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बाल देखरेख संस्थानों का डीएम ने किया निरीक्षण

Updated at : 29 Nov 2025 5:53 PM (IST)
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बाल देखरेख संस्थानों का डीएम ने किया निरीक्षण

बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास व्यवस्था की हुई विस्तृत समीक्षा

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– बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास व्यवस्था की हुई विस्तृत समीक्षा सुपौल. जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में बाल देखरेख संस्थानों के त्रैमासिक निरीक्षण के लिए गठित जिलास्तरीय निरीक्षण समिति ने शनिवार को जिले में संचालित विभिन्न बाल देखरेख संस्थानों का विस्तृत निरीक्षण किया. यह निरीक्षण समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा संचालित संस्थानों की व्यवस्था, देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास प्रक्रियाओं की समीक्षा के उद्देश्य से किया गया. निरीक्षण की शुरुआत पिपरा रोड स्थित यादव कॉम्प्लेक्स में संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान से हुई. यहां आवासित चार बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य और परवरिश की स्थिति का निरीक्षण किया गया. समिति ने संस्थान द्वारा बच्चों के गोद लेने से जुड़े मामलों की प्रगति की भी समीक्षा की. निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने उपस्थित चिकित्सा पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों को यह जानकारी दी जाए कि जन्म के बाद परित्यक्त बच्चों की सूचना तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दें. किसी भी चिकित्सा केंद्र द्वारा अवैध रूप से बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया नहीं की जाए, क्योंकि कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण की अनुमति केवल विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान को है. किसी चिकित्सा केंद्र द्वारा अवैध दत्तक ग्रहण कराना गंभीर अपराध है और दंडनीय है. समिति ने परिसर की स्वच्छता, भोजन, आवासन, शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की प्रशंसा विशिष्ट दत्तक संस्थान के बाद समिति ने चैनसिंहपट्टी स्थित वृहद आश्रय गृह में संचालित दो बाल गृहों का निरीक्षण किया. इन दोनों बाल गृहों में कुल 60 बच्चे आवासित हैं. समिति ने परिसर की स्वच्छता, भोजन, आवासन, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की प्रशंसा की. बच्चों से उनकी उपलब्ध सुविधाओं और देखभाल के बारे में बातचीत भी की गई. निरीक्षण समिति ने किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत अनाथ, बेसहारा, परित्यक्त और घर से भागे हुए बच्चों के संरक्षण की व्यवस्थाओं की समीक्षा की. समिति ने यह भी निर्देश दिया कि बच्चों के परिवार का पता लगाने और पुनर्वास की संभावनाओं का आकलन किया जाए. पुनर्वास अथवा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए. निरीक्षण के दौरान समिति ने बाल गृहों के कर्मियों द्वारा बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और सेवाओं की गुणवत्ता की सराहना की और उन्हें बेहतर कार्य जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया. निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी के साथ सहायक निदेशक, बाल संरक्षण सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्वशिक्षा अभियान, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य आदि अधिकारी उपस्थित रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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