ठीक से नहीं मिलता पोषाहार

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पोषण व कृषि पर हुए सर्वेक्षण में निराशाजनक स्थिति सुपौल : प्रगति के तमाम कवायद के बावजूद जिले में बच्चों में पोषण की स्थिति खस्ता हाल है, तो जिले के किसानों की स्थिति भी बेहतर नहीं है. इस तथ्य का खुलासा राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद और इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान, मुंबई द्वारा पोषण और […]

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पोषण व कृषि पर हुए सर्वेक्षण में निराशाजनक स्थिति
सुपौल : प्रगति के तमाम कवायद के बावजूद जिले में बच्चों में पोषण की स्थिति खस्ता हाल है, तो जिले के किसानों की स्थिति भी बेहतर नहीं है. इस तथ्य का खुलासा राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद और इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान, मुंबई द्वारा पोषण और कृषि पर किये गये एकीकृत सर्वेक्षण (स्पंदन ) से हुआ है.
संस्थान की 13 सदस्यीय टीम ने जिले के दो प्रखंडों के चार गांवों में सर्वेक्षण कार्य पूरा किया. यह सर्वेक्षण तीन सप्ताह में पूरा हुआ. गुरुवार को पूरी टीम सीतामढ़ी के लिए रवाना हुई.
अधिसंख्य आबादी गरीबी व गंदगी के बीच जी रही : पोषण ग्रुप की शोधार्थी दीपिका लोनकर ने बताया कि राज्य के अन्य जिलों की तुलना में इस जिले में पोषण की स्थिति बदतर है. गंदगी व गरीबी के बीच अधिसंख्य आबादी बसर कर रही है. अशिक्षा की वजह से सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्हें कम है. इस वजह से बिचौलिये उनकी हकमारी आसानी से कर जाते हैं. सबसे खराब स्थिति आंगनबाड़ी केंद्रों की है, जहां बच्चों को सही तरीके से पोषाहार भी नहीं मिल पा रहा है. सुश्री लोनकर ने माना कि इस राज्य की स्थिति पोषण के मामले में छत्तीसगढ़ से भी बदतर है.
सर्वेक्षण की प्रक्रिया
टीम ने सर्वेक्षण के लिए रैंडम सैंपलिंगद्वारा परिवारों का चयन किया. एक परिवार में कृषि और पोषण से जुड़ी टीम ने तीन घंटे तक समय बिताया. परिवार के सदस्यों से लंबी पूछताछ की गयी और सामूहिक चर्चा भी हुई. परिवार के सदस्यों से कृषि और पशुधन, पोषण पदार्थो का ग्रहण और उपलब्धता, ऊंचाई व वजन, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की देखभाल पद्धति, सामाजिक आर्थिक जानकारी, बच्चों की पोषण स्थिति में खाद्य और गैर खाद्य कारकों की भूमिका आदि हासिल किया गया. टीम ने परिवार के सदस्यों का हीमोग्लोविन और विटामिन ए की भी जांच की.
किसान की स्थिति भी ठीक नहीं
कृषि ग्रुप की शोधार्थी सुप्रिया के अनुसार, जिले में किसानों की स्थिति बदहाल है. खास यह है कि यहां के किसानों को लागत के अनुपात में फसल का मूल्य प्राप्त नहीं हो पाता है. इस वजह से दिनोंदिन किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है. कई किसानों ने बताया कि पूंजी के अभाव में वे कृषि में उर्वरक, कीट नाशक और सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं कर पाते हैं. कृषि की स्थिति का पोषण से गहरा संबंध है.
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