटाव के मुहाने पर हैं. बेघर हुए परिवार रातभर जागकर अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं. प्रशासन से तत्काल राहत और कटावरोधी कार्य की मांग तेज हो गई है.
सुपौल से राजीव झा और किशनपुर से जीवछ प्रसाद की रिपोर्ट
Kosi River Erosion: बिहार में मानसून के बीच कोसी नदी एक बार फिर तबाही मचा रही है. सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड में नदी का कटाव लगातार तेज हो गया है. दुबियाही पंचायत के बेला गोठ वार्ड संख्या-06 में अब तक 30 से अधिक घर कोसी नदी में समा चुके हैं. कई अन्य मकान और सैकड़ों बीघा कृषि भूमि भी कटाव की जद में हैं. हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण पूरी रात जागकर अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं. प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल कटावरोधी कार्य, सरकारी नाव और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है.
सुपौल में कोसी नदी का कटाव बना आफत
सुपौल के किशनपुर प्रखंड स्थित बेला गोठ गांव में कोसी नदी का कटाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार देखते ही देखते कई घर नदी में समा गए और खेत भी तेज धारा में बह गए. गांव में भय का माहौल है. लोग अपने परिवार और सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटावरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में सड़कें और दर्जनों अन्य घर भी नदी में समा सकते हैं.
30 से अधिक परिवार बेघर, निजी नाव पर खर्च करने को मजबूर
कटाव के कारण अब तक 30 से अधिक परिवारों का आशियाना उजड़ चुका है. कई अन्य घर भी नदी के बिल्कुल किनारे पहुंच गए हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्रशासन की ओर से अब तक सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है.
ग्रामीणों का आरोप है कि घर-गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए उन्हें निजी नाव संचालकों को 3,000 से 5,000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं. वहीं अब तक प्रभावित परिवारों को पॉलीथिन शीट या अन्य तत्काल राहत सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई गई है.
जांच में देरी से राहत भी अटकी
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को आवेदन देने के बावजूद अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच रहे हैं. उनका आरोप है कि नदी पार करने की कठिनाई के कारण जांच लंबित है, जिससे सरकारी सहायता मिलने में भी देरी हो रही है.
राजस्व कर्मचारी आनंद कुमार गुप्ता ने बताया कि कटाव प्रभावित परिवारों की सूची प्राप्त हो गई है. अगले दो दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण किया जाएगा. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
वहीं अंचल अधिकारी सुशीला कुमारी ने कहा कि कटाव की जांच के लिए राजस्व कर्मचारी को भेजा जा रहा है. पात्र परिवारों को नियमानुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. प्रशासन के अनुसार फिलहाल 10 से 15 परिवारों के प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना है.
सरकारी नाव की मांग तेज
बेला गोठ वार्ड संख्या-06 में पहले करीब 50 से 60 परिवार रहते थे, लेकिन अब अधिकांश परिवारों का आशियाना उजड़ चुका है. वार्ड संख्या-06 और वार्ड संख्या-07 के बीच नदी बहने से लोगों का आवागमन भी मुश्किल हो गया है.
वार्ड सदस्य रामकुमार मंडल, पूर्व वार्ड सदस्य शोभा देवी, वार्ड पंच बम भोला मंडल समेत कई ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से बेला घाट पर कम से कम एक सरकारी नाव तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है.
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पूर्णिया और अररिया में भी बढ़ा नदी कटाव
कोसी ही नहीं, पूर्णिया और अररिया जिले के कई गांव भी नदी कटाव की चपेट में हैं. पूर्णिया के अमौर प्रखंड की डहुआबाड़ी ग्राम पंचायत में कनकई नदी का कटाव तेजी से जारी है. सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है और अब रिहायशी इलाकों पर भी खतरा मंडरा रहा है.
वहीं अररिया के सिकटी प्रखंड में नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बाद नूना नदी उग्र हो गई है. ग्रामीणों के अनुसार नदी नया रास्ता बनाने की ओर बढ़ रही है. औलाबाड़ी पंचायत और आसपास के कई गांवों के दर्जनों परिवार विस्थापन के कगार पर पहुंच गए हैं. प्राथमिक विद्यालय मलदहिया टोला पर भी खतरा मंडरा रहा है.
कटिहार में महिलाओं ने की गंगा मैया से गांव बचाने की प्रार्थना
कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड की दक्षिणी मुरादपुर पंचायत के तीनघरिया बालू टोला में कटाव से परेशान महिलाओं ने गंगा तट पर विशेष पूजा-अर्चना की. महिलाओं ने गीत-भजन गाकर गंगा मैया से गांव, खेती और परिवार को सुरक्षित रखने की प्रार्थना की.
ग्रामीणों का कहना है कि नदी अब गांव से करीब 300 मीटर की दूरी पर रह गई है. यदि जल्द कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया तो पूरे टोले का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें बेला घाट पर तत्काल सरकारी नाव उपलब्ध कराई जाए. कोसी नदी किनारे युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य शुरू किया जाए. प्रभावित परिवारों को पॉलीथिन शीट और अन्य राहत सामग्री दी जाए. बेघर परिवारों को शीघ्र मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा मिले. प्रशासनिक टीम नियमित रूप से प्रभावित गांवों का निरीक्षण करे.
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By Pratyush Prashant
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