मिथिला यूनिवर्सिटी से 85 हजार छात्र मांग रहे रिजल्ट, कुलपति ने खड़े किये हाथ, जानें क्या है पूरा मामला

डेटा सेंटर ने 20 लाख छात्रों का डेटा अपने पास रोक रखा है. ऐसे में स्नातक पार्ट-3 का रिजल्ट जारी नहीं हो पा रहा है. वहीं इस मामले पर कुलपति ने हाथ खड़े कर दिये हैं.
दरभंगा. ललित नारायण मिथिला विश्विद्यालय और डेटा सेंटर की लापरवाही की वजह से 85 हजार छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. डेटा सेंटर ने 20 लाख छात्रों का डेटा अपने पास रोक रखा है. ऐसे में स्नातक पार्ट-3 का रिजल्ट जारी नहीं हो पा रहा है. वहीं इस मामले पर कुलपति ने हाथ खड़े कर दिये हैं.
अब यह पूरा मामला अदालत में पहुंच गया है. अब ऐसे में हजारों छात्र परेशान हो रहे हैं और रिजल्ट जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि रिजल्ट नहीं जारी होने के कारण तकरीबन एक लाख छात्रों का भविष्य अंधकार में है.
रिजल्ट नहीं जारी होने से परेशान छात्र ललित नारायण मिथिला विवि के परिसर में कॉपी कलम की जगह बैनर पोस्टर लेकर घूमते नजर आ रहे हैं. छात्रों का कहना है कि उन्होंने मेहनत कर तृतीय पार्ट फाइनल ईयर का परीक्षा दी है. अब रिजल्ट में देरी की वजह उनके आगे के कॅरियर प्रभावित हो रहा है.
कई छात्रों का चयन बिहार से बाहर दूसरे यूनिवर्सिटी के लिए भी हो गया है, लेकिन फाइनल ईयर का रिजल्ट नहीं जारी होने के कारण छात्र नामांकन नहीं ले पा रहे हैं. इधर, इस मामले पर विश्विद्यालय प्रशासन ने मामला अदालत में होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है.
विश्वविद्यालय ने छात्रों की सुविधा के लिए एक निजी कंपनी के साथ 2016 में अनुबंध किया था, इसके अनुसार छात्रों का ऑनलाइन सभी तरह के फॉर्म भरने से लेकर रिजल्ट प्रकाशन करने का काम निजी कम्पनी के हाथ में था. इसी बीच, विश्विद्यालय ने यह अनुबंध अब पहले से काम कर रहे कंपनी को छोड़ दूसरी कंपनी से कर लिया.
ऐसे में पहली कंपनी विश्विद्यालय के इस फैसले के खिलाफ न सिर्फ अदालत में चली गयी, बल्कि छात्रों के सभी प्रकार के डाटा को देने से इनकार कर दिया. यही कारण है कि छात्रों के कॉपी मूल्यांकन के बाद भी विश्विद्यालय और डाटा सेंटर की इस लड़ाई में रिजल्ट घोषित नहीं हो पाया है.
इस मामले को लेकर कुलपति सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पहले से काम करने वाली कम्पनी विश्विद्यालय को लगातार ब्लैकमेल कर रही थी, उनका अनुबंध खत्म होने से पहले रिजल्ट प्रकाशन की बात कही गयी थी, लेकिन, उस कंपनी ने रिजल्ट प्रकाशन नहीं किया और मामले को अदालत में लेकर चली गयी.
कंपनी के पास करीब 20 लाख छात्रों का डेटा है, जिसे अब तक नहीं दिया गया है. छात्रों के रिजल्ट देने के मामले में उन्होंने अपने हाथ सीधे खड़े करते हुए कहा कि अदालत के फैसले के बाद ही छात्रों का रिजल्ट सम्भव है
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