पहले नौकरी दी, फिर 10 दिन बाद छीन ली! पिपरा BDO के फैसले पर उठे सवाल, वार रूम कर्मी की बहाली रद्द

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बीडीओ की मनमानी, एक हफ्ते में पलटा अपना ही आदेश, नियुक्त कर्मी को 10 दिन बाद निकाला   

नियुक्ति पत्र देते विडिओ पिपरा | Prabhat Khabar Network

Supaul News: सुपौल के पिपरा प्रखंड में वार रूम कर्मी की नौकरी नियुक्ति पत्र मिलने के महज 10 दिन बाद ही छीन ली गई। यह फैसला स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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Supaul News: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड में वार रूम कर्मी की बहाली को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत नियुक्त एक युवक को ज्वाइनिंग के महज 10 दिन बाद ही सेवा से हटा दिया गया. खास बात यह है कि नियुक्ति पत्र खुद प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ने जारी किया था और बाद में उसी आदेश को निरस्त कर दिया. इस पूरे मामले के बाद बीडीओ की कार्यशैली और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं.

नोटिस जारी कर मांगे गए थे आवेदन

जानकारी के अनुसार, बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (BRLPS) और उप विकास आयुक्त सुपौल के निर्देश के आलोक में पिपरा प्रखंड स्वच्छता कार्यालय में वार रूम कर्मी की बहाली की प्रक्रिया शुरू की गई थी.

प्रखंड कार्यालय ने 24 जून से 29 जून 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए थे. आवेदन की जांच के बाद कार्यालय के ज्ञापांक 821, दिनांक 1 जुलाई 2026 के माध्यम से दीना पट्टी पंचायत निवासी संतोष कुमार पासवान का चयन किया गया. उन्हें बीडीओ अमरेन्द्र पंडित ने नियुक्ति पत्र सौंपा और उन्होंने 1 जुलाई से कार्यालय में कार्यभार भी संभाल लिया.

10 दिन बाद ही रद्द कर दी नियुक्ति

नियुक्ति के महज 10 दिन बाद प्रखंड कार्यालय ने नया आदेश जारी कर पूरी बहाली प्रक्रिया रद्द कर दी. ज्ञापांक 891, दिनांक 11 जुलाई 2026 के तहत संतोष कुमार पासवान की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया.

आदेश में कहा गया कि बहाली प्रक्रिया नियमानुसार नहीं हुई थी. इसलिए इसे निरस्त करते हुए नए सिरे से आवेदन लेकर बहाली की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

पीड़ित युवक ने लगाया मनमानी का आरोप

सेवा से हटाए गए संतोष कुमार पासवान ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्हें विधिवत नियुक्ति पत्र देकर कार्यालय में बुलाया गया था और वे लगातार अपनी ड्यूटी कर रहे थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि बिना कोई कारण बताए और बिना किसी नोटिस के उन्हें हटा दिया गया. उनका कहना है कि गरीब युवाओं के भविष्य के साथ इस तरह खिलवाड़ करना उचित नहीं है.

Supaul News: BDO ने क्या कहा?

मामले पर प्रखंड विकास पदाधिकारी अमरेन्द्र पंडित ने कहा कि बहाली प्रक्रिया की नियमावली की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण नियुक्ति रद्द करनी पड़ी.

उन्होंने बताया कि अब संबंधित पद पर नियमानुसार दोबारा बहाली की जाएगी ताकि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हो.

Supaul News: प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार नियुक्ति पत्र जारी होने और ज्वाइनिंग के बाद किसी कर्मी की सेवा समाप्त करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया और उचित कारण आवश्यक माने जाते हैं.

ऐसे में इस फैसले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है. लोगों का कहना है कि यदि बहाली प्रक्रिया में कोई त्रुटि थी तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की है, न कि नियुक्त अभ्यर्थी की.

जांच की उठी मांग

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए. साथ ही युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए.

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इंद्रभूषण कुमार

लेखक के बारे में

By इंद्रभूषण कुमार

इंद्रभूषण प्रिंट माध्यम में 10 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अपराध, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं. कटैया निर्मली (सुपौल) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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