सुपौल मंडी में भिंडी से हरी मिर्च तक के नए भाव जारी, खरीदारी से पहले देखें 9 जुलाई का ताजा रेट

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सांकेतिक तस्वीर

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Supaul Mandi Bhav: सुपौल मंडी में 9 जुलाई 2026 के लिए सब्जियों के ताज़े भाव आ गए हैं. मानसून के इस मौसम में कीमतों में उठापटक जारी है. किसानों और व्यापारियों के लिए यह जानकारी बेहद ज़रूरी है.

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Supaul Mandi Bhav : अगर आप सुपौल या आसपास के इलाके में सब्जियों की खरीदारी या कारोबार से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके काम की है. सुपौल मंडी में 9 जुलाई 2026 के लिए ताजा सब्जी भाव जारी कर दिए गए हैं. मानसून के मौसम में कई सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. ऐसे में किसानों, थोक व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं के लिए मंडी के ताजा भाव जानना बेहद जरूरी है.

सुपौल मंडी में इस समय हरी मिर्च सबसे महंगी बिकने वाली सब्जियों में शामिल है, जबकि आलू और प्याज अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हैं. मौसम, स्थानीय आवक और मांग के आधार पर आने वाले दिनों में कीमतों में बदलाव संभव है.

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सुपौल मंडी में 9 जुलाई 2026 का ताजा सब्जी भाव

सुपौल मंडी में गुरुवार को भिंडी का न्यूनतम भाव 2,550 रुपये और अधिकतम 2,800 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. करेला 3,000 रुपये से 3,400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिका.

बैंगन का भाव 2,200 रुपये से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल रहा. खीरा 2,050 रुपये से 2,250 रुपये प्रति क्विंटल के बीच कारोबार करता रहा.

प्याज का न्यूनतम भाव 1,400 रुपये और अधिकतम 1,600 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. आलू 1,300 रुपये से 1,400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिका.

टमाटर का भाव 2,100 रुपये से 2,200 रुपये प्रति क्विंटल रहा. वहीं हरी मिर्च सबसे अधिक कीमत पर बिकी, जिसका भाव 3,400 रुपये से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया.

Supaul Mandi Bhav : किसानों और व्यापारियों के लिए क्यों जरूरी हैं मंडी के ताजा भाव

मंडी के ताजा भाव किसानों को अपनी उपज बेचने का सही समय तय करने में मदद करते हैं. वहीं थोक और खुदरा व्यापारियों को खरीद और बिक्री की रणनीति बनाने में आसानी होती है. लगातार बदलते मौसम और आवक के कारण सब्जियों की कीमतों में रोजाना बदलाव हो सकता है. इसलिए मंडी जाने से पहले ताजा रेट की जानकारी लेना लाभदायक साबित होता है.

सुपौल मंडी उत्तर बिहार की प्रमुख कृषि मंडियों में से एक मानी जाती है, जहां आसपास के कई जिलों से किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं. यहां तय होने वाले भाव का असर स्थानीय बाजारों पर भी देखने को मिलता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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