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हमारे राष्ट्र का इतिहास रहा गौरवशाली- प्राचार्य

Updated at : 23 Mar 2025 7:14 PM (IST)
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हमारे राष्ट्र का इतिहास रहा गौरवशाली- प्राचार्य

23 मार्च 1931 को देशभक्त भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा फांसी दिए जाने के कारण डॉ राम मनोहर लोहिया आजीवन अपना जन्म दिवस नहीं मनाये

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– शहीद दिवस एवं डॉ राम मनोहर लोहिया की जयंती पर कार्यक्रम का किया गया आयोजन त्रिवेणीगंज. मुख्यालय स्थित अनुपलाल महाविद्यालय में रविवार को राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय इकाई के संयुक्त तत्वाधान में शहीद दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ जयदेव प्रसाद यादव की अध्यक्षता में शहीद दिवस एवं डॉ राम मनोहर लोहिया की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी सह जिला नोडल पदाधिकारी प्रो विद्यानंद यादव की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ यादव ने बताया कि किसी भी राष्ट्र का गरिमा और विकास का नींव वहां के व्यक्ति के सच्चे देश भक्ति और राष्ट्र प्रेम पर निर्भर करता है. हमारे राष्ट्र का इतिहास गौरवशाली रहा है. दुर्भाग्य से 15 अगस्त 1947 से पूर्व एक लंबे अरसे तक हमारे राष्ट्र को दासता की दंश झेलनी पड़ी. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ना जाने कितनी माताओं की कोख सूनी हो गई. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 23 मार्च 1931 को तीन देशभक्त भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को अंग्रेजी हुकूमत के विरोध करने के कारण करीबन 23-24 वर्ष की आयु में फांसी दे दी गई. जिसका बलिदान 15 अगस्त 1947 को एक नया सवेरा लेकर आया. हमारे युवाओं को उनसे सीख लेनी चाहिए. उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर हम अपने आपको गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं. कहा कि डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था. वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी, प्रखर चिंतक तथा समाजवादी नेता थे. 23 मार्च 1931 को देशभक्त भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा फांसी दिए जाने के कारण डॉ राम मनोहर लोहिया आजीवन अपना जन्म दिवस नहीं मनाये. यह उनकी महान हृदय का उदारता थी. कार्यक्रम पदाधिकारी सह जिला नोडल पदाधिकारी प्रो विद्यानंद यादव ने बताया कि हमारे देश में स्वतंत्रता संग्राम के तीन असाधारण योद्धा के बलिदान को याद दिलाने के लिए 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है. कहा कि राष्ट्र के कल्याण के लिए हंसते-हंसते अपने जीवन को बलिदान करने वाले अमर बलिदानी आज भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है. कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी एवं एनएसएस के स्वयंसेवकों द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित कर शहीदों को नमन किया गया. कार्यक्रम में महाविद्यालय के आईक्यूए सेल समन्वक प्रो अशोक कुमार, प्रो प्रदीप प्रकाश, प्रो चंद्र किशोर यादव, प्रो वीरेंद्र कुमार, प्रो सुरेंद्र कुमार, डॉ सदानंद यादव, डॉ रंभा कुमारी, प्रो माधुरी लता, प्रो प्रफुल कुमार प्रभाकर, प्रो कुमारी पूनम, प्रो शंभू यादव, मृत्युंजय कुमार, रंजन कुमार, बालकिशोर कुमार, मनोज कुमार, शिल्पी ज्योति, चुनचुन कुमारी, शानू शर्मा, आस्था कुमारी, अंकिता भारती, श्रेया भारती, अनुप्रिया कुमारी, आयुष अग्रवाल, प्रतीक कुमार, दिलखुश कुमार, रुपेश कुमार, अंकित कुमार, यश कुमार, यशिका कुमारी, सरिता कुमारी, पूजा कुमारी, रणजीत सिंह, अभिजीत कुमार, मनीषा कुमारी, स्मृति कुमारी, प्रियंका कुमारी, खुशबू कुमारी, सोनी कुमारी, काजल कुमारी, आकांक्षा, रुचि कुमारी, प्रिंसी कुमारी, रिया कुमारी, अंजली कुमारी आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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