बाल विवाह में पकड़े जाने पर पंडित सहित बाराती भी जायेंगे जेल

Published by : RAJEEV KUMAR JHA Updated At : 23 Feb 2026 6:16 PM

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बाल विवाह के खिलाफ जन-जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को गांधी मैदान में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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सुपौल. बाल विवाह के खिलाफ जन-जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को गांधी मैदान में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार, नई दिल्ली के निर्देशानुसार व जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के मार्गदर्शन में आशा स्कीम के तहत संपन्न हुआ. कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (1 नवंबर 2007 से प्रभावी) की विस्तृत जानकारी दी गयी. बताया गया कि भारत में लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने पर किया गया विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है, जो एक गंभीर कानूनी अपराध है. इस अपराध में दोषी पाये जाने पर 02 वर्ष तक का कठोर कारावास और 01 लाख तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है. जागरूकता सत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह सिर्फ करने वाले ही नहीं, बल्कि करवाने या उसमें भाग लेने, प्रोत्साहन देने वाले जैसे माता-पिता, पंडित, रिश्तेदार या बाराती भी समान रूप से दंड के भागीदार होंगे. इसके साथ ही लोगों को बताया गया कि किसी भी बाल विवाह की शिकायत 1098, 181, 122 या 15100 हेल्पलाइन नंबरों पर की जा सकती है. कार्यक्रम में यह अहम जानकारी भी साझा की गयी कि बाल विवाह को अमान्य (रद्द) कराया जा सकता है. पीड़ित व्यक्ति न्यायालय में दर्ज करा सकते हैं याचिका यदि कोई बाल विवाह हुआ है, तो पीड़ित व्यक्ति बालिग होने के दो वर्ष के भीतर (20 वर्ष की आयु तक) न्यायालय में याचिका दायर कर विवाह को रद्द करवा सकता है. साथ ही बताया गया कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा बाल विवाह निषेध अधिकारी की नियुक्ति की जाती है, जो ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करते है. इस अवसर पर अधिवक्ता बृजभूषण नवीन ने कहा कि बाल विवाह न केवल कानून का उल्लंघन है. बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के साथ भी अन्याय है. पाराविधिक स्वयंसेवक मो निजाम, मो अज्जम व मिथिलेश कुमार चौधरी ने भी लोगों से अपील की कि वे समाज से इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करने में सहयोग करें. कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि कानूनी जानकारी और सामाजिक जागरूकता ही बाल विवाह उन्मूलन का सबसे सशक्त हथियार है.

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