जिस प्रकार शरीर जल से शुद्ध होता है सत्य से शुद्ध होता है मन
Updated at : 12 Jun 2019 12:36 AM (IST)
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करजाईन : करजाईन हाई स्कूल के मैदान पर आयोजित दो दिवसीय सत्संग का समापन हो गया. मौके पर नेपाल से पहुंचे संत उमा साहेब ने प्रवचन में कहा कि जिस प्रकार शरीर जल से शुद्ध होता है, उसी तरह मन सत्य से शुद्ध होता है. साथ ही मनुष्य की आत्मा विद्या व तप से शुद्ध […]
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करजाईन : करजाईन हाई स्कूल के मैदान पर आयोजित दो दिवसीय सत्संग का समापन हो गया. मौके पर नेपाल से पहुंचे संत उमा साहेब ने प्रवचन में कहा कि जिस प्रकार शरीर जल से शुद्ध होता है, उसी तरह मन सत्य से शुद्ध होता है. साथ ही मनुष्य की आत्मा विद्या व तप से शुद्ध होती है, बुद्धि ज्ञान से शुद्ध होता है.
उमा साहेब ने कहा कि काम, क्रोध तथा अशुभ कर्मों से अर्जन करने वाला मनुष्य नरक में गिरता है. जहां से उसका उद्धार होना संभव नहीं होता है. इसलिए मनुष्य सबसे पहले अपने अंदर देखे तथा अपने अंदर की बात सुने. अपने अंदर देखने एवं सुनने वालों को अंत में यह पता चल जाता है कि यही ईश्वर है.
फिर मनुष्य को कुछ जानने की जरुरत नहीं रहती है. उन्होंने यह भी सलाह दी की ईश्वर को जानने व समझने के लिए नित्य ध्यान एवं सत्संग करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि व्यभिचार, चोरी, नशा, हिंसा एवं क्रोध ये पांच महापाप का परित्याग कर नित्य सत्संग एवं ध्यान करने से मनुष्य का जीवन उज्जवल हो जाएगा. इस अवसर पर शंकर साहेब, रामनंदन वर्मा, शिक्षक महेश, तिलेश्वर, महेंद्र पासवान, नागेश्वर पासवान सहित स्थानीय सत्संग प्रेमी उपस्थित थे.
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