तलाक समस्या नहीं, समस्याओं का समाधान है

सुपौल : भारत सरकार द्वारा संसद में लाये गये तीन तलाक बिल के विरोध में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर जिले की मुस्लिम महिलाओं ने सोमवार को जिला मुख्यालय में एक विशाल मौन जुलूस निकाला. जुलूस के पहले हजारों की संख्या में महिलाएं स्थानीय ईदगाह मैदान में जमा हुई. जहां जुलूस […]
सुपौल : भारत सरकार द्वारा संसद में लाये गये तीन तलाक बिल के विरोध में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर जिले की मुस्लिम महिलाओं ने सोमवार को जिला मुख्यालय में एक विशाल मौन जुलूस निकाला. जुलूस के पहले हजारों की संख्या में महिलाएं स्थानीय ईदगाह मैदान में जमा हुई.
जहां जुलूस के संयोजक अकीला खातून सहित अन्य कई महिलाओं द्वारा संबोधित किया गया. वक्ताओं ने कहा कि तलाक समस्या नहीं बल्कि समस्याओं का समाधान है. रिपोर्टों के मुताबिक मुस्लिम समाज में तलाक का प्रतिशत 0.5 है. जबकि हिंदू समाज में यह 1.46 प्रतिशत है. शबाना खातून, दिलखुश साईबा, मुमताज बेगम, नेहा कौसर, दिलखुशी खदीजी, महनाज रहमानी, शहनाज रहमानी, नाजिया फरहत आदि ने कहा कि तलाक विरोधी बिल परिवार व समाज विरोधी है. महिलाओं के हक के खिलाफ है. इससे समाज में बिखड़ाव होगा. शरीअत में किसी भी प्रकार की दखलअंदाजी वे कबूल नहीं करेंगी. उन्होंने बिल को संविधान की धारा 14 एवं 15 के खिलाफ एवं पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप है.
डीएम को सौंपा राष्ट्रपति के नाम लिखित ज्ञापन
डीएम को मुस्लिम महिलाओं द्वारा सौंपे गये ज्ञापन में मुख्य रूप से छह बिंदुओं की चर्चा की गयी है. ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि वे तलाक विरोधी बिल का घोर विरोध करती हैं. साथ ही बिल को अतिशीघ्र वापस लेने की मांग करती हैं. उन्होंने कहा है कि यह बिल मुस्लिम पर्सनल लॉ में खुला हस्तक्षेप एवं संविधान की धारा 14 एवं 15 का उल्लंघन है. उन्होंने बिल को महिला एवं बाल विरोधी बताते हुए कहा है कि जब पति जेल या कहीं लंबे समय के लिये बाहर चले जाते हैं तो वे उन्हें गुजारा भत्ता किस प्रकार देंगे. तलाकशुदा पत्नी और बच्चों का खर्च कौन चलायेगा. बिल के अनुभाग 07 में लिखा है कि यह कृत अदालती दायरे के एंगल एवं गैर जमानती है. इसका मतलब कोई थर्ड पार्टी पति के खिलाफ शिकायत कर सकता है और उसमें पत्नी की इच्छा को महत्व नहीं दिया जायेगा. महिलाओं ने कहा कि निकाह एक सामाजिक अनुबंध है. लेकिन यह बिल इसे क्रिमिनल एक्ट बना देगा, जो अनैतिक एवं अनावश्यक है. कहा कि सभी महिलाएं शरीअत पर पूर्ण विश्वास रखती हैं. उस पर अमल करती हैं. इस्लाम में तलाक का प्रावधान अभिशाप नहीं बल्कि वरदान है. ज्ञापन में उन्होंने मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने एवं बिल को वापस लेने की मांग की है. प्रतिनिधि मंडल में मुमताज बेगम, अकिला खातून, दिलखुश प्रवीण, शबाना खातून, महनाज रहमानी, शहनाज रहमानी आदि शामिल थी.
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