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सावन की पहली सोमवारी आज

Updated at : 13 Jul 2025 9:36 PM (IST)
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सावन की पहली सोमवारी आज

भगवान भोले भंडारी को समर्पित सावन मास का शुभारंभ शुक्रवार से हो गया. वैसे तो महादेव व उनके परिवार का पूजन चातुर्मास में करना कल्याणकारक, समृद्धिदायक व पूण्य दायक होता है. परंतु सावन का सोमवार शिव पूजन के लिए खास माना गया है. ऐसे में सावन की पहली सोमवारी का महत्व बढ़ जाता है.जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब शिव मंदिरों सोमवार को उमड़ेगा.

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प्रतिनिधि, सीवान. भगवान भोले भंडारी को समर्पित सावन मास का शुभारंभ शुक्रवार से हो गया. वैसे तो महादेव व उनके परिवार का पूजन चातुर्मास में करना कल्याणकारक, समृद्धिदायक व पूण्य दायक होता है. परंतु सावन का सोमवार शिव पूजन के लिए खास माना गया है. ऐसे में सावन की पहली सोमवारी का महत्व बढ़ जाता है. जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब शिव मंदिरों आज सोमवार को उमड़ेगा. प्रमुख मंदिरों में शुमार महादेवा शिव मंदिर, सिसवन के महेंद्र नाथ मंदिर, सोहगरा शिव धाम व जीरादेई के अनंत धाम मंदिर में सावन की सोमवारी पर श्रद्धालु जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करेंगे. बड़ी संख्या में भक्त गंगाजल से अपने इष्ट का अभिषेक करेंगे. इसके मद्देनजर रविवार को मंदिरों में तैयारियों का सिलसिला चलता रहा. बाणासुर ने कराया था गुठनी के सोहगरा धाम मंदिर का निर्माण- गुठनी के सोहगरा में स्थित बाबा हंसनाथ स्वयंभू शिवलिंग है. इस शिवलिंग की स्थापना द्वापर युग में राक्षस राज बाणासुर ने कराया था. काशी नरेश ने भी यहां संतान प्राप्ति के लिए आराधना की थी. सोहगरा धाम का पौराणिक महत्व है. इसका वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में भी है. मंदिर निर्माण के समय ही बाणासुर ने एक पोखरा भी खोदवाया था. जिसमें स्नान करने से कुष्ठ रोग समेत अन्य असाध्य रोग ठीक हो जाते है. मान्यताओं के मुताबिक बाणासुर की महान शिव भक्तिनी पुत्री उषा यहीं पर महादेव की आराधना करती थी. शिव के वरदान से इसी स्थान पर ऊषा की मुलाकात श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध से हुई और दोनों का विवाह हुआ था. यहां जलाभिषेक करने से संपूर्ण मनोकामना पूर्ण होती है. बोलबम की नारों से गूंज उठता है अनंत नाथ धाम जीरादेई प्रखंड क्षेत्र के अकोल्ही में अवस्थित अनंत नाथ शिव मंदिर लोगों के आस्था का केंद्र है. महाशिवरात्रि के दिन शिव भक्तों का हुजूम यहां उमड़ पड़ता है. यह मंदिर बोल बम की नारा से गुंजायमान हो जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस शिव लिंग पर जलाभिषेक करने से भक्तों की संपूर्ण मनोकामना पूर्ण होती है. अनन्त नाथ धाम की महिमा व ख्याति बहुत है. यहां साक्षात नाग देवता दर्शन दिए थे. पंडित गिरीश नारायण तिवारी ने बताया कि अकोल्ही अनन्तनाथ धाम मंदिर में 2001 में सवा महीना तक नाग देवता प्रतिदिन दर्शन दिए थे. जिनके साथ दो विरनी भी प्रतिदिन निकलती थी. 2005 में भी एक बार पुनः नाग देवता दर्शन दिए थे . नेपाल नरेश ने कराया था महेंद्रनाथ मंदिर का निर्माण- सिसवन प्रखंड के स्थित मेंहदार में अंतरराष्ट्रीय महत्व का शिव मंदिर है. करीब सात सौ वर्ष पूर्व नेपाल के राजा महेंद्र ने इसका निर्माण कराया था. इसलिए इसे महेंद्रनाथ मंदिर भी कहा जाता है. यहां स्थित गड्ढे के पानी से राजा का कुष्ठ रोग ठीक हुआ था. तब राजा ने मंदिर बनवाया. वहीं 551 बीघे का पोखरा खुदवाया. इसमें कमल के पौधों की अधिकता के चलते इसे कमलदह सरोवर कहा जाता है. मंदिर परिसर में राम, लक्ष्मण, सीता, बजरंग बली, माता पार्वती, काली माता, भैरव, भगवान आशुतोष का भी मंदिर है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPAK MISHRA

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