16 साल पुराने शिक्षा घोटाले का खुलासा, कोसी के तत्कालीन आरडीडीई सहित 6 डीईओ दोषी करार
Published by : Shruti Kumari Updated At : 18 May 2026 3:51 PM
शिक्षा भवन सुपौल
इस मामले को उजागर करने वाले जनसुराज जिलाध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने वर्ष 2010 से लगातार संघर्ष किया. आरटीआई और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर उन्होंने मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार तक पहुंचाया, जिसके बाद निगरानी जांच के आदेश दिए गए.
सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट:
सुपौल: करीब डेढ़ दशक से चल रहे कोसी प्रमंडल के चर्चित शिक्षक स्थानांतरण घोटाले में बड़ा फैसला सामने आया है. वर्ष 2006 से 2010 के बीच हुए इस मामले में तत्कालीन क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडीई) सहित छह जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) दोषी पाए गए हैं. लंबी विभागीय जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद शिक्षा विभाग ने 15 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो की पेंशन से 5 प्रतिशत राशि की कटौती का आदेश जारी किया है.
इस मामले को उजागर करने वाले जनसुराज जिलाध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने वर्ष 2010 से लगातार संघर्ष किया. आरटीआई और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर उन्होंने मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार तक पहुंचाया, जिसके बाद निगरानी जांच के आदेश दिए गए.
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में पाया गया कि 2006 से 2010 के बीच नियमों की अनदेखी कर शिक्षकों का मनमाना स्थानांतरण किया गया. इसमें रिक्त पदों की अनदेखी, विषय विसंगति, क्षमता से अधिक पदस्थापन और प्रभाव व लेन-देन के आधार पर तबादलों की पुष्टि हुई.
जांच में यह भी सामने आया कि 21 दिसंबर 2006 और 27 दिसंबर 2007 की स्थापना समिति की बैठकों में लिए गए निर्णय नियमों के विरुद्ध थे. कई स्थानांतरण आदेश बिना स्वीकृति के जारी किए गए. इस मामले में 9 जनवरी 2012 को निगरानी थाना कांड संख्या 03/12 दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई थी.
तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो पर आरोप था कि उन्होंने रिक्त पदों के बिना ही शिक्षकों का स्थानांतरण किया और नियमों की अनदेखी की. जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद उनके खिलाफ पेंशन नियमावली के तहत कार्रवाई की गई.
इस मामले के मुख्य आरोपी तत्कालीन आरडीडीई श्याम नारायण कुंवर के खिलाफ वर्ष 2016 में ही कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें उनकी पेंशन से 10 प्रतिशत कटौती की गई थी.
भ्रष्टाचार मामले की प्रमुख तिथियां:
05 अगस्त 2006 – अनियमितताओं की शुरुआत
05 अगस्त 2010 – मामला उजागर
अगस्त 2010 – निगरानी जांच का आदेश
28 अप्रैल 2011 – जांच प्रतिवेदन विभाग को सौंपा गया
09 जनवरी 2012 – निगरानी थाना कांड दर्ज
21 फरवरी 2012 – विभागीय कार्रवाई प्रारंभ
27 अगस्त 2012 – आरोप प्रमाणित
15 मई 2026 – दंडादेश जारी
इस कार्रवाई को शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी जीत माना जा रहा है. जनसुराज पार्टी ने इसे सत्य और संघर्ष की जीत बताते हुए शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में आगे भी संघर्ष जारी रखने की बात कही है।
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