Prabhat Special: नशे की गिरफ्त में सुपौल के युवा, सूखा नशा के जाल में फंसते सपने, देखें चौकाने वाला खुलासा
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 13 Feb 2025 4:05 AM
प्रतीकात्मक फोटो
Prabhat Special: सुपौल जिला के बच्चे और युवा नशे की गिरफ्त में हैं. आज प्रभात खबर खास में जानते हैं कैसे अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिला सुपौल में सुखा नशा ने किस तरह आने वाली पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है.
Prabhat Special: शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के सपने देखने वाली युवा पीढ़ी जब नशे की गर्त में डूबने लगे, तो यह समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है. ऐसा ही देखने को मिल रहा अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिला सुपौल में. नशे की लत युवाओं के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार में धकेल रही है. कलम पकड़कर भविष्य संवारने की उम्र में यहां के कई युवा अब चिलम और नशे की अन्य लतों की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं. कई गांवों और कस्बों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है.
गली-चौराहों पर नशे में धुत मिलते हैं छात्र
पहले जहां युवा अपनी पढ़ाई और कैरियर को लेकर चिंतित रहते थे, अब उनमें से कई नशे की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं. धुएं में लिपटी यह नई पीढ़ी अपने ही भविष्य को जला रही है. स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, नशे की लत युवाओं के बीच तेजी से फैल रही है. इसका मुख्य कारण बेरोजगारी, गलत संगति, और आसानी से उपलब्ध होने वाले नशीले पदार्थ हैं. एक स्थानीय शिक्षक नाम नहीं बताने के शर्त पर कहते हैं, हमारे कई छात्र जो कभी कक्षा में अव्वल रहते थे, अब स्कूल छोड़ चुके हैं, वे गली-चौराहों पर नशे में धुत मिलते हैं. जो एक सभ्य समाज के लिए बहुत ही दुखद है.
परिवार के लोगों में बढ़ रही चिंता
नशे की लत केवल युवाओं को ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को भी तबाह कर रही है. कई माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन नशे के खिलाफ खुलकर बोलने से डरते हैं. एक मां की आंखों में आंसू छलक आते हैं जब वह कहती हैं, हमने अपने बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ाया, पर अब वह दिन-रात नशे में रहता है. न हमें पहचानता है, न खुद का ख्याल रखता है. वहीं एक और मां बताती है कि उनका बेटा पहले पढ़ाई में होशियार था, लेकिन अब उसका अधिकतर समय दोस्तों के साथ बीतता है. कहती हैं, पहले घर आता था तो किताब लेकर बैठता था, अब झगड़ालू हो गया है. पैसे मांगता है, नहीं देने पर गुस्सा करता है. हमें डर लगता है कि कहीं चोरी-चकारी में न पड़ जाए. युवाओं को नशे की गिरफ्त से निकालना अब सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है. अगर समय रहते इस समस्या पर लगाम नहीं लगाई गई, तो एक पूरी पीढ़ी अंधकार में खो सकती है. जरूरी है कि हम धुएं के इस कुहासे को हटाएं और अपने युवाओं को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएं.
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, पुलिस को लंबे समय से जानकारी मिल रही थी कि कोसी के कछार वाले इलाकों में नशे के अवैध कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है. इसी के तहत बिहार नारकोटिक्स टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से छापेमारी की. इस दौरान भारी मात्रा में गांजा बरामद किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग तीन करोड़ रुपये कीमत बताई जा रही है. सूत्र बताते हैं कि पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि नेपाल सीमा से सटे इस इलाके में तस्कर लंबे समय से सक्रिय हैं. नदियों और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर वे अवैध रूप से नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहे थे. अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है.
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क्या बोले डॉक्टर
डॉ आरसी मंडल का कहना है कि सूखा नशा यानी दवा, सॉल्यूशन, व्हाइटनर, पेन किलर और दूसरी केमिकल चीजों को सूंघकर या खाकर नशा करना. इसकी लत इतनी खतरनाक होती है कि कुछ ही दिनों में युवाओं की सेहत खराब होने लगती है और मानसिक संतुलन तक बिगड़ सकती है.
सूखे नशे की तस्करी में अधिकांश युवा
पड़ोसी देश नेपाल से गांजा व ब्राउन शुगर की तस्करी में अधिकांश युवा वर्ग शामिल है. अधिक मुनाफा के लोभ में यह युवा वर्ग अपने सहपाठियों का भविष्य बर्बाद करने में लगे हुए है. पिछले दिनों ब्राउन शुगर तस्करी में पकड़े गये दो तस्करों की उम्र पर अगर नजर डाला जाये तो महज 25-30 वर्ष है.
कफ सिरप की लगी लत तो छोड़ना मुश्किल
लोगों की मानें तो जिसे इस दवा लत लग गयी है, वो इसके बिना नहीं रह सकता है. यह स्थिति शराबबंदी के बाद बनी है. जब लोगों को आसानी से शराब नहीं मिल पाता है, तब लोग इस तरह के नशे के आदि होने लगे हैं. चिंता का विषय है कि अधिकतर युवा ही इसकी चपेट में आ गये हैं. जानकारों का कहना है कि कोडिन युक्त इन सिरप का सेवन करने से लगभग दो सौ मिलीलीटर शराब के बराबर नशा होता है. खास बात यह भी है कि पीने वाले के मुंह से शराब जैसी दुर्गंध भी नहीं आती.
केस स्टडी 1– 01 जनवरी को करजाईन थाना क्षेत्र के दहगामा वार्ड नंबर 02 में पुलिस ने 29 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ एक तस्कर गिरफ्तार.
केस स्टडी 2- 02 जनवरी को एसएसबी जवानों ने बॉर्डर पीलर संख्या 201/04 के समीप पेट्रोलिंग डयूटी के दौरान 72 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया.
केस स्टडी 3- 04 जनवरी को एसएसबी जवानों ने पीलर संख्या 221/01 के समीप 672.250 ग्राम गांजा जब्त किया.
केस स्टडी 4– 13 जनवरी को एसएसबी जवानों ने बॉर्डर पीलर संख्या 215/22 के समीप कोसी नदी में 138 किलो गांजा किया बरामद, तस्कर नदी में छलांग लगा भाग निकला.
केस स्टडी 5- 11 फरवरी की देर रात भपटियाही थाना क्षेत्र में बिहार नारकोटिक्स टीम ने की छापामारी 19 क्विंटल 45 किलो 700 ग्राम गांजा बरामद, अंतर जिला गिरोह के पांच तस्कर गिरफ्तार.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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