सृजन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, सौ करोड़ की अवैध निकासी मामले में तीन बैंक के कर्मचारियों पर मामला दर्ज

Published at :25 Dec 2020 1:35 PM (IST)
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सृजन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, सौ करोड़ की अवैध निकासी मामले में तीन बैंक के कर्मचारियों पर मामला दर्ज

राज्य के बहुचर्चित सृजन घोटाले में पकड़े गये 99 करोड़ 88 लाख 69 हजार 830 रुपये के अतिरिक्त गबन के मामले में कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी. इसके साथ ही सृजन संस्था सहित कुछ अन्य बैंकों पर एक और केस दर्ज हो गया.

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भागलपुर. राज्य के बहुचर्चित सृजन घोटाले में पकड़े गये 99 करोड़ 88 लाख 69 हजार 830 रुपये के अतिरिक्त गबन के मामले में कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी. इसके साथ ही सृजन संस्था सहित कुछ अन्य बैंकों पर एक और केस दर्ज हो गया.

यह राशि जिला कल्याण विभाग के खाते से गबन किया गया था. डीएम प्रणव कुमार के निर्देश पर जिला कल्याण पदाधिकारी श्याम प्रसाद यादव ने कोतवाली थाने को आवेदन सौंपा था. थाने को महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी भी सौंपी गयी है. अब यह मामला सीबीआइ को सौंपने की कार्रवाई पूरी की जायेगी.

सृजन मामले में महालेखाकार लेखा परीक्षा दल द्वारा वर्ष 2007 से 2017 के बीच की अवधि का विशेष अंकेक्षण किया गया था. इसमें 99 करोड़ 88 लाख 69 हजार 830 रुपये का अतिरिक्त गबन का मामला प्रकाश में आया है. जिला प्रशासन के इस कदम से घोटाले के आरोपियों में हड़कंप मच गया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गबन मामले में बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के वैसे कर्मचारियों पर प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है, जिनपर करोड़ों रुपये के इस घोटाले में शामिल होने का आरोप है. इस संबंध में जिला कल्याण पदाधिकारी श्याम प्रसाद यादव ने बताया कि महालेखाकार के रिपोर्ट में घोटाला का खुलासा हुआ था.

इसके पश्चात संबंधित लोगों पर डीएम ने प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए उन्हें निर्देश किया था. वहीं, 121.71 करोड़ रुपए के गबन में पहले दो प्राथमिकी दर्ज हुई थी.

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद महालेखाकार ने वर्ष 2007 से 2017 तक में सरकारी राशि की जांच की थी, जिसमें गबन की राशि 221.60 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका था. इसी क्रम में 100 करोड़ की अवैध निकासी के मामले में बैंक कर्मियों पर केस दर्ज करवाया गया है.

मालूम हो की सृजन घोटाले के खुलासे के बाद पहली प्राथमिकी 7 अगस्त 2017 को जिला नजारत शाखा में पदस्थापित नाजिर ने दर्ज कराई थी. इसके बाद जांच में परत दर परत घोटाले का राज पूरी तरह से खुलने लगा था.

इसी कड़ी में एजी की ऑडिट रिपोर्ट में तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी रामलला सिंह, राम ईश्वर सिंह, ललन कुमार सिंह और अरुण कुमार के कार्यकाल में घोटाले कि बात कही गई थी.

पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने सीबीआई से पत्र के माध्यम से पूर्व में तिलकामांझी थाना में दर्ज कांड संख्या 555/2017 में शेष राशि 99 करोड़ 88 लाख 69 हजार रुपए को जोड़कर जांच करने का अनुरोध किया था.

Posted by Ashish Jha

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