सीवान: पश्चिम बंगाल के रानीगंज में राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा तोड़े जाने पर सीवान के बुद्धिजीवियों में रोष

Author Manish giri|Edited by Vivek Ranjan
Updated:
विज्ञापन
राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा | Prabhat Khabar Network

राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा | Prabhat Khabar Network

पश्चिम बंगाल के रानीगंज में विश्वविख्यात विद्वान राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा तोड़े जाने की घटना से सीवान के बुद्धिजीवियों में गहरा रोष है. उन्होंने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा पर हमला बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

विज्ञापन

सीवान: पश्चिम बंगाल के रानीगंज में विश्वविख्यात विद्वान, साहित्यकार और इतिहासकार राहुल सांकृत्यायन की आदमकद प्रतिमा तोड़े जाने की घटना की सीवान के बुद्धिजीवियों ने कड़ी निंदा की है. इस संबंध में जारी संयुक्त वक्तव्य में इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई तथा प्रतिमा का शीघ्र पुनर्स्थापन करने की मांग की गई है.

बुद्धिजीवियों ने कहा कि वर्ष 1994 में राहुल सांकृत्यायन की जन्मतिथि के अवसर पर रानीगंज में स्थापित की गई प्रतिमा को क्षति पहुंचाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. राहुल सांकृत्यायन ने भारतीय साहित्य, इतिहास, दर्शन और संस्कृति के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया. उन्होंने सैकड़ों पुस्तकों की रचना की, स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा तिब्बत से दुर्लभ पांडुलिपियां लाकर भारतीय ज्ञान-संपदा को समृद्ध किया. ये बहुमूल्य पांडुलिपियां आज पटना संग्रहालय की धरोहर हैं.

सीवान और सारण से रहा गहरा जुड़ाव . किसान आंदोलन का किया नेतृत्व

संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि राहुल सांकृत्यायन का सीवान और सारण क्षेत्र से गहरा संबंध रहा है. उन्होंने सीवान की धरती पर किसान आंदोलन का नेतृत्व किया, लाठियां खाईं और जेल भी गए. वर्ष 1948 में गोपालगंज में आयोजित भोजपुरी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की थी. सारण जिले के परसा स्थित परसागढ़ मठ में उन्होंने संन्यासी के रूप में भी समय बिताया. उनके जन्मशती वर्ष पर सीवान के अमवारी में आयोजित भव्य समारोह में उनकी पत्नी कमला सांकृत्यायन और पुत्र जेता सांकृत्यायन भी शामिल हुए थे.

प्रतिमा तोड़ना असहिष्णुता का परिचायक . दोबारा ऐसी घटना रोकने की मांग

बुद्धिजीवियों ने कहा कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी महापुरुष की प्रतिमा को तोड़ना असहिष्णुता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति अनादर का परिचायक है. सभी बुद्धिजीवियों ने मांग की कि राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा को अविलंब पुनः स्थापित किया जाए तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं.

संयुक्त वक्तव्य पर राहुल जन्मशती समारोह के संयोजक विनोद प्रसाद सिन्हा, विकल्प जागृति के राष्ट्रीय सदस्य दीपक, लेखक प्रो. जितेंद्र वर्मा, राहुल विचार मंच के विनोद कुमार, किसान नेता रामायण सिंह, इंकलाबी नवजवान सभा के अध्यक्ष सोनू कुशवाहा, जागृति के सचिव प्रशांत पुष्कर, साहित्य कला मंच के अध्यक्ष दिलीप कुमार शर्मा 'दीपक' तथा सचिव सुभाष राय सहित अन्य बुद्धिजीवियों के हस्ताक्षर हैं.

इसे भी पढ़ें:  किस्तों में टूट रही है प्रशांत किशोर की पार्टी, बांकीपुर उपचुनाव से पहले जन सुराज के तीन और नेता बीजेपी में शामिल


विज्ञापन
Manish Giri

लेखक के बारे में

By Manish Giri

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन