50 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित, परेशान रहे ग्राहक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Oct 2019 8:00 AM (IST)
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सुपौल : विभिन्न मांगों के समर्थन एवं ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन एवं बैंक एम्पलाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त आह्वान पर मंगलवार को जिला मुख्यालय सहित आसपास के सभी सरकारी एवं गैर सरकारी बैंक की शाखाएं बंद रही. बैंक की शाखा बंद रहने से जिले भर में 50 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित […]
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सुपौल : विभिन्न मांगों के समर्थन एवं ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन एवं बैंक एम्पलाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त आह्वान पर मंगलवार को जिला मुख्यालय सहित आसपास के सभी सरकारी एवं गैर सरकारी बैंक की शाखाएं बंद रही. बैंक की शाखा बंद रहने से जिले भर में 50 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ. बैंक के एक दिवसीय हड़ताल पर रहने से जरूरतमंदों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. सभी एटीएम के भी बंद रहने से ग्राहकों की राशि निकासी नहीं हो सकी.
जिस कारण उनलोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. एसोसिएशन के आह्वान पर बैंक कर्मियों ने शहर में घूम-घूमकर उन शाखाओं को बंद करा दिया जो शाखाएं खुली हुई थी. जबकि शहर की अधिकांश शाखा पहले से बंद थी. ग्राहकों ने बताया कि मंगलवार को बैंक के हड़ताल पर जाने की पूर्व सूचना नहीं दिये जाने से उनलोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा.
बैंकों के विलय से बैंकिंग परिदृश्य हो जायेगा विलुप्त
हड़ताल में शामिल बैंक कर्मियों ने बताया कि देश में सार्वजनिक क्षेत्र में बैंकिंग की शुरुआत 1955 में हुई. जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अस्तित्व में आया. इसके बाद 14 प्रमुख निजी बैंकों का 1969 में राष्ट्रीयकरण किया गया और 06 अन्य निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण 1980 में किया गया.
इस प्रकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख स्तंभ बन गये. 08 हजार शाखाओं से बढ़कर बैंकों की शाखा 90 हजार तक पहुंच गई. साथ ही बैंकों की शाखाएं दूर-दराज के गांवों में भी खोली गई. जिससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आम आदमी तक हो गई.
05 हजार करोड़ से बढ़कर सार्वजनिक क्षेत्रों में आज 85 लाख करोड़ जमा राशियां संग्रहित की हैं. वहीं 60 लाख करोड़ तक के ऋण वितरित किये गये हैं. इस ऋण का 40 प्रतिशत भाग प्राथमिकता के आधार पर कृषि, रोजगारजनक, गरीबी उन्मूलन, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य एवं शिक्षा, महिला सशक्तिकरण आदि को प्रदान किया गया है. हरित क्रांति, श्वेत क्रांति आदि सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों का परिणाम है. वक्ताओं ने कहा कि भारत को बैंकिंग के विस्तार की आवश्यकता है न की एकीकरण की.
दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों हजार शाखाएं खोली है फिर भी प्रत्येक नागरिक तक बैंक नहीं पहुंच सकें है. वित्त मंत्री ने राष्ट्र को सूचित किया है कि 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पीएनबी, कैनरा बैंक, युनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, यूनाईटेड बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, सिंडिकेट बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और आंध्रा बैंक का विलय कर के 04 बैंक बना दिये जायेंगे. जिसका परिणाम होगा की बैंकिंग के परिदृश्य लुप्त हो जायेंगे. सरकार का तर्क है कि विलय से बैंक मजबूत होगा. इस निष्कर्ष का कोई प्रमाण नहीं है.
इसी तर्क के साथ दो वर्ष पूर्व 06 बैंकों का एसबीआइ पहले से ज्यादा मजबूत नहीं हुआ है. बल्कि एसबीआइ की समस्याएं बड़ी हो गई है. शाखाएं बंद हो गई है. स्टॉफ की अधिकता हो गई है. व्यवसाय का विस्तार धीमा पड़ गया है. एनपीए बढ़ गये है. इस तरह से बैंकों के विलय से बैंक स्वत: ही मजबूत नहीं हो पायेगा.
ये है मुख्य मांगें
बैंकों का विलय रोका जाय, जन विरोधी बैंकिंग के सुधारों को रोका जाय, खराब ऋणों कि वसूली सुनिश्चित कर ऋणचुक कर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाय, दंडनात्मक शुल्क लगाकर ग्राहकों को प्रताणित न किया जाय, सेवा शुल्कों में वृद्धि न कि जाय, जमा राशियों पर व्याज दर बढ़ाई जाय, नौकरी एवं नौकरियों की सुरक्षा पर हमले रोके जाय, सभी बैंकों में समुचित भर्ती की सुरक्षा कि जाय.
इस मौके पर अनिल कुमार, मिथिलेश कुमार, मुरारी झा, संजीत कुमार, नीरज कुमार, अरविंद कुमार, सुमित आनंद, हिमांशु कुमार, टुन्नू कुमार, अवधेश प्रसाद सिंह, दीपक कुमार आदि बैंक कर्मी उपस्थित थे.
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