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बिहार में स्मार्ट सिटी योजना फेल, स्वच्छता मामले में टॉप 35 में पटना नहीं, जानिये सीइओ ने क्या बताया कारण

Updated at : 13 Apr 2022 12:08 PM (IST)
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बिहार में स्मार्ट सिटी योजना फेल, स्वच्छता मामले में टॉप 35 में पटना नहीं, जानिये सीइओ ने क्या बताया कारण

स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 को लेकर फीडबैक देने में राज्य के लोग रुचि नहीं ले रहे हैं. एक माह से अधिक समय से चल रहे सर्वेक्षण में फीडबैक देने में देश के टॉप 20 शहरों में बिहार का एक भी शहर शामिल नहीं हो पाया है. यह स्थिति एक लाख से अधिक और एक लाख से कम आबादी वाली दोनों श्रेणियों के शहरों को लेकर है.

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अनिकेत त्रिवेदी, पटना. स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 को लेकर फीडबैक देने में राज्य के लोग रुचि नहीं ले रहे हैं. एक माह से अधिक समय से चल रहे सर्वेक्षण में फीडबैक देने में देश के टॉप 20 शहरों में बिहार का एक भी शहर शामिल नहीं हो पाया है. यह स्थिति एक लाख से अधिक और एक लाख से कम आबादी वाली दोनों श्रेणियों के शहरों को लेकर है. जबकि पड़ोसी झारखंड का एक शहर धनबाद टॉप-20 शहरों में चौथे नंबर पर है.

94 हजार से अधिक लोगों ने फीडबैक

अब तक वहां के 94 हजार से अधिक लोगों ने फीडबैक दिया है. मालूम हो कि फीडबैक देने की अंतिम तिथि 15 अप्रैल तक ही है. राज्य में सर्वाधिक पटना के 30 हजार से अधिक लोगों ने फीडबैक दिया है. इसके अलावा गया के करीब 4800, भागलपुर के 5700, मोतिहारी के 11500, मुजफ्फरपुर के 10500 लोगों ने फीडबैक दिया है.

क्यों जरूरी है फीडबैक

स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 के लिए तय कुल 7200 अंकों में 600 अंक केवल सिटीजन फीडबैक को लेकर ही है. ये रैंकिग बढ़ाने में मददगार होंगे. फीडबैक स्वच्छता एप, वेबसाइट सहित कुल चार माध्यमों से लिए जा रहा है. स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 2018 से रैंकिंग के जरिए स्मार्ट शहरों के आकलन का सिस्टम शुरू किया गया था. कोरोना काल के बाद से प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. लोगों को सुविधा मुहैया कराने और तय समय में प्रोजेक्ट को पूरा करने वाले शहरों का मूल्यांकन किया जा रहा है.

रियल टाइम रैंकिंग में 71वां स्थान

शहर को सुंदर बनाने के लिए स्मार्ट सिटी मिशन की ओर से अब रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है और इसके आधार पर प्रतिदिन रैंकिंग तय हो रही है. इस रियल टाइम रैंकिंग के मुताबिक मंगलवार को भी देश के 100 स्मार्ट सिटीज में पटना की रैंकिंग 71वीं रही. राज्य के अन्य तीन शहरों की रैंकिंग तो और भी नीचे है. पिछले दो साल में राज्य के चारों शहरों की रैंकिंग 50 से ऊपर नहीं रही है. रैंकिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी आधार पर केंद्र सरकार की ओर से राशि मुहैया करायी जाती है.

पटना को नंबर-1 बनाने की दिशा में हो रहा काम

पटना स्मार्ट सिटी के सीईओ मो. शमशाद ने कहा कि पटना को स्मार्ट सिटी मिशन में देश के अन्य शहरों की तुलना में बाद में शामिल किया गया है. इसके चलते भी प्रोजेक्ट को पूरा करने में देरी हुई है. लेकिन अब सभी प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की दिशा में काम हो रहा है, ताकि पटना को नंबर-1 की रैंकिंग में लाया जा सके. इसी सोच के साथ स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कार्य किए जा रहे हैं.

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