सीएस ने लिया संज्ञान, दोषियों के विरुद्ध होगी कार्रवाई

Updated at :24 Sep 2016 8:10 AM
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सीएस ने लिया संज्ञान, दोषियों के विरुद्ध होगी कार्रवाई

सुपौल : शहर के गुदरी बाजार स्थित डॉ विनय कुमार के निजी क्लिनिक पर गुरुवार को हुए हंगामा मामले से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद सिविल सर्जन डॉ रामेश्वर साफी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई आरंभ कर दिया है.सीएस ने प्रभात खबर को बताया कि सदर अस्पताल से मरीज निजी क्लिनिक पर ले […]

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सुपौल : शहर के गुदरी बाजार स्थित डॉ विनय कुमार के निजी क्लिनिक पर गुरुवार को हुए हंगामा मामले से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद सिविल सर्जन डॉ रामेश्वर साफी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई आरंभ कर दिया है.सीएस ने प्रभात खबर को बताया कि सदर अस्पताल से मरीज निजी क्लिनिक पर ले जाना गंभीर विषय है.इस मामले की समुचित जांच करवायी जायेगी.ज्ञात हो कि गुरुवार को डॉ विनय कुमार के निजी क्लिनिक पर नवजात की उपचार के दौरान हुई मौत के बाद परिजनों ने जम कर बबालकाटा था. वहीं आंदोलनरत परिजनों के द्वारा क्लिनिक के कंपाउंडर द्वारा कैंची दिखा कर धमकाने का भी आरोप लगाया गया था
इस मामले को प्रभात खबर द्वारा शुक्रवार के अंक में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया.जिसके बाद सिविल सर्जन द्वारा खबर पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई आरंभ किया गया है. वहीं अस्पताल से मरीज को बहला फुसला कर निजी क्लिनिक ले जाने के मामले का खुलासा होने के बाद भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कही है. भाजयुमो जिलाध्यक्ष गिरीश चंद्र ठाकुर, उपाध्यक्ष प्रकाश झा ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि सदर अस्पताल में सक्रिय दलाल गिरोह द्वारा भोले-भाले मरीजों को बहला-फुसला कर निजी क्लिनिक ले जाया जा रहा है, जो गंभीर विषय है.
उन्होंने कहा कि इस गिरोह में कई सरकारी चिकित्सक व कर्मियों की संलिप्तता है.कहा कि यदि इस मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई नहीं की गयी तो बाध्य हो कर भाजयुमो कार्यकर्ताओं द्वारा उग्र आंदोलन प्रारंभ किया जायेगा.
डॉ विनय ने ही किया था रेफर : सदर अस्पताल के रेफर पंजी एवं बीएसटी तथा मरीज के परिजनों के पास मौजूद पुर्जा के अवलोकन से साफ स्पष्ट होता है कि सदर अस्पताल में नवजात का उपचार डॉ विनय कुमार के द्वारा ही किया गया.
साथ ही उनके द्वारा ही नवजात की हालत को गंभीर बता कर बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया.अब सवाल यह उठता है कि जिस चिकित्सक ने सदर अस्पताल में नवजात के उपचार के लिए अपने आप को सक्षम नहीं समझा, उसी चिकित्सक के निजी क्लिनिक पर जाने के बाद वे किस प्रकार नवजात के उपचार के लिए सक्षम हो गये.जबकि उक्त चिकित्सक सदर अस्पताल में भी अपने निजी क्लिनिक स्थित दुकान पर उपलब्ध एक खास कंपनी का ही दवा लिखते हैं.हंगामें के दौरान मरीज के परिजनों ने भी इस बात का खुलासा किया था कि चिकित्सक डॉ कुमार द्वारा सदर अस्पताल में संसाधन नहीं रहने की बात बता कर निजी क्लिनिक ले जाने की सलाह दी थी.
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